भुखमरी की कगार पर उत्तर प्रदेश कल्याण निगम के कर्मचारी
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उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी निगम की तरफ से चलाए जा रहे फैमिली बाजार और डिपो के जरिए कर्मचारियों को कम दामों पर सामान उपलब्ध कराने के काम में मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। इस तरह कल्याण निगम के कर्मचारियों को कम दामों पर सामान उपलब्ध कराकर उनपर पड़ने वाले बोझ को कम करने की कोशिश की जाती है लेकिन इसे लेकर उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। दरअसल कल्याण निगम के कर्मचारियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निगम व्यापार के दूसरे जरियों से फंड जुटाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन उसके इन प्रयासों में रोड़ा अटकाया जा रहा है।

माना जा रहा है कि कल्याण निगम की राह में रोड़ा अटकाने का काम निगम के ही पूर्व अधिकारी, पूर्व कर्मचारी और कुछ तथाकथित पत्रकारों की मिलीभगत से हो रहा है। क्योंकि लगातार कल्याण निगम के कामों पर आरोप लगाया जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि कल्याण निगम की तरफ से सस्ते दामों पर आयोडीन नमक की आपूर्ति के लिए निकाले गए टेंडर की शर्तों को दबाव में लगातार बदलने या फिर रद्द कराने का प्रयास हो रहा है। जबकि इस टेंडर में राज्य सरकार की तरफ से कोई अनुदान या फिर किसी प्रकार का बजट शामिल नहीं है।

यही नहीं कल्याण निगम की तरफ से लगातार अपने फैमिली बाजारों और डिपो के लिए GST में छूट की माँग की जा रही है ताकि उनकी तरफ से कर्मचारियों को और सस्ते दामों पर सामान उपलब्ध कराया जा सके। लेकिन उनकी माँग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसे लेकर भी उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी निगम के कर्मचारियों में नाराज़गी है। सबसे बड़ा बात ये है कि कल्याण निगम के करीब 800 कर्मचारियों को वेतचन तक नहीं मिल पा रहा है जिससे वो भुखमरी की कगार पर पहुँच गए हैं।

उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को हो रही परेशानी की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। लेकिन उनपर अब तक कोई सुनवाई नहीं की गई।
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