शहीद का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हुआ
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योगेंद्र गौतम। जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों की गोली से शहीद हुए सैनिक विजय कुमार का पार्थिव शरीर मंगलवार को सैन्य वाहन से रात में उनके गाँव रावतपुर पहुँचा और शहीद के अंतिम दर्शन के लिए गाँव के सुभाष इंटर कॉलेज मैदान में रखा गया। जहां क्षेत्र ही नहीं जनपद भर से लोगों ने आकर शहीद विजय कुमार को श्रद्धान्जलि दी।
शहीद के पिता देव राज माता कृष्णा देवी व पत्नी प्रतिभा देवी ने जैसे ही ताबूत को देखा उनके करुण क्रंदन से आसमान फट रहा था, शहीद विजय की बहने विजय लक्ष्मी, आरती और गुड़िया अपने इकलौते भाई के शव से लिपट लिपट कर रो रही थीं।
विधान सभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित, सदर विधायक पंकज गुप्ता, मंत्री रमा पति शास्त्री आदि ने पहुंच कर शहीद विजय कुमार को श्रद्धांजलि अर्पित अंतिम सलामी दी। विजय कुमार अमर रहें, भारत माता की जय, पाकिस्तान मुर्दाबाद,   जब तक सूरज चाँद रहेगा विजय तुंहारा नाम रहेगा के नारों के साथ हजारों की संख्या में उमड़ा जन सैलाब सैनिक को नम् आँखों से अंतिम विदाई दे रहा था। जिले के आला अधिकारी, एसपी हरीश कुमार, डीएम सुरेंद्र कुमार पाण्डेय, सीडीओ प्रेम रंजन, एसडीएम सदर, एसडीएम बीघापुर , सीओ सिटी, सीओ बीघापुर, सर्किल के चारों थाना प्रभारी आदि सभी ने श्रद्धान्जलि अर्पित की।
विजय कुमार जिस एसएसबी 42 वीं बटालियन में थे, उससे डीआईजी प्रताप सिंह चूड़ावत, राजेंद्र कुमार डीआईजी लखीमपुर, कमाण्डेन्ट प्रवीण कुमार, डिप्टी कमाण्डेन्ट शैलेन्द्र पाण्डेय आदि ने अपने सैनिक को अंतिम विदाई दी। क्षेत्र से हरि सहाय मिश्र मदन,  अंकित परिहार, वीर प्रताप सिंह शहीद को श्रद्धाजलि दी।
तत्काल सहायता के रूप में विभाग द्वारा 1 लाख 10 हजार रुपए नगद व 15 लाख रुपए की चेक परिजनों को दी गई। तो प्रदेश सरकार की ओर से 20 लाख रुपए शहीद के खाते में व 5 लाख रुपए शहीद विजय के माता पिता के खाते में जमा कराए जाने की बात विधान सभा अध्यक्ष ने कही। तो विभगीय लोगों ने बताया कि 35 लाख रुपए शहीद विजय के  परिवार को अभी विभाग की ओर से और दिया जाएगा।  सरकार की ओर से कहा गया कि शहीद के सम्मान में जैसा ग्रामीण व परिजन चाहेंगे वैसा किया जाएगा, जिसमें शहीद प्रतिमा व पार्क निर्माण आदि की बात कही गई तो साथ ही यह भी कहा गया कि परिवार को कृषि योग्य जमीन भी दी जायेगी। विभगीय प्रक्रिया में आश्रित को नौकरी भी देने की बात कही गई।
दोपहर बाद शहीद का अंतिम संस्कार भारी हुजूम के साथ पूरे सैन्य सम्मान के साथ बक्सर घाट पर कर दिया गया।

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