430 एकड़ जमीन हड़पने का केस अभी भी सिर्फ फाइलों में
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नीरज कुमार/ तख्त बदला, ताज बदला प्रदेश में बड़े वायदे के साथ भ्र्ष्टाचार मुक्त करने वाली योगी सरकार आई,मगर पीलीभीत में डीएम मासूम अली सरबर के द्वारा किये गए भूमि घोटाले की जांच एक बर्ष के अंतराल में भी फाइलों में कैद है। अब पुलिस की ओर से वयान आया है कि उनके हस्ताक्षर का नमूना लेकर एक्सपर्ट से जांच कराई जायेगी। इससे से कुछ हलचल सी हुई है। यह प्रकरण सपा सरकार के समय का है। अत्यंत ही सुनियोजित तरह से वक्फ बोर्ड की जमीन का घोटाला डीएम की कथित संलिप्तता में कर दिया गया था। सरकार बदलने की उम्मीद शायद किसी को भी नहीं थी,विशेषकर उन्हें जो समाजवादी या उनसे जुड़े लोग थे।
पीलीभीत जिले की नई बनी तहसील अमरिया के मुलईया गांव में वक्फ बोर्ड की 430 एकड़ जमीन को तत्कालीन जिलाधिकारी मासूम अली सरबर के कथित फर्जी हस्ताक्षर कर हड़पने के मामले में एक साल बीतने के बाद कुछ तेज़ी आयी है। इस प्रकरण में अब तक जांच कागज़ों तक ही सीमित थी। अब कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए क्राइम ब्रांच की टीम हस्ताक्षर की सत्यता का पता लगाने का प्रयास कर रही है। इसके लिए तत्कालीन डीएम मासूम अली सरवर के हस्ताक्षर का नमूना लेकर उसका एक्सपर्ट से मिलान कराया जाएगा।
तहसील अमरिया के गांव फुलईया में वक्फ बोर्ड की करीब 430 एकड़ भूमि है, जिस पर पर कुछ सिख परिवार लम्बे समय से काबिज हैं। आरोप था कि मई 2017 में यह जमीन तत्कालीन डीएम मासूम अली सरवर के फर्जी हस्ताक्षर कर तसलीम हसन खान ने खुद को वक्फ बोर्ड का प्रबंधक दर्शाकर अपने नाम पर दर्ज करा ली थी। डीएम मासूम अली सरवर के तबादले के बाद जब तत्कालीन डीएम शीतल वर्मा के संज्ञान में मामला आया तो उन्होंने इस मामले में सख्ती की। इसके बाद डीएम शीतल वर्मा ने मासूम अली सरवर से जब फोन पर बात कर पूछा तो उन्होंने ऐसे किसी भी दस्तावेज़ पर अपने हस्ताक्षर होने से इंकार कर दिया। इसके बाद डीएम शीतल वर्मा के निर्देश पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी देवेंद्र कुमार की तहरीर पर कोतवाली सदर में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मई 2017 में मुकदमा दर्ज कराया था।
जांच के दौरान अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के एक लिपिक का नाम भी बतौर आरोपी सामने आया था। लेकिन अब उसकी मृत्यु हो चुकी है। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने मुकदमे की विवेचना क्राइम ब्रांच को सौंपी थी, जिसमें एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी इस मामले को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं हो सका, न ही आरोपियों पर शिकंजा कसा जा सका। इसमें शामिल सफेद पोश आरोपी अभी खुले घूम रहे हैं।
पुलिस अधीक्षक बालेन्दु भूषण सिंह ने क्राइम ब्रांच को सख्ती से आदेश दिये हैं कि विवेचना जल्द पूरी की जाये। यह भी कहा है कि आईएएस मासूम अली सरवर के हस्ताक्षरों का नमूना लेकर एक्सपर्ट से मिलान कराया जाये। हस्ताक्षर का नमूना लेने के लिए क्राइम ब्रांच के एसआई मेराज अली को भेजा गया है। एक्सपर्ट की रिपोर्ट आने के बाद पुलिस दोषियों पर शिकंजा कसेगी या ये अभी भी ये महज एक दिखाबा होगा। भ्र्ष्टाचार मुक्त करने का वायदा लेकर आई योगी सरकार इस पर कितना गंभीर है आगे सामने आएगा।

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