झाँसी राष्ट्रभक्त संगठन एवं हिंदू जागरण मंच द्वारा चन्द्रशेखर आजाद की मूर्ति का किया गया माल्यार्पण

आज भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पुरोधा अमर सेनानी चंद्रशेखर आजाद की 115 वी जयंती है, आज विभिन्न संगठनों द्वारा चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किए गए इसी क्रम में राष्ट्रभक्त संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष एवं हिंदू जागरण मंच के जिलाध्यक्ष अंचल अड़जरिया के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं का एक दल सीता होटल के पास स्थित चंद्रशेखर आजाद की मूर्ति पर पहुंचा जहाँ उन्होंने विधिवत रूप से पूजा अर्चना कर माल्यार्पण किया। चंद्रशेखर आजाद के जीवन पर प्रकाश डालते हुए अंचल अर्जरिया ने कहा सन 1906 में आज के ही दिन चंद्र शेखर आजाद का जन्म मध्यप्रदेश के अलीराजपुर में हुआ था।

चंद्रशेखर आजाद हिंदुस्तान सोशिलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के संस्थापक थे देश में क्रांति लाने वाला यह पहला बड़ा संगठन था। चंद्रशेखर आजाद ने देश के लिए अपना सर्वस्व दान कर दिया अंग्रेजों में आजाद नाम की दहशत उनके जीवन पर्यंत बनी रही। काकोरी कांड और ऐसे कई क्रांतिकारी घटनाओं को चंद्र शेखर आजाद ने अंजाम दिया, 1928 में अंग्रेज अधिकारी साउंडर्स द्वारा लाला लाजपत राय की हत्या का बदला उन्होंने लिया। चंद्रशेखर आजाद ने झाँसी को अपना मुख्यालय बनाया था उन्होंने ओरछा के जंगलों में रहकर सारी गतिविधियों को अंजाम दिया उन्होंने सतार नदी के किनारे हनुमान मंदिर के पास अपनी कुटिया बनाई और वहीं अपना जीवन यापन करते थे उन्होंने झाँसी के सदर बाजार स्थित बुंदेलखंड मोटर गैरेज से कार चलाना भी सीखा। चंद्र शेखर आजाद ने कहा था कि मैं जीते जी अंग्रेजों के हाथ नहीं आऊंगा और यह उन्होंने करके भी दिखाया। 27 फरवरी 1931 में जब चंद्र शेखर आजाद इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में किसी से मिलने गए थे उसी समय अंग्रेजों द्वारा पार्क को घेर लिया गया चंद्र शेखर आजाद ने अंग्रेजों से मुठभेड़ की। जब उनके पास आखिरी गोली बची थी तो उन्होंने वह गोली स्वयं अपने ऊपर चला कर अपने प्राण त्याग दिए लेकिन अंग्रेजों के समक्ष घुटने नहीं टेके। हम सभी देशवासियों को ऐसे महान क्रांतिकारियों से सीखना चाहिए कि देश के लिए अपना सर्वस्व दान कर अपने प्राणों की आहुति देना और बिना किसी लोभ लालच के सात्विक जीवन जीते हुए देशहित की गतिविधियों को अंजाम देना कितना बड़ा संघर्ष है आज कई राजनीतिक पार्टियों द्वारा समय-समय पर सत्ता के लालच में देश की अस्मिता को बदनाम किया जाता है लेकिन हमें अमर शहीदों के बलिदान को याद रखते हुए भारत की स्वतंत्रता और संप्रभुता को बरकरार रखना चाहिए।

Leave a Reply