मेयर की सीटों के आरक्षण के मामले में राज्य सरकार को बडी राहत मिली
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संतोष सिंह। उत्तराखण्ड हाई कोर्ट ने नगर निगम मे मेयर की सीटों के आरक्षण के मामले में राज्य सरकार को  बडी राहत मिली है और कहा है कि चुनाव प्रक्रिया से पहले चुनोती दी जानी चाहिए थी। अभी चुनाव प्रक्रिया चल रही है इसलिए इसको चुनोती नहीं दी जा सकती है मामले को सुनने के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा व मनोज तिवारी की खण्डपीठ ने जनहित याचिका को खारीज कर दिया है। मामले के अनुसार हाईकोट के अधिवक्ता डीके त्यागी ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि सरकार ने 7 नगर निगमों में मेयर पद के लिए आरक्षण का निर्धारण गलत तरीके से किया है, सरकार ने रुड़की को छोड़कर देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार, रुद्रपुर, काशीपुर, हल्द्वानी, कोटद्वार नगर निगमों का चुनाव करा रही है,,, इन 7 निगमों में से मेयर के लिए 5 पदों को आरक्षित कर दिया गया, जबकि दो पद अनारक्षित हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है, याचिकाकर्ता का कहना है की सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर सरकार किसी भी पद के लिए 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दे सकती है,, मगर सरकार ने आरक्षण 70 फीसद कर दिया है, जो असंवैधानिक है, लिहाजा आरक्षण नए सिरे से तय किया जाए।

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