मजदूरों की रेल टिकट पर सियासत गर्म, लेकिन गरीबों की समस्या जस की तस

मनोज श्रीवास्तव/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों को वापस लाए जाने का सिलसिला और तेज हो गया है। गुजरात और पंजाब के तकरीबन 5 हजार मजदूरों को चार स्पेशल ट्रेनों के जरिये प्रयागराज लाया जा रहा है। इनमें से दो ट्रेनें आ चुकी हैं, जबकि दो ट्रेनें देर शाम आएंगी। हालांकि, बुधवार दोपहर को जो ट्रेन गुजरात के गांधी धाम से आईं उसमें सवार सभी 1200 मजदूरों से टिकट के पैसे लिए गए थे। मजदूरों के 620 रुपये का टिकट देने के बाद ही उन्हें ट्रेन में सवार होने की इजाजत दी गई थी। टिकट के पैसे लिए जाने की वजह से कई मुसाफिर खासे नाराज भी दिखाई दिए।

हालांकि, प्रयागराज पहुंचने पर जब इन मजदूरों ने टिकट दिखाकर मीडिया से शिकायत की तो रेलवे पुलिस ने इन्हे डांट फटकार कर आगे बढ़ा दिया। ट्रेनों से प्रयागराज पहुंचे मजदूरों को कुछ घंटे रेलवे स्टेशनों के आश्रय स्थलों पर रखा जा रहा है। यहां उन्हें कुछ घंटे रोककर मेडिकल चेकिंग की जा रही है। जिनका टेंप्रचेर नॉर्मल है और उनमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं है, उन्हें रोडवेज की बसों के जरिये उनके शहरों को भेजा जा रहा है। वहां फिर से मेडिकल टेस्ट के बाद उन्हें 14 दिनों के लिए होम क्वारंटीन किया जाएगा। मजदूरों की ट्रेन पहुंचने पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मजदूरों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए स्टेशन से बाहर निकाला गया। 

बुधवार को जो मजदूर गुजरात से प्रयागराज पहुंचे उनके चेहरों पर सुकून साफ तौर पर झलक रहा था। वह केंद्र और यूपी सरकार का शुक्रिया अदा कर रहे थे। हालांकि 620 रुपये का टिकट लिए जाने को लेकर कुछ मजदूरों में नाराजगी भी दिखी। मजदूरों से ट्रेन का किराया लिए जाने पर सियासत भले ही तेज हो गई हो लेकिन इससे उनकी मुश्किलें हल होने वाली नहीं हैं।

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