‘वाया फुरसतगंज’ राजनीतिक चरित्र के दोगलेपन की कथा है

प्रख्यात उपन्यासकार बालेन्दु द्विवेदी के नए उपन्यास ‘वाया फुरसतगंज’ का विमोचन और मंचन का कार्यक्रम 25 फरवरी को इलाहाबाद के सर्किट हाउस के निकट स्थित उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में किया गया। विमोचन कार्यक्रम के उपरांत इसी उपन्यास पर आधारित एक नाटक का मंचन भी किया गया। जिसका नाट्य रूपांतरण और निर्देशन ‘दि थर्ड बेल’ संस्था के प्रसिद्ध रंगकर्मी और निर्देशक आलोक नायर की टीम ने किया। यह मंचन वाणी प्रकाशन और ‘ दि थर्ड बेल ‘ संस्था की संयुक्त प्रस्तुति थी।

नाटक के निर्देशक आलोक नायर ने बताया कि इस नाटक का रिहर्सल लगभग एक महीने से विभिन्न स्थापित कलाकार कर रहे थे। वाया फुरसतगंज के मंचन ने दर्शकों का मन मोहा और इसे खूब वाह-वाही मिली। खासकर इसके चरित्रों जोखन सिंह, झारखंडे राय और छम्मो देवी के अभिनय और संवाद ने दर्शकों को न केवल गुदगुदाया बल्कि उनको भीतर से कुरेदा भी। इस नाटक के पात्रों में प्रमुख भूमिका सोनाली चक्रवर्ती, गौरव शर्मा, कौस्तुभ तिवारी, सत्यम तिवारी, शिवम यादव, मदन कुमार, दिलीप कुमार, ऋषि दुबे, मोहम्मद आसिफ, अमितेश श्रीवास्तव, ऋषि,आयुष और रविंद्र सिंह, राहुल जायसवाल ने निभाई। जबकि मंच के पीछे की तैयारियों में कोणार्क अरोड़ा, अश्विन पांडे, शिवम केसरवानी, दिलीप यादव आदि ने हाथ बंटाया। मेकअप संजय चौधरी, लाइट्स आकाश अग्रवाल, संगीत निर्देशन सौरभ और प्रोडक्शन कंट्रोल का काम मोहम्मद आसिफ का रहा। वहीं, असिस्टेंट डायरेक्टर शिवम यादव रहे।

उपन्यासकार बालेन्दु द्विवेदी ने बताया कि वाया फुरसतगंज नामक उनका यह उपन्यास इलाहाबाद की ही पृष्ठभुमि पर केंद्रित है और इसमें इलाहाबाद वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य के बहाने यहां की ठेठ बोली-बानी-संस्कृति को उकेरने की कोशिश की गई है।

इस कार्यक्रम के सूत्रधार और प्रख्यात कवि डाक्टर श्लेष गौतम ने बताया कि वाया फ़ुरसतगंज आज़ाद देश में विकसित हो रहे राजनीतिक चरित्र के दोगलेपन की कथा है।

इस उपन्यास को दिल्ली के प्रतिष्ठित हिंदी प्रकाशन, वाणी प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। पुस्तक का विमोचन इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और सिनेमा के प्रखर अध्येता और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि. डॉ. ललित जोशी ने किया। कार्यक्रम में वाणी प्रकाशन समूह की निदेशक अदिति माहेश्वरी गोयल सहित शहर की गणमान्य शख्सियत उपस्थित रहे।

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