चीन में इस्लाम धर्म को खतरा? बच्चे नहीं ले सकते इस्लाम की शिक्षा
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ज़ेबा ख़ान/जैसा की हम लोग जानते हैं कि चीन में अकसर धर्म को लेकर नए-नए फरमान सुनाए जाते हैं। आजकल चीनी सरकीर की सख्ती ज्यादतर चीनी मुस्लिम के ऊपर देखने को मिल रही है। दरअसल चीन आधिकारिक तौर पर एक नास्तिक देश है। लेकिन पिछले 40 सालों में चीन में धार्मिक गतिविधियां बढ़ी रही थी। वैसे तो चीन का संविधान हर व्यक्ति को किसी भी धर्म को मानने और उसका पालन करने की पूरी आजादी देता है। बावजूद इसके भी चीन में धर्म के रास्ते में कई पाबंदियां देखने को मिल जाती हैं। दूसरी तरफ अब चीन की सरकार अपने देश में इस्लाम को खत्म करना चाहती है। इसी तर्ज पर चीन ने अब मुस्लिम बच्चों को धर्म और इस्लामिक शिक्षा से दूर रहने की हिदायत दी गई है।

आपको बता दें चीन में मुस्लिम की बहुत संख्या है। चीन की कुल आबादी 1 अरब 38 करोड़ है, जिसमें से मुस्लिम सिर्फ 2 करोड़ 10 लाख है।इसके साथ ही चीन के शिंजियांग प्रांत में जो भी उईगर समुदाय के मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, उनके खिलाफ तो पहले से ही चीनी अथॉरिटी ने कई प्रतिबंध लगाए हुए है।और अब चीन की सरकार ने शिंजियांग प्रांत के बाद अब पश्चिमी चीन के ‘लिटिल मक्का’ (गांसू प्रांत) में भी नास्तिक सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी मुस्लिम बच्चों को धर्म और इस्लामिक शिक्षा से दूर रखना चाहती है। लिटिल मक्का में

छुट्टियों के दौरान  में हजारों बच्चे कुरान को समझने के लिए मस्जिद आते हैं, लेकिन चीन की सरकार ने इस पर अब प्रतिबंध लगा दिया है। दरअसल सरकार का ये कहना कि लिटिल मक्का में 16 साल से कम उम्र के बच्चों को नमाज़ के साथ-साथ इस्लामिक शिक्षा से दूर रखा जाए। इसके साथ ही बच्चों के लिए धर्मनिरपेक्ष सिलेबस बनाने का भी आदेश दिया। चीन के अधिकारियों के अनुसार इससे बच्चों को काफी फायदा मिलेगा।

चीन में अकसर मुस्लिमों को भी कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ता है। इससे पहले हिजाब पहनने,दाढ़ी बढ़ाने और रमज़ान को दौरान रोजे़ रखने तक की पाबंदी लगा थी।चीन की सरकार ने ध्वनि प्रदूषण का तर्क देते हुए सभी 355 मस्जिदों से लाउड स्पीकरों को हटाने के लिए पहले से ही आदेश दे चुकी है। इसके साथ ही मस्जिदों के ऊपर चीन का राष्ट्रीय झंडा लगाने का भी आदेश दिया गया है। वहां के एक इमाम के मुताबिक चीन में मुस्लिम के हालात बहुत डरावने है इन्हें अपले अस्तिव के खत्म होने का डर सता रहा है। मस्जिदों के अंदर पुलिसवाले घुसकर तलाशी लेते हैं। शिंजियांग के बाद सबसे ज्यादा मुस्लिम समुदाय के लोग पश्चिमी चीन के गांसू प्रांत में रहते हैं। जिससे चीनी अधिकारियों को काफी डर है जिसके चलते वो मुस्लिम समुदाय पर नकेल कसने की कोशिश में लगा हुआ है।

 

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