कैसे हुआ शारदा चिट फंड स्कैम, कौन कौन नेता थे शामिल जानिए पूरी कहानी
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बंगाल से दिल्ली तक संसद से सड़क तक शारदा चिटफंड घोटाले में हो रही सीबीआई जाँच को लेकर हंगामा हो रहा है। 2014 में शारदा चिटफंड घोटाले को लेकर खुलासा हुआ इस घोटाले में निवेशकों के हजारों करोंड रुपए डूब गए। 2014 से अब तक इस घोटाले में संलिप्त्ता को लेकर कई एफआई आर दर्ज की जा चुकी है लेकिन पोंजी स्टेट आॅफ इंडिया वेस्ट बंगाल की ममता सरकार ने निवेशकों के हित में हो रही जाँच में रोडा़ अटका दिया है। मामले की जाँच कर रही सीबीआई को ममता की पुलिस ने ही गिरफ्तार कर लिया और खुद ममता बनर्जी इस जाँच से अपने अधिकारी को बचाने के लिए धरने पर बैठ गईं और लोकतंत्र की हत्या की बात कहकर दुहाई दे रही हैं। आखिर ममता बनर्जी का शारदा चिटफंड़ घोटाले से क्या कनेक्शन है और क्यों ममता बनर्जी ने सीबीआई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आइए देखते हैं एक विस्तृत रिपोर्ट…

3 अप्रैल रविवार के दिन सीबीआई की एक टीम कलकत्ता पहुँचती है और कोलकाता के कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करना चाहती है लेकिन उल्टा कोलकाता पुलिस सीबीआई टीम को ही गिरफ्तार कर लेती है जिसके बाद हंगामा खडा हो जाता है आनन फानन में खुद सूबे की मुखिया ममता दीदी राजीव कुमार के साथ सीबीआई के केन्द्र सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते हुए धरने पर बैठ जाती हैं। अब सवाल ये उठता है कि सीबीआई आखिर राजीव कुमार से क्या चाहती है तो ये बात जानने से पहले आपको यह जानना जरुरी है की राजीव कुमार ही वो अफसर हैं जिनपर शारदा घोटाले की जाँच की जिम्मेदारी थी और ममता सरकार ने इनको ही जाँच कमेटी का हेड भी बनाया था। आपको बता दें कि राजीव कुमार 1989 बैच के आईपीएस अफसर हैं और इनको पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है उन पर बतौर जांच अधिकारी के धांधली के आरोप हैं।

एसआईटी के अध्यक्ष के तौर पर राजीव कुमार ने जम्मू-कश्मीर में शारदा प्रमुख सुदीप्त सेन और उनके सहयोगी देवयानी को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उन्होंने,उनके पास से मिली एक डायरी को गायब कर दिया था। इस डायरी में उन सभी नेताओं के नाम थे जिन्होंने चिटफंड कंपनी से रुपए लिए थे।

2014 में पुलिसिया जाँच पर सवाल उठने के बाद मामले को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सौंप दिया। सीबीआई को जाँच सौंपने के बाद अब तक कई लोगों के नाम सामने आ चुके हैं। इस घोटाले में शारदा ग्रुप के मुखिया सुदीप्तो सेन के अलावा सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं के नाम सामने आ चुके हैं जो शारदा ग्रुप से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से पैसे ले रहे थे यही नहीं टीएमसी के कई मंत्री और सांसद शारदा ग्रुप में कई पदों पर थे इसमें सबसे बड़ा नाम टीएमसी के सांसद कुणाल घोष का है जो शारदा ग्रुप द्वारा संचालित मीडिया आपरेशंस के हेड थे और इनकी देखरेख में ही टीवी चैनेल और 8 अखबार चलते थे । जिसके एवज में कुणाल घोष को कंपनी 17 लाख रुपए महीना देती थी। इनके साथ टीएमसी के एक और सांसद श्रृंजाय घोष को भी कंपनी ने मीडिया और फिल्म में निवेश की जिम्मेदारी सौंप रखी थी।

इसके अलावा गरीब निवेशकों की गाढ़ी कमाई को डकारने वाली कंपनी के साथ टीएमसी के परिवहन मंत्री मदन मित्रा का भी नाम शामिल है जो ममता के बेहद करीबी हैं और पब्लिकली लोगों को शारदा गुरुप की पोंजी स्कीम्स में पैसा लगाने को प्रेरित करते थे।यही नहीं टीएमसी सरकार के एक मंत्री श्यामपद मुख्रजी का तो शारदा ग्रुप की एक सीमेंट कंपनी में पार्टनर भी थे इस कंपनी का नाम था लैंडमार्क।

इस मामले में वेस्ट बंगाल के बाहर के लोगों का नाम भी सामने आया है जिसमें तत्कालीन असम कांग्रेस के नेता हेमंत विश्वाशर्मा और टेक्सटाइल मंत्री मंतंग सिंह का नाम प्रमुख है। बकौल सुदीप्तो सेन कंपनी ने मतंग सिंह की पत्नी को उसने 25 करोड़ रुपए तथा उसने पिता को 3 करोड रपए एक टीवी चैनेल के शेयर खरीदने के लिए दिए थे।

ग्रुप की मुशकिलें तब बढ़ गई जब कंपनी के खर्चे कंपनी में आने वाले पैसों से ज्यादा हो गए कारण था तत्कालीम आरबीआई गर्वरनर द्वारा बंगाल सरकार को ऐसे स्कीम्स चलाने वाली कंपनियों की सवतह संज्ञान लेकर जाँच करने के निरदेश दिए थे। जिसके बाद ममता सरकार ने एक एसआईटी का गठन किया और उसका हेड राजीव कुमार को बनाया गया जो कि वर्तमान में कोलकाला के कमिशनर हैं।

लेकिन जब 600 कलेक्शन एजेंट ने पुलिसिया जाँच पर सवाल उठाए तो यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया और 2014 से इस जांच को सीबीआई के हवाले किया गया। लेकिन इस वक्त तक बंगाल उडीसा और असम के कई निवेशकों के पैसे डूब चुके थे एक रिपोर्ट के मुताबिक बंगाल में कोई ऐसा घर नहीं बचा था जिसमें शारदा का पैसा ना डूबा हो। करीब 300 कलेक्शन ऐजेंटस ने आत्महत्या कर ली ऐर कई का मर्डर कर दिया गया।

कंपनी अपनी पोंजी स्कीमस्स के तहत डेढ़ साल में दुगुने और 25 साल में 34 गुना तक लाभ देने का वादा करके लोंगों के पैसे ले रही थी जिसको लौटाना अब मुश्किल हो गया है। अनुमान के मुताबिक 17 लाख लोगों के पैसै इसमें डूब चुके हैं। कंपनी निवेशकों में विशवास दिलाने के लिए कई सीएसआर फंड से कोलकाला पुलिस को मोटरसाईकिलें और एंबुलें भी दी थीं।

देश में चल रही कई पोंजी योजनाओं जैसे कि अनुभव टीक प्लांटेशन, एमवे, जापानलाइफ़, क्यूनेट और स्पीकसिया,की तरह सारदा ग्रुप ने अपने ब्रांड के निर्माण में भारी निवेश किया। शारदा ने हाई पब्लिसिटी वाले क्षेत्रों में निवेश किया, जैसे कि बंगाली फिल्म उद्योग, जहां इसने अभिनेत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सदस्य (सांसद) सताब्दी रॉय को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया। बॉलीवुड अभिनेता और TMC सांसद मिथुन चक्रवर्ती को सारदा ग्रुप के मीडिया प्लेटफॉर्म के ब्रांड एंबेसडर के रूप में लाया गया था। 30 अप्रैल 2013 को सीबीआई ने राज्य सरकार के अनुरोध पर असम में शारदा समूह घोटाले की जांच शुरू की।

2014 में, ईडी ने सुदीप्त सेन की फरार पत्नी, बेटे और बहू को गिरफ्तार किया, जो सभी शारदा समूह की विभिन्न कंपनियों के निदेशक थे। ईडी ने टीएमसी सांसदों अहमद हसन और अर्पिता घोष से सारदा समूह के साथ अपने वित्तीय लेनदेन के बारे में भी पूछताछ की। ईडी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने इसमें सहयोग नहीं किया है और इसकी जांच में बाधा डाली है।

मई 2014 में, सुप्रीम कोर्ट ने 44 पोंजी स्कीम्स चलाने वाली कंपनियों की सभी जांचों को सीबीआई स्थानांतरित कर दिया – जिसमें सारदा समूह भी शामिल था – पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, झारखंड और त्रिपुरा के राज्यों में पॉन्ज़ी योजनाओं को चलने का संदेह CBI को दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बंगाल एसआईटी ने सभी गिरफ्तार संदिग्धों सुदीप्तो सेन, देबजानी मुखर्जी और कुणाल घोष को सीबीआई को सौंप दिया। सीबीआई ने कई प्रमुख हस्तियों से पूछताछ की, जो सारदा समूह से जुड़े थे जिनमें टीएमसी उपाध्यक्ष और पश्चिम बंगाल में पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रजत मजूमदार, असम के गायक और फिल्म निर्माता सदानंद गोगोई और ओडिशा के पूर्व महाधिवक्ता अशोक मोहंती शामिल हैं। असम के पूर्व डीजीपी शंकर बैरवा, जो शारदा घोटाले में संदिग्ध थे और जिनके घर पर सीबीआई ने तलाशी ली थी, उन्होंने आत्महत्या कर ली थी। 21 नवंबर 2014 को CBI ने घोटाले के सिलसिले में एक और TMC सांसद श्री शोनजॉय बोस को गिरफ्तार किया।12 दिसंबर 2014 को, CBI ने पश्चिम बंगाल के परिवहन मंत्री मदन मित्रा को आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, हेराफेरी और शारदा समूह से अनुचित वित्तीय लाभ प्राप्त करने के आरोप में गिरफ्तार किया।

 

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