सेव शारदा कमेटी ने POK में शारदा पीठ को फिर से खोलने के निर्णय का स्वागत किया
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25 वीं। March’2019।सेव शारदा कमेटी कश्मीर (Regd।) ने हाल ही में पाक सरकार द्वारा शुरू हुए पहल की सराहना की है। शारदा तीर्थ यात्रा को फिर से शुरू करने पर समिति के प्रमुख और संस्थापक रविंदर पंडिता ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि पाकिस्तान सरकार के विदेशी मामलों के मंत्री और अल्पसंख्यक मंत्री ने फैसला लेने के बाद पीठ को फिर से खोलने पर सहमति व्यक्त की गई है,औपचारिक निर्णय को शीघ्र ही भारत सरकार को सूचित किया जाएगा। शारदा समिति को उम्मीद है कि उनका संघर्ष एक तार्किक अंत तक आ जाएगा और सभी शंकराचार्य अनुयायियों को लाभान्वित किया जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘हम पीएम से वार्षिक शारदा तीर्थ यात्रा के लिए अनुमोदन की अपील करते हैं।”समिति के प्रमुख और संस्थापक रविंदर पंडिता ने कहा कि हमारी मांग पिछले 70 वर्षों से लंबित है और हम पिछले 15 वर्षों से इस मुद्दे पर जोरदार तरीके से संघर्ष कर रहे हैं।  2007 से ही एक समझौते के तहत LoC के दोनों ओर के लोग LoC परमिट पर अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए यात्रा कर सकते हैं। दो मार्ग उरी- मुजफ्फराबाद और पुंछ-रावलकोट पर पहले से ही जम्मू-कश्मीर के निवासियों के लिए बस सेवा चल रही है। रविंदर पंडिता ने आज के फैसले का स्वागत करते हुए पीओके में शारदा पीठ के फिर से खोलने की आवश्यकता पर बल दिया- यह मुद्दा कश्मीर और भारत के लिए बहुत प्रिय है। समिति को पीओके से सिविल सोसाइटी के माध्यम से मंदिर की मिट्टी और पत्थर मिले हैं, देवी शारदा की एक तस्वीर मार्च’2017 में वहाँ लगाई गई है और इस साल जनवरी में पीओके की सर्वोच्च अदालत ने भी एक याचिका द्वारा पीठ के संरक्षण पर एक ऐतिहासिक निर्णय दिया है। सेव शारदा कमेटी को संख्या: 9973-80 दिनांक 31.12.2018 को एलओसी पार से मंदिर के संरक्षण के लिए डीजी आर्केलॉजी से आदेश की प्रति भी प्राप्त हुई है। शारदा पीठ – आदि शंकराचार्य का सर्वोच्च पीठ किशुनगंगा, मधुमती और सरस्वती नदी के तट पर स्थित है और यह मुज़फ़्फ़राबाद से लगभग 140 किलोमीटर दूर है। अंतिम यात्रा कलशमीरी संत स्वामी नंद लाल जी द्वारा की गई थी, जो वर्ष 1948 में शारदा गांव से कश्मीर के हमारे हिस्से में आई थी।

सेव शारदा कमेटी तीर्थयात्रा को फिर से खोलने के लिए प्रयास कर रहा है और साथ ही साथ शारदा-प्राचीनतम सभ्यता की खोज भी कर रहा है। पंडिता ने कहा कि इसने उपग्रह इमेजरी के लिए इसरो से संपर्क किया है ताकि सभ्यता की सीमा का पता चल सके और बहुत कुछ सैटेलाइट इमेजरी के जरिए हासिल किया जा सके। समिति ने पहले ही माननीय पीएम, एचएम और ईएएम को तीर्थयात्रा को फिर से खोलने के बारे में विशेष रूप से लिखा था।

 

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