पीलीभीत : अवैध रेत खनन ठेकेदारों पर 40 लाख का जुर्माना
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पीलीभीत उप्र 30 जून। यहां देवहा नदी पर रेत के खनन की जांच के बाद भारी मात्रा में अवैध रेत का खनन होना पाया गया है। रेत खनन के ठेकेदारों के ऊपर 39 लाख 82 हजार रुपए का जुर्माना भी डाला गया है। ठेकेदार मैसर्स डीएस कांट्रैक्टर्स एंड बिल्डर्स और सतजुग फूडस प्राइवेट लिमिटेड से एक सप्ताह में पैसा जमा करने का नोटिस जिलाधिकारी द्वारा भेजा गया है। अन्यथा की स्थिति में वसूली ठेकेदारों से भू राजस्व की भांति की जाएगी। अवैध खनन के बाद भी ठेकेदारों की नियत साफ  नहीं लग रही है। अब भंडारण में भी बड़ा खेल चल रहा है। ठेकेदारों द्वारा किए गए रेत के भंडारण की खनन विभाग ने ना तो नाप की है और ना ही यह जांच की है, कि भंडारण किया गया माल अब तक कितना बिक पाया है।
अवैध खनन का मामला जून माह में काफी चर्चा में रहा था। शहर विधायक के अलावा अन्य लोगों ने भी खनन निदेशक और मुख्यमंत्री से अवैध खनन की शिकायत की थी। काफी बवाल के बाद जिला अधिकारी ने खनन का काम रोक दिया था और मानक पूरा करने के निर्देश दिए थे। उसके बाद मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में पहुंच गया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर निदेशक खनन डॉ. रौशन जैकब और उनकी टीम यहां जांच के लिए पहुंची थी। मौके पर नदी के किनारे बड़े-बड़े गड्ढे पाए गए थे। गहरे गहरे गड्ढों की लखनऊ से आई टीम ने नाप की थी।
 उसके बाद भूतत्व एवं खनिकर्म अनुभाग निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय लखनऊ की जांच आख्या के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में मैसर्स डीएस कांट्रेक्टर्स एंड बिल्डर्स के प्रोपराइटर अच्छेजा घाट जिला बुलंदशहर निवासी दुष्यंत कुमार और सतजुग फूडस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्वीकृत अलग-अलग क्षेत्रों में 1150 घनमीटर, 750 घनमीटर, 125 घनमीटर का अवैध खनन पाया गया। जिलाधिकारी ने अवैध खनन पर देय क्षतिपूर्ति के नोटिस में विड रेट की धनराशि से पांच गुना धनराशि को वसूल किए जाने के निर्देश दिए हैं।
इसके अतिरिक्त ठेकेदारों द्वारा रेट डिस्प्ले बोर्ड सीसीटीवी कैमरा खनन संक्रिया प्रारंभ होने की तिथि से ही स्थापित नहीं पाए जाने को दोषी पाते हुए उन पर खान एवं खनिज विनियमन एवं विकास अधिनियम 1957 उत्तर प्रदेश उपखनिज परिहार नियमावली 1963 के सुसंगत प्रावधानों के अंतर्गत कार्यवाही किए जाने के निर्देश दिए हैं। ठेकेदारों को निर्देशित किया गया है की स्वीकृत क्षेत्र से बाहर किया गया खनन 1150 घनमीटर स्वीकृत विद रेट 483 रेट से क्षति पूर्ति का 5 गुना धनराशि 2777250 रुपए, शास्ति 25000 रुपए, कुल अधिरोपित धनराशि 2802250 रुपए, सतजुग फूडस प्राइवेट लिमिटेड पर कुल जुर्माना 1180625 रूपये  एक सप्ताह में जमा किया जाने का नोटिस दिया है।
नोटिस में लिखा है कि अन्यथा की दशा में इसकी वसूली ठेकेदार से भू राजस्व की भांति की जाएगी। जिलाधिकारी की ओर नोटिस की प्रतिलिपि निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय लखनऊ और संबंधित अधिकारियों को भेजी गई है।
इधर देवहा नदी के किनारे भारी मात्रा में अवैध खनन होने से बाढ़ के बाद धारा का रुख बदल गया। काफी संख्या में किसानों की गन्ने की फसल नदी में समा गई। गन्ना किसानों ने बताया कि इस संबंध में वह मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मुआवजे की मांग करेंगे
खनन निदेशक की जांच में अवैध खनन पाए जाने और ठेकेदारों पर 39 लाख 82 हजार रुपए का जुर्माना पढऩे के बाद खनन और राजस्व विभाग में खलबली मच गई है क्योंकि जितना भी खनन हो रहा था वह राजस्व और खनन के अधिकारियों की देखरेख में किया जा रहा था। अब जब अवैध खनन पाया गया है तो कई के ऊपर इसकी गाज गिर सकती है। सूत्रों ने बताया कि ठेकेदार केन्द्रीय मंत्री के एक प्रतिनिधि का भांजा है इस वजह से अनदेखी की गई थी, इसके अलावा दूसरे ठेकेदारी मेंं एक विधायक के बेटे का भी संरक्षण प्राप्त है। विभाग की मिली भगत से अंधाधुंध खनन किया गया, रेत के भंडारण में भी प्रयोग की गई सरकारी रसीद, खनन के समय रेत बेचने वाली रसीदों की फोटो स्टेट करके दर्शाई गई है।
सूत्रों ने बताया की नोटिस के बाद मामले को दबाने का और धनराशि को कम कराने का प्रयास किया जा रहा है। जिससे फिर एक बार राजस्व का चूना लगाया जा सके।
रेत भण्डारण में भी हुआ है बड़ा 
रेत को पहुंचाने वाले एक ट्राली चालक ने बताया कि जून माह में वह खनन क्षेत्र से रेत खरीदकर पीलीभीत शहर में डाल रहा था। लेकिन खनन क्षेत्र से जो उसको रसीद मिलती थी, उस पर पीलीभीत डंपिंग लिखा जा रहा था। ट्रॉली चालक ने बताया कि वह कम पढ़ा लिखा है।
 अंग्रेजी ठीक से नहीं पढ़ पाता है, इसलिए उसे उस वक्त यह जानकारी नहीं हुई लेकिन जब रसीद को अन्य लोगों को दिखाया तो उन्होंने रसीद पर रेत पहुंचने का स्थान पीलीभीत डंपिंग दर्शाया हुआ लिखा बताया। इस बात से ही यह पता चलता है कि ठेकेदारों ने खनन क्षेत्र से जो भंडारण के लिए माल निकाला है, उसकी अलग से रसीद नहीं काटी बल्कि लोगों को बेचे गए माल की रसीद को भंडारण की अनुमति लेने में प्रयोग किया है। अगर इसकी जांच हो तो खनन में एक और भारी घोटाला और राजस्व को बड़ा चूना लगाने का मामला सामने आएगा।
शहर विधायक संजय गंगवार का कहना है कि राजस्व और खनन विभाग की देखरेख के बावजूद जो अवैध खनन हुआ है उसकी जांच कराई जाएगी और संबंधित अफसरों के खिलाफ  भी कार्रवाई कराई जाएगी। इस की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की जाएगी।

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