दबंगों से परेशान फौजी ने गोंडा पुलिस से मदद ना मिलने पर फेसबुक पर माँगी मदद

गोंडा।जहां एक फौजी परिवार को न्याय के लिए दर – दर भटकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है …. फौजी के घर जाने वाले रास्ते पर दबंगों ने दीवार खड़ी कर दी है जिस कारण घर जाने का रास्ता नहीं बचा और जब फौजी के पिता ने अधिकारियों से शिकायत करने का प्रयास किया तो दबंगों ने पीड़ित पर फायरिंग कर दी। भारतीय सेना में तैनात सैनिक सुधीर सिंह को जब कहीं से नहीं मिलता नहीं नजर आया तो इन्होंने खुद ही एक वीडियो जारी करते हुए अपील की है कि उन्हें किसी तरह दबंगों से बचाया जाए और न्याय दिलाया जाए। एक सैनिक के परिवार को दबंगों द्वारा प्रताड़ित किया गया और किस तरह से उच्चाधिकारियों के आदेशों को स्थानीय पुलिस ने दरकिनार कर दिया साथ ही राजस्व टीम की फर्जी रिपोर्ट लगाकर निस्तारण की रिपोर्ट भेज दी। विवाद सैनिक के रास्ते को लेकर था लेकिन पुलिस ने गांव का एक अलग विवादित मामले की रिपोर्ट लगा थी जो एक मुस्लिम शख्स द्वारा रास्ते को लेकर था।

सैनिक सुधीर सिंह का परिवार है उनके पिता यशवंत सिंह भी भारतीय सेना में जवान रह चुके हैं अब रिटायर होकर घर पर है। उनके घर के सामने के रास्ते पर एक दीवार बना दी गई जो आम रास्ते पर बनी हुई और इस दीवार को लेकर पूर्व सैनिक यशवंत सिंह ने अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया जिसके बाद मौके पर पहुंची राजस्व टीम ने इसे अवैध करार दिया और तुरंत इसे हटाने के आदेश जारी कर दिए। जिसके बाद दबंगों ने यशवंत सिंह और उनके परिवार के साथ मारपीट की। इसकी शिकायत पीड़ित ने थाने पर की तो ना रिपोर्ट लिखी गई और ना ही पुलिस ने उस दीवार को हटाने में कोई दिलचस्पी दिखाई। पीड़ित पूर्व सैनिक यशवंत सिंह द्वारा स्थानीय उमरी बेगमगंज पुलिस के ऊपर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

सेना के जवान के विवाद को पुलिस ने दूसरे मामले के साथ जोड़कर रिपोर्ट लगा दी… फ़र्ज़ी रिपोर्ट लगाने के स्थानीय पुलिस द्वारा किए गए इस कृत्य से आज न केवल सैनिक परिवार अधिकारियों के दरवाजों पर न्याय के लिए भटक रहा है बल्कि उसे कहीं से न्याय भी नहीं मिल पा रहा है। अब अपर पुलिस अधीक्षक ने कहा है की प्रकरणों को देख जल्द ही कार्यवाही की जाएगी। जो हमारे देश की रक्षा सीमा पर कर रहा है उसका परिवार देश के अंदर सुरक्षित नहीं है और न्याय के लिए उसे अगर अधिकारियों के दर पर भटकना पड़े तो उससे ज्यादा शर्म की बात और कोई नहीं हो सकती है …. इन सबके बाद भी अधिकारियों के आदेश को दबाकर बैठ जाने वाले और उस पर फर्जी रिपोर्टिंग करने वाली स्थानीय पुलिस हो तो फिर न्याय कैसे मिलेगा। जब एक सैनिक परिवार के साथ यह स्थिति है तो आम लोगों के साथ क्या होता होगा …. अब देखने वाली बात यह होगी कि यह पूरा प्रकरण सामने आने के बाद अधिकारी और सरकार क्या कार्यवाही करती है।

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