बाढ़ में डूबे घर,भीख माँग कर बच्चों का पेट भर रहे लोग,अधिकारी बोले गॉड गिफ्ट है ये
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उत्तर प्रदेश के सीतापुर के लहरपुर तहसील में 3 हज़ार की आबादी वाले लोखारियापुर, कटरा नयी आबादी जैसे इलाकों के लोगों पर बारिश का पानी कहर बन कर टूट पड़ा है। वीडियो में साफ़ दिखाई दे रहा है की घरों के अन्दर से लेकर बाहर तक करीब 3 से 4 फिट तक गंदे बदबूदार पानी के सिवा कुछ नहीं है. नमामि भारत की टीम ने आबादी में रह रहे लोगो से पानी में उतर कर मुलाक़ात की तो और भी चौकाने वाली बात सामने आई, जो बेहद ही दर्द भरा हुआ था. लोगों ने बताया की वो 15 दिन से भूखे है। सुबह खाते है शाम तक भूखे रहते है. एक ही तखत पर सारा – सारा दिन मासूम बच्चों को लकर रहना पड़ता है। बच्चों को कुछ हो न जाए तो कही छोड़ कर भी नहीं जा सकते। बरसात के पानी ने काम काज सब थप कर दिया है. भीख मांग – मांग कर खाते है। लेकिन कोई कितना दे। किसी तरह बच्चो का पेट भर कर खुद भूखा रहना पड़ रहा है।

ये तो बानगी भर था। जितना आबादी के अन्दर गए नज़ारे उतने ही चौकाने वाले थे। लोगों के मुताबिक़ घरों की छत पर देखा गया तो वहां भी करीब 2 फिट तक पानी था। छत पर बने कमरे भी पानी से भरे हुए थे। सोना उठाना बैठा सब खत्म हो गया था। हालत तो ऐसी थी की लोग घर छोड़ कर चले गए थे। वजह थी की पड़ोस में बने तालाब बरसात के पानी से भर गए थे. नालियों का पानी चोक कर गया था. लोगों का कहना है की पिछले 9 साल से ये हालत है. कोई सुनने वाला नहीं.

लोखारियापुर, कटरा नयी आबादी के लोग पूरी तरह बेबस है. लोगों का कहना है की कोई सुनने वाला नहीं. स्थानीय नगपलिका चेयरमैन जासमीर अंसारी, विधायक, डीएम, पुलिस के लोग कोई नहीं सब अपने अपने कामो में मस्त है. सारा घर का सामान बर्बाद हो गया है. जो थोडा बहुत बचा है कोई चोरी न कर ले इसके लिए देखने आते है. पूरी तरह घर से बेघर हो चुके है.

कटरा नयी आबादी के रहने वाले शरीफ दोनों पैरों से विकलांग है. वो चल नहीं पाते. उनके घर में हर तरफ 3 से 4 फिट पानी है. घर में कुछ पाक भी नहीं सकता. वो पिछले 15 दिनों से एक तखत पर ही बैठे है. उनके साथ दो मासूम बच्चे भी रहते है. घर में पत्नी है वो भीख मांग कर लाती है तो खाते है. बच्चो के लिए पीने का पानी तक नहीं है. शरीफ की पूरी तरह से कुदरत का कहर टूटा है. उस पर जो उम्मीद थी की स्थानीय प्रशासन मदद करेगा वो भी नहीं.

लोखारियापुर, कटरा नयी आबादी के रहने वालों का अब सब्र का बाँध टूट गया, सड़क पर बच्चों के साथ आ गये. काफी देर तक अपनी मांगों को लेकर आवाज़ बुलंद की लेकिन बावजूद कोई पूछने तक नहीं आया. बेबस सभी वापस लौट गए क्योंकी घर में जो बचा हुआ सामान था, उसकी भी सुरक्षा जो करनी थी. सभी बहद दुखी है. अब उनको इस बात का यकीन हो गया है की उनको इसी बरसात के और नाले के बदबू दार पानी में ही जीना है. उनकी कोई मदद नहीं करेगा. न स्थानीय विधायक न चेयरमैन न ही स्थानीय प्रशासन.

जब इस मामले में एसडीएम पूर्णिमा सिंह से पुछा गया तो उन्होंने इस पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया और वहा से चली गयी.  जिसके बाद नगरपालिका के अधिशाषी अधिकारी से सम्पर्क किया गया तो तो उनका कहना था की लहारपुर के दो इलाकों में पानी भरा हुआ है. निकालने का प्रयास किया जा रहा है. लोग भीख मांग कर खाना खा रहे है ये मेरी जानकारी में नहीं है देखूंगा. बरसात कला पानी भर जाता है इसमें किसी की गलती नहीं है ये तो गॉड गिफ्ट है. हर जगह पानी है.

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