समाजवादी चिंतक दीपक मिश्र को मंडेला अवार्ड, अफ्रीका में होंगे सम्मानित
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समाजवादी चिन्तक, इण्टरनेशनल सोशलिस्ट काउन्सिल के सचिव, बौद्धिक व चिन्तन सभा के अध्यक्ष दीपक मिश्र मंडेला अवार्ड और विश्व हिन्दी सम्मेलन में भाग लेने के लिए अफ्रीका महाद्वीप जायेंगे। तय कार्यक्रमों के अनुसार मिश्र 13 अगस्त, 2018 को लखनऊ से रवाना होंगे व 22 दिन की प्रवासीय यात्रा के उपरांत  4 सितम्बर, 2018 को वापस लौटेंगे। इस दौरान मेडागास्कर, ट्यूनीशिया, तंजानिया, मारीशस, सेशेल्स के अलावा जंजीबार व रोड्रिग्स द्वीप भी जायेंगे।

दीपक मिश्र को 29अगस्त, 2019 को उपनिवेशवाद विरोधी अभियान के लिए मेडागास्कर की राजधानी अंतानानारिवो स्थित अंतानिनारेनिना के फिलेबर्ट सिरीनाना वालान जावाबोएरी में “मंडेला एवार्ड“ से प्रख्यात गांधी व मंडेलावादी फिलिप्पे एडविन मारिए सम्मानित करेंगे।

उल्लेखनीय है कि दीपक पिछले दो दशक से संयुक्त राष्ट्र संघ की विभेदकारी उपनिवेशवादी नीति का विरोध करते हुए हिन्दी को आधिकारिक भाषा का दर्जा, भारत को सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता दिलाने व वीटो हटाने के लिए अभियान चला रहे हैं। वे मेडागास्कर में सत्याग्रह भी कर चुके हैं। उन्हें मंडेला अवार्ड देने की घोषणा ज्यूरी ने पहले ही कर दिया है। जानकारों का मानना है कि यूएनओ द्वारा सोशल मीडिया पर हिन्दी-सेवा प्रारम्भ करने की पीछे दीपक के लगातार संघर्ष की महत्वपूर्ण भूमिका है।

दीपक मिश्र 18 अगस्त से पोर्ट लुई (मारीशस) में आयोजित तीन दिवसीय 11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन में भी भाग लेंगे व हिन्दी का वैश्विक-मान बढ़ाने के लिए जनमत बनायेंगे। मारीशस के हिन्दी लेखक संघ व हिन्दी स्पीकिंग यूनियन के पदाधिकारियों से भी वे संवाद करेंगे और मारीशस में यूएनओ दूतावास जाकर ज्ञापन भी सौपेंगे।  मिश्र  सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया में स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में 15 अगस्त को स्थानीय भारतीय मूल के लोगों द्वारा आयोजित समारोह में सम्मिलित होकर तिरंगा फहरायेंगे व “वैश्विक फलक में भारत“ विषय पर व्याख्यान देंगे। इसके अलावा रोड्रिग्स में सोशलिस्ट काउन्सिल के तत्वाधान में आयोजित परिचर्चा को 25 अगस्त को संबोधित करेंगे। वे 26 व 27 अगस्त को तंजानिया एवं जंजीबार के समाजवादियों, हिन्दी भाषियों एवं भारतीयों से संवाद व संपर्क करेंगे।

दीपक ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र संघ अंततोगत्वा हमारी सभी मांगें मानेगा। भोपाल में आयोजित गत विश्व हिन्दी सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र संघ की हिन्दी को आधिकारिक भाषा बनवाने की घोषणा की थी किन्तु पिछले तीन वर्षों में दोनों नेताओं ने कोई सार्थक प्रयास नहीं किया। महात्मा गांधी व राममनोहर लोहिया ने विभेदकारी नीतियों के विरुद्ध वैश्विक अभियानों का सूत्रपात किया था जिसके तहत गांधी ने दक्षिण अफ्रीका व लोहिया ने अमरीका में सत्याग्रह कर गिरफ्तारी दी थी। उनके स्वप्न अभी भी अधूरे हैं। उनके अभियानों को आगे बढ़ाने का दायित्व हमारा है और हम प्रण-प्राण से अपने दायित्व को निभायेंगे। भारत व हिन्दी का मान बढ़ाने का अभियान इस यात्रा से और अधिक सशक्त होगा।

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