; उपयोगी कचरे में छिपी ऊर्जा से बनेगी जीरो कार्बन इकोनॉमी
उपयोगी कचरे में छिपी ऊर्जा से बनेगी जीरो कार्बन इकोनॉमी


शहरी लैंडफिल्स न सिर्फ देखने में बदसूरत होते हैं, बल्कि वे हमारी नाक और गले में जलन का कारण बनने के साथ ही हमें असहज भी महसूस करा सकते हैं। साथ ही, वे पर्यावरण के लिए भी बेहद हानिकारक होते हैं।
इसरो के आंकड़ों के अनुसार, देश के बड़े 10 लैंडफिल हर घंटे 220 टन मीथेन का एमिशन करते हैं। हम सभी जानते हैं मीथेन एक ताकतवर ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) और कार्बन डाइऑक्साइड (सीओटू) के बाद मीथेन दूसरा सबसे आम मानव-प्रभावित ग्रीनहाउस गैस है जिसका ग्लोबल एमिशन लगभग 16% है। यह काफी चिंताजनक है क्योंकि यह वातावरण में गर्मी को रोकने में सीओटू की तुलना में 28 गुना ज्यादा प्रभावी है।
<स्रोत: अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी>
कुल 60% ग्लोबल एमिशन के लिए मानवजनित एमिशन जिम्मेदार है और इसका पूरी तरह से सफाया भी संभव नहीं है क्योंकि पशुओं और कृषि से हुआ एमिशन इसमें आधा योगदान दे रहा है। हालाँकि मीथन गैस को कैप्चर कर के अगर इसका इस्तेमाल किया जाए तो एमिशन को कम किया जा सकता है। ऐसा करने से इसका पर्यावरण को फायदा मिलेगा साथ ही आर्थिक लाभ भी मिल सकते हैं।
भारत में, मानवजनित एमिशन का पाँचवाँ हिस्सा लैंडफिल से आता है और यह कुछ ऐसा है, जिसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप और कारगर नीतियों को लागू करने से कम किया जा सकता है।
कंप्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी)
सीबीजी एक प्रकार की गैस है जो कृषि और शहरी कचरे से बनी होती है। हम इस गैस का उपयोग रसोई या इंडस्ट्रियल बॉयलर्स और यहाँ तक कि कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) से चलने वाले इलेक्ट्रिक व्हीकल के ईंधन के लिए करते हैं। यह मूल रूप से जीवाश्मों से निकलने वाली सामान्य गैस के बजाए पौधों और कचरे को नष्ट करने से बनी प्राकृतिक गैस है।
सीबीजी का उत्पादन करने के लिए ऑर्गेनिक वेस्ट का इस्तेमाल एनर्जी सॉल्यूशन के लिए किया जाता है। यह वेस्ट डिस्पोजल जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद करता है और एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस को ईंधन में बदल देता है। सीबीजी का उपयोग करके हम अपने देश के एनर्जी सिक्योरिटी टारगेट को पूरा कर सकते हैं और यहाँ तक कि बाई प्रोडक्ट के तौर पर ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर भी बना सकते हैं। यह इम्पोर्ट पर हमारी निर्भरता को कम करेगा जिससे दूसरे क्षेत्रों के लिए ज्यादा प्राकृतिक गैस उपलब्ध होगी।
घरों, व्यवसायों और संस्थानों से निकलने वाले कचरे से निपटना एक बड़ी समस्या है। हम सामान्य तरीकों से कचरे से छुटकारा पाते हैं जैसे, इसे लैंडफिल में डंप करते है या जला देते है। हम ऑर्गेनिक वेस्ट से मिलने वाली इस एनर्जी का इस्तेमाल नही कर पाते हैं और ये हवा, पानी और मिट्टी में प्रदूषण का कारण बनते हैं।
ऐसे में सीबीजी एक अच्छा विकल्प बनकर उभरता है जो साफ और सस्टेनेबल एनर्जी देता है साथ ही ये रिन्यूएबल है और वातावरण में कार्बन भी नहीं छोड़ता है। सबसे अच्छी बात है कि इसे अलग-अलग कार्बनिक पदार्थों से बनाया जा सकता है। सीबीजी बनाने का मतलब है कि हम जीवाश्म ईंधन पर कम निर्भर होंगे और इससे वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी साथ ही, ऑर्गेनिक वेस्ट को लैंडफिल में डंप करने या जलाने के बजाए सीबीजी के लिए इस्तेमाल कर सकते है, जिससे मीथेन एमिशन में कटौती होगी और ये पर्यावरण में सुधार होगा।
आजकल, एडवांस एनारोबिक डाइजेस्टिव सिस्टम आधुनिक डाइजेस्टर्स, गैस प्यूरीफिकेशन यूनिट कम्प्रेशन प्लांट के साथ आती हैं जो ऑर्गेनिक वेस्ट को हाई क्वालिटी वाले सीबीजी में बदलने की प्रक्रिया को और ज्यादा आसान बनाती हैं। पिछले कुछ सालों में, कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) की उत्पादन के तरीकों में सुधार ने इसे बड़े पैमाने पर आसान बना दिया है।
नीति और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क
सीबीजी वर्तमान और भविष्य में सरकार के कई लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकता है। यह प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद करता है। कचरे को मूल्यवान संसाधनों में बदल देता है और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की तरफ बढ़ने की प्रेरणा देता है। इससे एनर्जी सिक्योरिटी बेहतर होगी और हम नेट जीरो एमिशन के लक्ष्य के हासिल कर सकते हैं।
सरकार का लक्ष्य साल 2026 तक 15 हजार टीपीडी सीबीजी प्लांट लगाने का है। कई राज्य पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को झेल रहे है और सरकार कृषि वेस्ट मैनेजमेंट करने के लिए कई कंपनियों से संपर्क कर रही है और उन्हें सीबीजी प्लांट लगाने के लिए आमंत्रित कर रही हैं।
साथ ही, स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वह नगर निगम द्धारा एकत्रित किए गए कचरे को सीबीजी में बदलने के लिए सक्रिय रूप से काम करे और इसके सुरक्षित और प्रभावी निपटान को सुनिश्चित करने के लिए ठोस नीति बनाए। सीबीजी को अपनाने में तेजी लाने के लिए पॉलिसी सपोर्ट और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क महत्वपूर्ण हैं। दुनिया भर की सरकारें सीबीजी जैसे रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स को बढ़ावा देने और सीबीजी इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने के लिए आगे आ रही है। सब्सिडी, टैक्स इंसेंटिव, फीड-इन टैरिफ और रिन्यूएबल एनर्जी स्टेकहोल्डर को सीबीजी प्रोजेक्ट में निवेश के लिए प्रोत्साहित भी किया जा रहा है। एमएसडब्ल्यू-आधारित सीबीजी प्लांट में स्थिर फीडस्टॉक है लेकिन एग्रो वेस्ट प्लांटस् को मौसमी उपलब्धता का सामना करना पड़ता है, इसमें लगातार आपूर्ति के लिए पॉलिसी सपोर्ट की जरुरत होती है। सीबीजी उत्पादन के दौरान फरमेन्टेड ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर (एफओएम) के उपयोग के लिए भी सरकारी मदद की आवश्यकता है।
पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप और कम्यूनिटी बेस्ड बायो गैस प्लांट जैसे न्यू बिज़नेस मॉडल्स, सीबीजी टेक्नोलॉजी को अपनाने और बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं।
जैसे-जैसे दुनिया जीरो कार्बन इकोनॉमी की ओर बढ़ रही है सीबीजी एनर्जी मिक्स में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने के लिए तैयार है। सरकार, इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर और समुदायों की कोशिश से, हम अपने ही कचरे में छिपी ऊर्जा का उपयोग कर सकते हैं।

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यज्ञ विजय चतुर्वेदी ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी करने के बाद नोएडा में वर्ष 2008 में आजाद न्यूज़ चैनल के साथ बतौर इंटर्न अपने कैरियर की शुरुआत की। इंटर्न करने के बाद आज़ाद न्यूज में इन्हें पहली नौकरी मिली। यहां पर इनके कैरियर की शुरआत पहले इंटरटेनमेंट डेस्क से हुई उसके बाद स्पोर्ट्स डेस्क देखने लगे। आज़ाद न्यूज़ के बाद, tv100, साधना न्यूज़ मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़, कोबरापोस्ट, हरियाणा न्यूज़, NNIS न्यूज़ एजेंसी के साथ काम किया। इसके अलावा कई एजेंसियों के साथ सर्वे और रिसर्च का भी कार्य भी किया। 2016 में निजी कारणों से अपने होम डिस्ट्रिक्ट लौट आए और पत्रकारिता से एक वर्ष तक विराम लिया। उसके बाद अपने जिले से न्यूज़ वन इंडिया, सूर्या समाचार के लिए रिपोर्टिंग की। इस समय यज्ञ चतुर्वेदी अपने होम डिस्ट्रिक्ट में नेशलन स्तर कई बड़े मीडिया संस्थानों व वेबसाइटों के साथ फ्रीलांस जर्नलिस्ट के तौर जुड़कर काम कर रहे है।
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