ऐलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के कैम्पस में गन्दगी का लगा अम्बार ,स्वास्थ्य विभाग लापरवाह
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नैमिष शुक्ल। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद में संक्रामक रोग से मौत का सिलसिला जहाँ थमने का नाम नही ले रहा वहीँ पर ऐलिया के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का नजारा बेहद चौकाने वाला दिखा गंदगी का आलम यह है कि जैसे पिछले कई दिनों से सफाई पर ध्यान न दिया गया हो ।
सूत्रो के मुताबिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ऐलिया का कैम्पस पूरी तरह गंदगी से भरा पड़ा है जगह जगह पान पुड़िया से कैम्पस रगा हुआ है देखने ऐसा प्रतीत होता है रंग रोगन की आवश्यक्ता ही समाप्त हो गयी है जबकि स्वास्थ्य विभाग में लाखों रुपया साफ सफाई तथा मैन्टीनेन्स के लिए हर वर्ष अधीक्षक के बैंक खातों में भेजा जाता है जो अपने स्वयम् के विवेक के आधार पर स्वास्थ्य केंद्र में आवश्यक कार्यो में खर्च कर सकते है तो क्यों नही कैम्पस की अभी तक साफ सफाई करायी गयी कहाँ पर खर्च हो गया वह स्वास्थ्य विभाग का धन जो धरातल पर दिखना चाहिये या नही।
जब शिद्धार्थ कुमार अधीक्षक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ऐलिया से गंदगी के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने केवल एक सफाई कर्मचारी होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया क्या वहीँ स्वास्थ्य विभाग है जो साफ सफाई के लिये ढेरो योजनाये बनाकर मच्छर जनित लार्वा को खत्म करने के लिए दवाओ का छिड़काव ब्लीचिंग पाउडर आदि के द्वारा उस पर प्रतिबन्ध लगाने का भरपूर प्रयास किया करता है लेकिन अपने गन्दगी से भर पड़ा कैम्पस को कब  लार्वा जनित मच्छरों से मुक्ति पायेगे यह भविष्य में स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियो पर निर्भर करता है जो यक्ष प्रश्न बनकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के सामने खड़ा है क्या कर पायेगे उन जम्मेदारो पर ——–?
प्रश्न यह उठता है कि जब अधीक्षक अपने कैम्पस को साफ सुथरा नही रख सकते तो स्वास्थ्य केंद्र के क्षेत्र प्राथमिक तथा अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रो के परिसरों को कैसे सम्भाल पायेगे जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का क्षेत्र विस्तृत होता है जबकि संक्रामक रोग की असली वजह साफ सफाई ही है गन्दगी से मच्छर जनित लार्वा ही रोग की जड़ है जो पूर्णतयः कैम्पस में विद्यमान है । यहाँ रोगी अपना इलाज करने आते है या बीमार होने उनके तीमारदार जो स्वस्थ होंगे वह भी कैम्पस में रहकर बीमार हो जायेगे रोगी यह नही जॉन पायेगा कि मुझे किन किन बीमारियो ने जकड़ रखा है जबकि स्वास्थ्य विभाग के पास दवाओ का टोटा लगा रहता है ।
स्वच्छता के नाम पर चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार करोड़ो रुपया पानी की तरह बहा रहे है वही स्वास्थ्य विभाग उस कार्य को ठेंगा दिखाने से बज नही आ रहा है क्यों लगता यह है कि “चिराग तले अंधेरा ” वाली कहावत स्वास्थ्य विभाग ऐलिया पर सटीक बैठ रही क्योकि मरीजो को साफ सफाई का पाठ पढ़ाने से नही थकने वाले स्वास्थ्य विभाग डॉक्टर अब स्वयम् कब अपने लिये साफ सफाई का पाठ पढ़ेंगे या कब सुधरेगे ।

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