उद्धव सरकार पर अपनों ने ही साधा निशाना संजय निरुपम ने दी चेतावनी

आज मुंबई की राजनीति दिनभर गर्म रही कंगना राणावत हिमाचल से चलकर मुंबई पहुंची 3:15 बजे एयरपोर्ट पर उतरते उतरने से पहले ही उनके समर्थन और विरोध में एयरपोर्ट के बाहर हजारों लोग एकत्रित हो गए। शिवसेना के लोग जहां पर काले झंडे लेकर कंगना गो बैक और पाकिस्तान जाओ के नारे लगा रहे थे वहीं करणी सेना कंगना राणावत के समर्थन में नारेबाजी कर रही थी।

शिवसेना के साथ हजारों महिला कार्यकर्ता भी मौजूद थीं जिन्होंने एयरपोर्ट पर जमकर बवाल काटा। गहमागहमी बरकरार रही और कोरोना के टाइम पर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ती रहीं। इस दौरान हजारों की संख्या में एयरपोर्ट पर पुलिस बल तैनात किया गया। एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था तार-तार हो गई और एयरपोर्ट राजनीति का अखाड़ा बन गया। कई घंटों तक लोग एयरपोर्ट पर जमे रहे। इस बीच कंगना का प्लेन उतरते ही उनको सिक्योरिटी के लोगों ने रनवे से ही एयरपोर्ट के दूसरे रास्ते के जरिए उनको अपने घर पहुंचा दिया।

घर पहुंचते ही कंगना राणावत ने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि आज मेरा घर टूटा है कल तुम्हारा घमंड टूटेगा इससे पहले भी आज सुबह से कंगना लगातार ट्वीट करके महाराष्ट्र सरकार बीएमसी और उद्धव ठाकरे पर निशाना साधती रहीं। उद्धव सरकार को उन्होंने बाबर की सरकार करार दिया और मुंबई को पाकिस्तान।

कंगना ने वीडियो संदेश भी जारी किया गौरतलब है कि आज कंगना राणावत के ऑफिस के ठिकाने पर बीएमसी के अधिकारियों ने भारी पुलिस बल के साथ पहुंचकर उनके ऑफिस को तहस-नहस कर दिया इससे पहले सिर्फ 1 दिन पहले ही बीएमसी ने कंगना के ऑफिस में नोटिस चस्पा किया था। बीएमसी के अधिकारियों ने कंगना के मुंबई पहुंचने से पहले ही उनके ऑफिस का हुलिया बदल दिया।। घर में रखे सामान को भी तोड़ डाला। सोफा, मंदिर और दीवारों पर लगे पंखे तक तोड़ डाले।

यही नहीं पड़ोसियों के द्वारा यह भी बताया गया कि बीएमसी के अधिकारी उनसे कंगना का सोशल बॉयकॉट करने के लिए कह रहे थे और यह भी कहा कि अगर ऐसा नहीं किया तो आप लोगों को प्रॉब्लम हो जाएगी। हालांकि इस बर्बर और कायराना कार्रवाई के विरोध में कंगना के सपोर्ट में आसपास के लोग भी उतर गए और लोगों ने मीडिया के सामने खुलकर गलत कार्यवाही करने की बात कहीं।

इस दौरान महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कंगना को सपोर्ट करते हुए कहा की छत्रपति शिवाजी महाराज के महाराष्ट्र में इतनी कायर और अलोकतांत्रिक सरकार इससे पहले कभी नहीं देखी। वहीं कांग्रेस के नेता संजय निरुपम ने भी बीएमसी की कार्यवाही का विरोध किया उन्होंने कहा कि कंगना का ऑफिस अवैध था या उसे डिमोलिश करने का तरीका, क्योंकि हाईकोर्ट ने कार्रवाई को गलत माना और तत्काल रोक लगा दी। पूरा एक्शन पर शोध से ओतप्रोत था लेकिन बदले की राजनीति की उम्र बहुत छोटी होती है कहीं एक ऑफिस के चक्कर में शिवसेना का डिमोलिशन ना शुरू हो जाए।

महाराष्ट्र सरकार में आघाडी सरकार की सहयोगी एनसीपी के सुप्रीमो शरद पवार ने भी बीएमसी की कार्रवाई को गैरजरूरी बताते हुए अपना बयान जारी किया

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