भू-माफिया और राजस्व अधिकारियों से साठ-गाँठ से पट सकता था तालाब,रोक

रिपोर्ट ;- नैमिष शुक्ल। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद में मिश्रित तहसील क्षेत्र महर्षि दधीचि की तपस्थली होंने के कारण विश्व विख्यात रहा है लेकिन भू माफियो यहाँ पर राजस्व अभिलेखों में अधिकारियों से साठ-गाँठ करके हेरा फेरी करने से बाज नही आ रहे है ।

क्या है पूरा प्रकरण;-

नगर पालिका मिश्रित की गाटा सँख्या 316, 317,रकबा क्रमशः 0.72, 2.46 एकड़, 0.2910, 0.995 हेक्टेयर खसरा बन्दोबस्त हाल सन 1337 फसली में खेतौनी सँख्या 203 में तालाब के रूप में 1.286 हेक्टेयर दर्ज है उक्त तालाब मिश्री पुत्र खग्गा को सिंघाड़ा डालने के लिए दिया जाता रहा जिसका अभिलेखीय रिकार्ड 1363 फसली तक अंकित रहा ।

क्या हुई राजस्व अभिलेखों में हेरा फेरी राजस्व अभिलेखीय साक्ष्यानुसार।

नगर पालिका मिश्रित सीतापुर – हरदोई मार्ग पर स्थित यह तालाब राजस्व अभिलेख में 1363 फसली में दीवान चन्द गिरी पुत्र हरी बाबू निवासी नैनीताल के नाम फर्जी तरीके से बिना कोई राजस्व अधिकारी के आदेश अंकित हो गया ।
यह एक राजस्व अधिकारियो पर बहुत बड़ा सवालिया निशान बनता है।इतना ही नही वाद संख्या 3354/472 दिनांक 11 जनवरी 2016 को नायब तहसीलदार मिश्रित ने सम्पूर्ण प्रकरण की जानकारी होते हुए भी खाता सँख्या 50 की गाटा सँख्या 317/0.995 मा.गु. 60 का 1/2 भाग दीवान चन्द गिरि पुत्र हरी बाबू निवासी नैनीताल नाम के साथ अब्दुल पुत्र याकूब अली उर्फ छोटेलाल बतौर बैनामा संक्रमणीय भूमि सह खातेदार कैसे दर्ज होने का आदेश जारी कर दिया यह तहसील प्रसाशन पर बहुत बड़ा सवालिया दर्शाता है — ? ? ?

वाद सँख्या 103/305 दिनांक 22 सितम्बर 2016 नायब तहसीलदार मिश्रित द्वारा आदेश हुआ कि खाता सँख्या 50 की गाटा सँख्या 316/0.291 , 317/0.995 मालगुजारी 60 ख पूर्ण अंश में दीवान चन्द गिरि पुत्र हरी बाबू निवासी नैनीताल नाम खारिज करके रामफल पुत्र पूरन सिंह व रविंदर कुमार पुत्र रघुवीर नई ठाकुर नगर तिराहा पर.औरंगाबाद बतौर बैनामा कैसे दर्ज कर देने का आदेश पारित कर दिया – –? ? ?

जबकि रजिस्टार कानूनगो मिश्रित ने वाद सँख्या 84 दिनांक 10 दिसंबर 2016 को तहसीलदार मिश्रित को प्रेषित आख्या में स्पष्ट उल्लेख किया है कि मिश्री पुत्र खग्गा के नाम 1360 1361,1362 फसली दर्ज है परन्तु 1363 में विना कोई आदेश दीवान चन्द गिरि पुत्र हरी बाबू के नाम अंकित है जो सही करने योग्य है।

सर्वोच्च न्यायालय राजस्व विभाग की क्या है नियमावली :-

माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हिन्द लाल तिवारी बनाम कमला गुप्ता सिविल अपील सँख्या 4787 वर्ष 2001 व माननीय उच्च न्यायालय ने सीताराम वनाम डी.डी.सी. वाराणसी 1983 एस. एल.जे. के पृष्ठ सँख्या 76 में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पट्टा गलत तरीके से भूमिधर अंकित करने व बैनामा किये गये अवैध माने जाएंगे।

भूमि सुरक्षित 132 जमीदार विनाश एवम भूमि सुधार अधिनियम के अनुसार चाहे तालाब हो या कब्रिस्तान अथवा चरागाह की भूमि है तो इस भूमि मे किसी को भूमिधरी का अधिकार प्राप्त नही हो सकता न तो इसकी रजिस्ट्री करने या कराने का अधिकार प्राप्त है

सम्पूर्ण प्रकरण सुप्रीम कोर्ट का एक्ट,राजस्व का जेड.एल.आर. एक्ट, नगर पालिका मिश्रित-नैमिषारण्य 06 दिसम्बर 2018 एस.डी.एम.मिश्रित को प्रेषित रिपोर्ट, रजिस्टार कानूनगो द्वारा तहसीलदार को प्रेषित रिपोर्ट,व कानूनविदों की राय तथा 1337 फसली खसरे व खतौनी सँख्या 203 से यह स्पष्ट हो जाता है कि तालाब का किसी भी परिस्थिति में भूमि का श्रेणी परिवर्तन नही किया जा सकता है इसके बाद भी तालाब की भूमि का तहसील प्रसाशन के अधिकारियों द्वारा ही श्रेणी परिवर्तन कराया गया ऐसा क्यों हुआ किसने किया यह यक्ष प्रश्न बना तहसील प्रसाशन के अधिकारियों के सामने उठ खड़ा हुआ है इसके साथ साथ मिश्रित क्षेत्र के लेखपाल आनन्द सिंह व राजस्व निरीक्षक मिश्रिख द्वारा प्रेषित रिपोर्ट दिनाँक 27 जून 2019 में मौजूदा तालाब को बरसात का जल भराव दिखाकर नरसिंघौली व मिश्रित के गाटा सँख्या से तालाब के गाटा सँख्या 316 , 317 के पटान की अनुमति दिए जाने सम्बन्धित रिपोर्ट भेजी लेकिन वही पुनः 05 जुलाई 2019 को इससे पृथक विरोधाभाषी रिपोर्ट में कहा कि ऐसा क्षेत्र जो वर्षा ऋतु में जल से भर जाता है या भर जा सकता है आबंटन किसी व्यक्ति को आबादी के रूप में नही किया जा सकता है वही खनन विभाग से 12 जुलाई 2019 को मिट्टी पटान सम्बन्धित रिपोर्ट निरस्तीकरण करवाते है लेकिन रिपोर्ट निरस्त होने के बाद भी 15 जुलाई 2019 को तालाब को जेसीबी डम्फर आदि से पटान चालू हो जाता है वही जब तहसील प्रसाशन के उप जिलाधिकारी राजीव पाण्डेय को जानकारी होने पर उस पटान को रुकवा भी दिया जाता है लेकिन अभी तक कोई सशक्त कार्यवाही अमल में नही की गयी केवल जाँच पड़ताल चल रही है जबकि तहसीलदार मिश्रित के पटान सम्बन्धित निरस्त्रीकरण रिपोट में भी यह उल्लेखनीय है कि क्षेत्रीय लेखपाल स्पष्ट एवम तथ्योपरक रिपोर्ट न देने के कारण स्पष्टीकरण एवम कार्यवाही हो सकती है कब तक – – – – – – -?

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