नसीरुद्दीन की अनसुनी कहानियां, कई फिल्मों में उनके सीन को काटकर गया था निकाला
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तृप्ति रावत/ आज नसीरुद्दीन शाह का 68वां जन्मदिन है। नसीरुद्दीन शाह सिनेमा जगत के वो कोहिनूर है जिसकी चमक समय के साथ और बढ़ती चली गई। थियेटर से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक नसीरुद्दीन का सफर लजवाब रहा। वैसे तो नसीरुद्दीन अभी तक 227 फिल्मों में काम कर चुके हैं।

लेकिन उन्होंने ऐसी 18 फिल्मों में काम किया है, जो या तो पूरी ही नहीं हुईं, या उनका रोल कट गया, या ये फिल्में कभी रिलीज नहीं हुईं। ये एक रिकॉर्ड भी हो सकता है। जानिये कौन सी हैं वे फिल्में और क्या है उनका किस्सा?

1968 में आई फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ में 18 साल की उम्र में नसीरुद्दीन शाह को कास्ट किया गया था। इसमें राज कपूर और हेमा मालिनी लीड कैरेक्टर में थे। उन्होंने इस फिल्म में रोल भी किया पर एडिटिंग के वक्त उनके सीन फिल्म से काटकर निकाल दिये गये।

फिर 1985 में आई फिल्म ‘तेरे शहर में’ एक ऐसी फिल्म थी जिसमें नसीरुद्दीन के साथ स्मिता पाटिल, दीप्ति नवल, कुलभूषण खरबंदा, सोनू वालिया भी थे। इस फिल्म के डायरेक्टर सागर सरहदी थे। फिल्म के प्रोड्यूसर ने दिल्ली के फाइनेंसर से पैसे लिये थे। प्रोड्यूसर पैसे वापस नहीं दे सके। इसलिए फाइनेंसर्स ने रील छीन लीं। और फिल्म कभी रिलीज नहीं हो सकी।

1990 में आई फिल्म ‘मासूम गवाह’ में भी उन्हें कास्ट किया गया था। फिल्म में दूसरे कलाकार थे, अनीता राज, प्रेम चोपड़ा, सईद जाफरी, सतीश शाह और मैकमोहन। फिल्म लगभग पूरी हो चुकी थी पर इसी दौरान नसीरुद्दीन शाह और फिल्म के डायरेक्टर एम. एम. बेग की किसी बात पर हाथापाई हो गई।

इसी के चलते फिल्म कभी रिलीज नहीं हो सकी। वह भी तब जब फिल्म के ऑडियो कैसेट्स तक रिलीज हो चुके थे। इसके बाद फिल्म ‘दयालु’ में नसीरुद्दीन, माधवी, सुरेश ओबेराय, परेश रावल, के साथ कास्ट किये गये थे। इसमें पुनीत इस्सर, जॉनी लीवर भी थे। यह फिल्म भी बीच में ही बंद हो गई और कभी रिलीज नहीं हो सकी।

फिल्मा ‘पाबंदी’ में भी उनके साथ सुरेश ओबेराय, परेश रावल, कुलभूषण खरबंदा, आलोक नाथ थे। यह फिल्म भी आर्थिक कारणों के चलते कभी रिलीज नहीं हो सकी। फिर 1991 में बन रही फिल्म ‘जब प्यार किया तो डरना क्या’ में नसीरुद्दीन शाह थे। लीड किरदारों में चंद्रचूड़ सिंह और सुचित्रा कृष्णमूर्ति थे। यह बन गई होती तो चंद्रचूड़ सिंह की पहली फिल्म होती। फिल्म को 60 फीसदी शूट होने के बाद बंद कर दिया गया था।

1992 में ‘शहादत’ नाम की एक फिल्म में भी उन्हें कास्ट किया गया था, जो कभी नहीं बनी। ये फिल्म लिलिपुट ने डायरेक्ट की थी। उसके बाद इसी साल 1992 में ‘नरगिस’ फिल्म में हेमा मालिनी के साथ उन्हें कास्ट किया गया था। फिल्म के डायरेक्टर खालिद मोहम्मद थे। फिल्म तो पूरी हो गई थी पर आर्थिक वजहों के चलते कभी रिलीज नहीं हो सकी। इसके बाद ‘101 डेज’ फिल्म में नसीर के साथ जीतेंद्र और आएशा जुल्का को कास्ट किया गया था। पार्थो घोष की ये फिल्म कभी रिलीज नहीं हो सकी। जबकि फिल्म के गाने भी मार्केट में आ चुके थे।

फिर 1993 में ‘घड़ी’ नाम की फिल्म आई जो कभी न पूरी हो सकने वाली फिल्म में नसीरुद्दीन के साथ आदित्य पंचोली और शिल्पा शिरोडकर भी थीं। फिल्म का डायरेक्शन एन. चंद्रा और अनिल मट्टू कर रहे थे। 1993 में ही ‘बंधुआ’ फिल्म में नसीरुद्दीन शाह को अमिताभ बच्चन, माधुरी दीक्षित के साथ कास्ट किया गया था। इस फिल्म में वहीदा रहमान भी थीं। फिल्म जेपी दत्ता बना रहे थे पर फिल्म बंद करनी पड़ी।

1994 में ‘गहराई’ फिल्म में नसीरुद्दीन शाह के साथ सुनील शेट्टी, अनुपम खेर, रवीना टंडन, सदाशिव अमरापुरकर, आलोक नाथ, रज़ा मुराद, मोहनीश बहल भी थे। ये फिल्म भी कभी नहीं आई। 1995 में ‘गरम हवा’ फिल्म आई इसमें नसीरुद्दीन के साथ पूजा भट्ट, अतुल अग्निहोत्री और परेश रावल भी थे। इस फिल्म के डायरेक्टर थे महेश भट्ट। लेकिन फिल्म पूरी नहीं हुई। ‘यारों का यार’ में भी नसीरुद्दीन शाह को कास्ट किया गया था। ये फिल्म भी कभी रिलीज नहीं हो सकी। इसमें उनके अलावा विनोद खन्ना भी थे। जब फिल्म बंद हुई तब तक 13 रील शूट भी हो चुकी थी।

1996 में ‘एक और भीष्मा’ में भी नसीर को कास्ट किया गया था, 6 रील रिकॉर्ड भी हो गई थीं पर फिल्म बंद कर दी गई। 1999 में फिल्म ‘तनाव’ में भी नसीरुद्दीन को कास्ट किया गया था। इसमें उनके साथ धर्मेंद्र और मौसमी चटर्जी भी थे। इस फिल्म के डायरेक्टर विजय रेड्डी थे।

2008 में ‘एक्सचेंज ऑफर’ नाम की फिल्म में भी नसीरुद्दीन शाह को कास्ट किया गया था। पहले इसका नाम था घोस्ट, घोस्ट न रहा। इसमें उनके साथ राहुल बोस, ईशा देओल, परेश रावल और ओमपुरी भी थे। शिवम नायर इसे डायरेक्ट कर रहे थे। लेकिन ये फिल्म भी पूरी नहीं हो सकी।

अपने ही देश की नहीं बल्कि ऐसे इंटरनेशनल प्रोजेक्ट में भी नसीरुद्दीन काम कर चुके हैं जो बंद हो गये। चैनल फोर की इंटरनेशनल फिल्म ‘द लियोपार्ड एंड द फॉक्स’ में उन्हें कास्ट किया गया था। ये जुल्फिकार भुट्टो के दौर के पाकिस्तान पर बेस्ड थी।

 

  

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