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मनीष सिसोदिया ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में लॉन्च किया ‘पेरेंट्स संवाद’ कार्यक्रम

बच्चों की शिक्षा व स्कूलों में पेरेंट्स की भागीदारी बढ़ाने के लिए दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शुरू हुआ ‘पेरेंट्स संवाद’ कार्यक्रम*

*35 हजार से अधिक स्कूल मैनेजमेंट कमेटी सदस्य व स्कूल मित्र 50-50 पेरेंट्स से जुड़ेंगे, फ्री कालिंग सिस्टम के माध्यम से हर माह पेरेंटिंग व पढ़ाई के बारे में लेंगे फीडबैक और देंगे सुझाव*

*’पेरेंट्स संवाद’ कार्यक्रम दुनिया में अपनी तरह का अनूठा और सबसे बड़ा पैरेंट आउटरीच प्रोग्राम, वन-टू-वन मोड में 18 लाख बच्चों के पेरेंट्स स्कूल से सीधे जुड़ेंगे: मनीष सिसोदिया*

*देश में पैरेंटिंग के पैटर्न पर काम करने की जरुरत. आज तीन तरह की पैरेंटिंग हमारे बीच प्रचलित -जीरो पैरेंटिंग, ओवर पैरेंटिंग और मित्रवत पैरेटिंग. तीनों ही केस में बच्चे का नेचुरल ग्रोथ नहीं: मनीष सिसोदिया*

 *‘पेरेंट्स संवाद’ कार्यक्रम पेरेंट्स व स्कूल के बीच संवाद को बढ़ाएगा, साथ ही पेरेंट्स को बच्चों के लिए उचित राह सुझाएगा: मनीष सिसोदिया*

पेरेंट्स को स्कूलों से जोडकर अपने बच्चों की शिक्षा में उनकी भागीदारी को बढ़ाने और बेहतर पेरेंटिंग के गुर सिखाने के लिए गुरुवार को दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पैरेंटल आउटरीच प्रोग्राम के तहत ‘पेरेंट्स संवाद’ कार्यक्रम को लांच किया गया| इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पेरेंट्स व स्कूलों को आपस में जोड़ना ताकि दोनों के समावेश के साथ बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ-साथ बेहतर पेरेंटिंग भी मिल सके| स्कूल मित्रों की सहायता से पेरेंट्स को उनके बच्चों के साथ संवाद करना और एक बेहतर कम्युनिकेशन स्थापित कर पेरेंट्स को उनके बच्चों की पढ़ाई और वेल-बींग के प्रति जागरूक करना है|

 इस कार्यक्रम के तहत 35000 से ज्यादा स्कूल मित्र और स्कूल मैनेजमेंट कमिटी मेंबर्स स्कूल और पैरेंट्स को जोड़ने को काम करेंगे जिससे दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 18 लाख से ज्यादा बच्चे लाभान्वित होंगे| इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष ,सिसोदिया ने कहा कि ’पेरेंट्स संवाद’ कार्यक्रम दुनिया में अपनी तरह का अनूठा और सबसे बड़ा पैरेंट आउटरीच प्रोग्राम है। इस प्रोग्राम से 18 लाख बच्चों के पेरेंट्स स्कूल से सीधे वन- टू-वन मोड में जुड़ेंगे| 

 उपमुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश में पैरेंटिंग के पैटर्न पर काम करने की जरुरत है. आज तीन तरह की पैरेंटिंग हमारे बीच प्रचलित -जीरो पैरेंटिंग, ओवर पैरेंटिंग और मित्रवत पैरेटिंग. तीनों ही केस में बच्चे का नेचुलरल ग्रोथ नहीं. होता है। ‘पेरेंट्स संवाद’ कार्यक्रम पेरेंट्स व स्कूल के बीच संवाद को बढ़ाएगा, साथ ही पैरेंट्स को बच्चों के लिए उचित राह भी सुझाएगा. कोरोना महामारी के दौरान ये सवाल उठकर आया कि बच्चो की शिक्षा सही तरीके से कैसे हो पाएगी व ऑनलाइन शिक्षा में आने वाली बाधा को कैसे दूर किया जा सकता है? कैसे बच्चो को तनाव की स्थिति में सहयोग दिया जा सकता है व पैरेंट का सहयोग बच्चो की शिक्षा में किस तरह से बढ़ाया जा सकता है| पैरेंटल आउटरीच प्रोग्राम इसके हल कर रूप में सामने आया|

*पैरेंटल आउटरीच की सफलता*

पैरेंटल आउटरीच प्रोग्राम, पायलट फेज में पूर्वी व दक्षिणी पूर्वी जिलों के 40 स्कूलों में शुरू किया गया| पायलट फेज काफी सफल रहा और इस दौरना ये देखने को मिला कि इस कार्यक्रम से अपने बच्चों की पढ़ाई में पेरेंट्स की सहभागिता बढ़ी| पेरेंट्स का स्कूल से जुडाव बढ़ा और स्कूल के दायरा विस्तृत हुआ| पायलट फेज के दौरान इस कार्यक्रम को काफी सफलता मिली और ये देखा गया कि स्कूलों से ड्रॉपआउट दर कम हुई और बच्चों का स्कूल में उपस्थिति दर भी बढ़ा| साथ ही कोरोना के मुश्किल दौर में भी पेरेंट्स के बीच सकारात्मकता देखने को मिली| स्कूल मित्रों के साथ लगातार संवाद के द्वारा पेरेंट्स ने विभिन्न परेशानियों के अनूठे हल निकाले| कोरोना के दौरान स्कूल मित्रों ने न केवल बच्चों को ट्रेस करने उन तक शिक्षण सामग्री पहुँचाने में मदद की बल्कि उनकी काउंसलिंग में भी मदद की|

*आगे क्या करना होगा* 

1.      पैरेंट संवाद कार्यक्रम में स्कूल मैनेजमेंट कमेटी में शामिल पेरेंट्स के अतिरिक्त और भी पेरेंट्स को स्कूल मित्र के तौर पर जोड़कर सभी पेरेंट्स के साथ संवाद किया जाएगा|

2.      हर स्कूल मैनेजमेंट कमेटी सदस्य व स्कूल मित्र को उनके आसपास के 50-50 पेरेंट्स से जोड़ा जाएगा  और ये महीने में एक बार DCPCR के द्वारा तैयार किये गए फ्री कालिंग सिस्टम के माध्यम से कॉल के माध्यम से पेरेंट्स से जुड़ेंगे|

3.      एसएमसी मेंबर्स और स्कूल मित्रों को थीम बेस्ड ट्रेनिंग दी जाएगी और हर महीने की एक थीम के आधार पर वो बाकि पेरेंट्स के साथ पेरेंटिंग व पढ़ाई के बारे में संवाद करेंगे|

4.      संवाद के दौरान पेरेंट्स को बताया जाएगा कि अपने बच्चे के साथ कैसे बात करे| ये कैसे जाने की बच्चा क्या सीख रहा है| बच्चे को समय-समय पर क्या सपोर्ट दिया जाए आदि|

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि पेरेंट्स संवाद जैसा कार्यक्रम अपने तरह का अनूठा वन टू वन पैरेंट आउटरीच कार्यक्रम है जो सीधे 18 लाख बच्चों के पेरेंट्स को स्कूलों से जोड़ने का काम करता है| उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम बच्चों की पढ़ाई व उनकी पेरेंटिंग को एक नई सोच देने का काम करेगा जिससे टीचर्स व पेरेंट्स को एक समावेशी सोच के साथ बच्चों की बेहतरी के लिए काम कर सके| श्री सिसोदिया ने कहा कि बच्चों के लर्निंग में पेरेंट्स व टीचर दोनों अहम् भूमिका निभाते है| एक बच्चा दिन में 7-8 घंटे स्कूल में और बाकि समय घर पर बिताता है इस दौरान वह कुछ न कुछ सीखते रहते है| इसे ध्यान में रखते हुए ही पेरेंट्स संवाद कार्यक्रम को डिज़ाइन किया गया जहाँ पेरेंट्स व टीचर दोनों साथ मिलकर बच्चे की लर्निंग को बेहतर करने का काम करे|

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि लोगो को पेरेंटिंग का असल मतलब नहीं पता| एक ओर हम पेरेंटिंग के नाम पर बच्चों के साथ बॉस जैसा व्यवहार करते है और सोचते है कि हमने जो तय किया है बच्चा वही करेगा| या दूसरी ओर पेरेंटिंग के नाम पर कुछ नहीं करते| ‘पेरेंट्स संवाद’ कार्यक्रम इस पद्धति को ख़त्म करने का काम करेगा| इस कार्यक्रम के माध्यम से स्कूल मित्र पेरेंट्स व स्कूल के बीच संवाद को बढ़ाने का काम करेंगे|

इस कार्यक्रम को त्यागराज स्टेडियम में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा लांच किया गया| कार्यक्रम में कालका जी से विधायक आतिशी, DCPCR चेयरपर्सन, अनुराग कुंडू, प्रधान शिक्षा सचिव एच.राजेश प्रसाद, शिक्षा निदेशक, हिमांशु गुप्ता, प्रधान शिक्षा सलाहकार, शैलेन्द्र शर्मा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे|

News Reporter
पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना करियर बनाने वाली निकिता सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से ताल्लुक रखती हैं पिछले कुछ सालों से परिवार के साथ रांची में रह रहीं हैं और अब देश की राजधानी दिल्ली में अपनी सेवा दे रहीं हैं। नेशनल ब्रॉडकास्टिंग अकादमी से पत्रकारिता में स्नातक करने के बाद निकिता ने काफी समय तक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के न्यूज़ पोर्टल्स में काम किया। उन्होंने अपने कैरियर में रिपोर्टिंग से लेकर एंकरिंग के साथ-साथ वॉइस ओवर में भी तजुर्बा हासिल किया। वर्त्तमान में नमामि भारत वेब चैनल में कार्यरत हैं। बदलती देश कि राजनीती, प्रशासन और अर्थव्यवस्था में निकिता की विशेष रुचि रही है इसीलिए पत्रकारिता की शुरुआत से ही आम जन मानस को प्रभावित करने वाली खबरों पर पैनी नज़र रखती आ रही हैं। बेबाकी से लिखने के साथ-साथ खाने पीने का अच्छा शौक है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ में योगदान जारी है।
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