2 माह के दुधमुंहे बच्चे को छोड़कर भागी माँ, राहगीर महिला ने बच्चे को अपनाया

पहले कहा जाता था कि – “पूत कपूत सुने हैं, पर ना माता सुनी कुमाता” लेकिन अब इसके मायने बदल चुके हैं । कलयुग में अब माताएं भी कुमाता होने लगी हैं । ऐसा ही हृदयस्पर्शी एक मामला अमेठी जनपद मुख्यालय कोतवाली गौरीगंज क्षेत्र अंतर्गत 27 दिसंबर की शाम लगभग 3:00 बजे देखने को मिला जहां पर बरनाटीकर के नंदा का पुरवा रेलवे क्रॉसिंग के पास सड़क के किनारे झाड़ियों के पीछे एक कलयुगी मां अपने 2 माह के दुधमुंहे बच्चे को रखकर रफूचक्कर हो गई।

यह बच्चा किसका है. कौन यहां पर रख गया.. इस बात की किसी को कोई खबर नहीं है। सड़क से गुजर रही नंदा के पुरवा की एक राहगीर महिला की नजर जब इस बच्चे पर पड़ी तो उसके अंदर की ममता जाग उठी और वह उस नवजात अबोध बच्चे को लेकर अपने घर पहुंच गई। गांव वालों ने इस बात की सूचना डायल 112 पुलिस को दी।

पुलिस ने गाँव पहुंच कर बच्चे को देखा और लिखा पढ़ी कर वापस हो गए। फिलहाल बच्चा अभी उसी महिला के पास है जिसने उसे पाया था । उसके पाने के बाद महिला के घर वालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा । क्योंकि बताया जा रहा है कि उस महिला के बच्चे भी नहीं है। वह इसको अपने पास रखना चाहती है और इसका विधिवत लालन-पालन करने को तैयार है।

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