राजधानी दिल्ली में प्रकृति और संस्कृति को संरक्षित करने के लिए हुआ साहित्यिक अनुष्ठान

पूर्णिमा और भगवान वाल्मीकि जयंती पर संगीत, नृत्य नाटक और अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया

(दिल्ली संवाददाता) देश की राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस सेंट्रल पार्क में लगातार दूसरे वर्ष प्रकृति उत्सव ” नटरंग शरद रंगोत्सव” का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। 2 दिवसीय इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय कवियों, नर्तकों, संगीतज्ञों और कलाकारों ने हिस्सा लिया।

नटरंग शरद उत्सव के दूसरे दिन अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें
परमपूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज संस्थापक एवं सद्गुरु (परमार्थ निकेतन ) आशीर्वचन देते हुए कहा कि आज नेचर और कल्चर पर इस तरह के कार्यक्रम समाज को नई दिशा देते हैं। उन्होंने आयोजक अंतरराष्ट्रीय कवि गजेन्द्र सोलंकी की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रकृति संरक्षण के लिए इस तरह बड़े स्तर का कार्यक्रम देश की राजधानी में पहली बार आयोजित हो रहा है। साथ ही स्वामी जी ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम हवा, पानी और नदियों को संरक्षित करने की प्रेरणा समाज को देते हैं। कार्यक्रम में केन्द्रीय केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री, भारत सरकार फग्गन सिंह कुलस्ते ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। विश्व प्रशिद्ध कथा वाचक अजय भाई जी ने द्वीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

इस उत्सव पर्व की महासंकल्पना करने वाले संयोजक अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कवि गजेन्द्र सोलंकी ने इस मौके पर कहा कि “प्रकृति और सभ्यता-संस्कृति के शाश्वत सम्बन्ध को आधार मानकर मानव सभ्यता को विनाश की विभीषिका से कैसे बचाया जा सकता है और इसी संकल्पना पर आधारित है ये प्रकृति एवं संस्कृति दर्शन का उत्सव, द्वितीय शरद रंगोत्सव 2019। प्रकृति एवं संस्कृति का शाश्वत सम्बन्ध है। उस सम्बन्ध को गहराई से समझने एवं अनुभूत करने की आवश्यकता है। इस कार्यक्रम में प्रकृति एवं संस्कृति को संरक्षित करने का संदेश देने का प्रयास किया गया।”
इस मौके पर दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष और दिल्ली के पूर्व महापौर ने महेशचन्द्र शर्मा बताया कि दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन अपनी हीरक जयंती मना रहा है और ये संस्था पिछले 75 वर्षों से हिंदी के उत्थान और प्रसार-संवर्धन के लिए काम कर रही है।

इस द्वितीय ‘नटरंग’ शरद रंगोत्सव में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में राज्यसभा सांसद सत्यनारायण जटिया, डॉ हरिओम पवार, डॉ ध्रुवेंद्र भदौरिया, डॉ विष्णु सक्सेना, राजेश ‘चेतन’, डॉ सुमन दूबे ने शिरकत की। कविसम्मेलन में गजेन्द्र सोलंकी और डॉ हरिओम पँवार की कश्मीर पर कविताओं पर श्रोताओं का खूब प्यार मिला। लोकप्रिय रचनाकार गजेन्द्र सोलंकी ने सुनाया

हटा के धारा 370 संविधान का मान रखा।
घाटी के चप्पे-चप्पे पर हमने हिंदुस्तान लिखा।

कवि मनवीर मधुर ने ये कहते हुए हुंकार भरी
जिस राजा को सदा देश के हित में जीना होता है ।
उसके हर सैनिक का छप्पन इंची सीना होता है ।।

कवि राजीव बटिया ने सुनाया
साहस का परिचय दिया जो आज आपने ,एक नया इतिहास फिर से बना दिया ।
वर्षों से सो गया था ,स्वाभिमान देश का जो,उसे पूरे जोश ओ’ खरोश से जाग दिया ।।

कवि राधाकांत पांडेय ने देशभक्ति रचना को सुनाकर काफी वाहवाही बटोरी।
देश के निमित्त प्राण दाँव पे लगा रहे जो,
एक दिया उनके भी नाम का जलाइए।

कार्यक्रम में बड़ी तादाद में श्रोताओं ने सहभागिता की और सभी विधा की कविताओं से आनंदित होते रहे।
कार्यक्रम में, पूनम वर्मा, विनीत पण्डेय, मनीष,प्रख्यात मिश्रा ने भी काव्यपाठ किया और संचालन कवि गजेन्द्र सोलंकी ने किया।

कार्यक्रम में साहित्य गौरव सम्मान डॉ. रवींद्र शुक्ल को,प्रकृति गौरव सम्मान मनु गौड़ को, शिक्षा गौरव सम्मान डॉ. रमा शर्मा को, सेवा गौरव सम्मान डॉ. राजन श्रीवास्तव को प्रदान किया गया। इस मौके पर देशभर से आए कलाविदों, समाजसेवियों को भी सम्मानित किया गया।
शरद पूर्णिमा और भगवान वाल्मीकि जयंती के अवसर पर यह उत्सव दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मलेन एवं नटरंग फाउंडेशन के द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया।

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