झाँसी : आयुर्वेद उत्पादन से सम्भव है किसान की आय बढोत्तरी -अनुराग शर्मा

रिपोर्ट- विवेक राजपूत झाँसी

झाँसी प्राचीन चिकित्सीय पद्धति आयुर्वेद की पहचान जितनी कोरोना कालखंड में हुई वो अभूतपूर्व है, हर प्रकार के रोगों के जड़ से समाप्त करने वाली आयुर्वेद औषधि एवं पद्धति से न सिर्फ देश बल्कि पूरे विश्व में शारीरिक रोग प्रतिरोध क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ाने में जो भूमिका निभाई वो हरेक व्यक्ति ने स्वयं महसूस कियाl हल्दी, तुलसी, गिलोय, ग्वारपाटा, सोंठ, नागरमोटा, अश्वगंधा आदि के लगातार सेवन से महामारी से बचने में बहुत लोग सफल रहे।

सरकार के आयुष विभाग ने भी आयुर्वेदिक औषधियों के सेवन को प्राथमिकता दी और इसका प्रचार प्रसार कराया। महामारी कालखंड में आयुर्वेद ने जिस तरह घर की रसोई में सुलभ उपलब्ध पदार्थों ने जिस सुगमता से लोगों को बचाया उस से आयुर्वेद लोगों की प्राथमिकता में आ गया है। कोविड-19 के दौरान बैद्यनाथ के आयुर्वेद उत्पादों का कोविड-19 के मरीजों पर शासन के आयुष विभाग की अनुमति से रानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज, झाँसी तथा बडागांव तथा बरुआसागर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सफलता पूर्वक परिक्षण किये गए। इसलिए कहा जा सकता है कि आने वाला समय आयुर्वेद का है।

किसान प्राकृतिक रूप से उगने वाले आयुर्वेद वनोपज उत्पादों को संग्रह कर तथा आयुर्वेद उत्पादों को उगा कर अच्छा खासा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। अपने खेतों की मेड़ो पर आंवला, अर्जुन, सहजन, बहेड़ा, हरड आदि के वृक्ष लगा कर सालों साल तक मुनाफा ले सकते हैं, साथ ही साथ नियमित खेती भी कर सकते हैं ये मौका किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता है।

हाल के दिनों में अश्वगंधा उच्च व्यापार की वस्तु रही तथा बाजार में अश्वगंधा की कमी होने के कारण अचानक इसके दामों में बढोत्तरी दर्ज की गई।
भारत सरकार द्वारा निर्मित ऐप ई-चरक पर भारी संख्या में लोगो ने आयुर्वेद उत्पादों की जानकारी ली तथा इन उत्पादों को खरीदा झांसी में रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्व विद्यालय, बुन्देलखण्ड विश्व विद्यालय के कृषि विभाग केन्द्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान केन्द्र में भी आयुर्वेदिक वृक्षों पर लगातार शोध हो रहा है तथा किसानों को आयुर्वेद वृक्षों की तैयार पौध भी प्रदान की जा रही है जिसका किसान भाई लाभ उठा सकते है।

बुंदेलखंड में उपरोक्त औषधियों के अतिरिक्त प्राकृतिक रूप से भी बहुत सारी औषधियां उपलब्ध हैं जैसे भृंगराज, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, गोखरू, चिरचिटा। जबकि आंवला, अर्जुन, हरड, बहेड़ा, छुईमुई, सेन्ना, हरश्रृंगार, सहजन, निर्गुन्डी, करंज, शतावर, मधुनाशिनी आदि के वृक्ष लगा कर इनका उत्पादन किया जा सकता है जिन्हें अलग अलग आयुर्वेदिक कम्पनियाँ हाथो हाथ खरीद लेती हैं। बुंदेलखंड की मिट्टी और जलवायु उपरोक्त सभी औषधियों की खेती के लिए उपयुक्त है।
आयुर्वेद की खेती का अगर पराम्परिक खेती से तुलना की जाये तो ये तुलनात्मक रूप से आसान तथा सस्ती है लागत कम लगती है, अधिक खाद्य तथा दवाईयों की आवश्यकता नही पड़ती तथा इसको किसी प्रकार की बीमारी नही होती आयुर्वेद की खेती अधिक मुनाफा देने वाली खेती साबित होती है।

मेरे संसदीय क्षेत्र के दो जनपदों में खरीफ की फसल में तुलसी, अश्वगंधा, सफेद मुश्ली तथा रबी में केमामाइल, किनोबा (एक प्रकार का बथुआ), गुलाब, घृतकुमारी, सतावर तथा सर्पगंधा की खेती लगभग 400 एकड़ में की जा रही है तथा इनकी पैदावार पर उद्यान विभाग द्वारा 13000 से 30000 रूपये तक की सब्सिडी भी प्रदान की जाती है तथा इनकी लगातार बाजार में खपत है।

हाल ही में केन्द्रीय आयुष मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने केन्द्रीय आयुर्वेद अनुसंधान झांसी में औषधि परीक्षण प्रयोगशाल एवं राष्ट्रीय मानक औषध संग्रहालय का उद्घाटन किया था जिसका लाभ आयुर्वेद उगाने वाले किसान प्राप्त कर सकते है तथा यहाँ के संग्रहालय में नवीन जानकारियाँ प्राप्त सकते है।
झांसी में कुछ उत्साही युवाओं ने अति पौष्टिक फल स्ट्रॉबेरी उगाने का प्रयास किया है जो कि बुन्देलखण्ड की जलवायु के प्रयुक्त है इसे उगाकर भी किसान भाई भारी मुनाफा कमा सकते है। 1 एकड़ भूमि में 30 सेंटीमीटर की दूरी पर यदि इन पौधों को लगाया जाये तो लगभग 16-20 हजार पौधे लग सकते है। प्रत्येक पौधे से प्रति सीजन लगभग आधा किलो ग्राम फल प्राप्त होता है जिसका मूल्य बाजार में लगभग 150 रूपये प्रति किलों तक प्राप्त किया जा सकता है। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने विडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम के उद्घाटन में भागीदारी की थी तथा किसानों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की थी जिसके लिए मैं उनको हार्दिक धन्यवाद देता हूँ।

मैं स्वयं एवं मेरे पूर्वज आयुर्वेद से काफी प्राचीन समय से जुड़े हुए है तथा वर्तमान में मैं बैद्यनाथ समूह का प्रबंध निदेशक हूँ और हमारी संस्था लगातार आयुर्वेदिक औषधियों का क्रय किसानों से करते रहते हैं जिसका भुगतान तुरंत किया जाता है तथा इसमें किसानों के साथ किसी भी प्रकार का कोई अनुबंध भी नहीं किया जाता। किसान भाई कम्पनी के क्रय विभाग में संपर्क साध कर अपने उत्पादों को उनकी गुणवत्ता अनुसार बेच कर तुरंत भुगतान प्राप्त कर सकते हैं।
जिन किसानों से हम दशकों से आयुर्वेदिक उत्पाद खरीद रहे हैं उनकी न जमीन गयी, और न कभी उनकी उपज के भुगतान में देरी हुई बस यही प्रावधान है नए किसान बिलों का भी, पूरी तरह से किसानों के हितों की सुरक्षा देना।

प्रधानमंत्री जी प्रत्येक देशवासियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं, किसानों का कल्याण और उनकी आय को दोगुनी करना उनकी प्राथमिकताओं में से एक है, तीनों कृषि बिल का मसौदा वही है जो सालों से विभिन कृषक संघटन तथा राजनैतिक दल मांग करते आ रहे हैं परन्तु सिर्फ मोदी अन्ध विरोध में इस बेवजय के आन्दोलन को खड़ा किया गया है।

News Reporter
Vikas is an avid reader who has chosen writing as a passion back then in 2015. His mastery is supplemented with the knowledge of the entire SEO strategy and community management. Skilled with Writing, Marketing, PR, management, he has played a pivotal in brand upliftment. Being a content strategist cum specialist, he devotes his maximum time to research & development. He precisely understands current content demand and delivers awe-inspiring content with the intent to bring favorable results. In his free time, he loves to watch web series and travel to hill stations.

Leave a Reply