कोरोना और सियासत से लड़ता भारत : वैक्सीन लगवाने ना लगवाने की जंग

संतोष तिवारी। देश को कोरोना वैक्सीन का इंतजार है लेकिन भारत की सियासत में वैक्सीन को राजनीतिक रंग देने की होड़ है. कोरोना के करोड़ों मामले और लाखों मौत के बीच भारतीय राजनीतिक पार्टियां इस महामारी की शिकार हो गई है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए तैयार की गई वैक्सीन को मंज़ूरी दे दी है. सरकार ने इसके साथ ही कोविशील्ड नाम की एक और वैक्सीन को भी मंज़ूरी दी है. लेकिन दोनों वैक्सीन में एक अंतर है जिसे लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की अपनी चिंता हैं.

भारत बायोटेक की बनाई कोवैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल अभी जारी है और इफिकेसी डेटा अब तक उपलब्ध नहीं है. इसी को मुद्दा बना विपक्ष बयानों के तीर चला रहा है लेकिन सवाल इससे भी बड़ा है कोरोना का नया स्ट्रेन पहले वायरस की अपेक्षा काफी तेजी से फैलने की क्षमता वाला है या नही, इसी वजह से सभी देश सतर्क हो गए हैं. भारत समेत कई देशों ने ब्रिटेन से आने-जाने वाली उड़ानों को कुछ दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया है तो सवाल ये भी कि क्या नया स्ट्रेन वैक्सीन को कमजोर कर देगा क्योंकि ब्रिटेन के नए स्ट्रेन का जो डेटा सामने आया है उससे लगता है कि वेरिएशन तो है और इसका कुछ हद तक असर भी पड़ेगा, लेकिन इसका कोई ज्यादा असर वैक्सीन पर नहीं पड़ने वाला है.

ब्रिटेन में जो वैक्सीन प्रोग्राम चल रहा है सब उस पर ही निर्भर करेगा मसलन,उसमें एंटीबॉडीज अच्छी तादाद में बनती हैं या नहीं. खैर जब उसका डाटा आएगा तो वैक्सीन की क्षमता और गुणवत्ता का पता ही चल ही जाएगा. लेकिन समय जितना लग रहा है सियासी कोरोना उतनी ही तेजी से फैल रहा है थाली पीटने और दीए जलाने के बाद कोरोना चुनावी रैलियों के जरिए नेताओं के बयानों में सुनाई देने लगा था और वैक्सीन बनने से पहले ही मुफ्त बांटने का ऐलान होने लगा था, सुना तो आपने भी होगा, खैर, दांवो और हकीकत के बीच वैक्सीन तो आ गई है लेकिन अब उसे पार्टी वैक्सीन या फिर पार्टी कलर से देखा और दिखाया जा रहा है किसी भी महामारी के दौरान राजनीति में इतनी गिरावट शायद ही आई होगी.

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव हो या फिर कांग्रेस नेता शशि थरूर और जयराम रमेश सभी ने वैक्सीन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और इसे बीजेपी की वैक्सीन बताना शुरु कर दिया जवाब में बीजेपी ने वैक्सीन को राष्ट्रीयता से जोड़ते हुआ कांग्रेस पर तंज कसा की उसे स्वदेशी कुछ पसंद ही नही आता, लेकिन इन सबके बीच 135 करोड़ की आबादी वाले इस देश की उम्मीद को कैसे रौंदा जा रहा है ये कोई समझने को तैयार नही है, इस देश का मिजाज इतना राजनीतिक हो चुका है कि कोरोना वैक्सीन की उम्मीद लगाए लोगों की भावनाओं से भी ये खिलवाड़ करने को तैयार है.

दुनिया के पांच देशों में शुमार भारत वैक्सीन को लेकर तैयार है. महाशक्ति देशों में भारत की गिनती और अंतरराष्ट्रीय साख ये बता रही है कि कई ऐसे देश है जो वैक्सीन के लिए भारत की तरफ उम्मीद की नजरों से देख रहे है. दुनियाभर में बिकने वाली कुल कोरोना वैक्सीन का 60 प्रतिशत भारत में ही उत्पादित होगा. भारतीय दवाई कंपनी आने वाले समय में कोरोना से लड़ने के लिए आठ और सस्ती वैक्सीन लाने वाली हैं. कोरोना की वैक्सीन बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी दवाई उत्पादक कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने एस्ट्राजेनेका की 50 मिलियन डोज का भंडार कर लिया हैं 60 से ज्यादा देशों के राजनयिक हैदराबाद में कोरोना वैक्सीन बनाने वाली भारतीय कंपनियों के दौरे पर आए, अलग अलग देशों के राजनयिकों के दल ने कोरोना वैक्सीन की देश में डेवलपमेंट और प्रोडक्शन को लेकर जानकारी ली. सभी ने भारत की सराहना की और कहा कि सभी देश वैक्सीन के निर्माण में लगे हैं लेकिन सिर्फ भारत पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन की डोज तैयार करने की क्षमता रखता है.

इतना ही नहीं उन्होने माना की भारत में बनाई जा रही कोरोना वैक्सीन का मैनेजमेंट और ट्रांसपोर्टेशन सबसे आसान होंगा. ज्यादातर देशों को इससे फायदा होगा. भारत के पास भारी मात्रा में वैक्सीन के प्रोडक्शन की क्षमता भी है. भारत हाल के दिनों में एक प्रमुख थोक वैक्सीन निर्माता के रूप में उभरा है. दुनिया के 60 प्रतिशत टीकों का उत्पादन भारत ही करता है. दूसरे शब्दों में कहें तो दुनिया में इस्तेमाल होने वाले टीकों की तीन में से एक खुराक का उत्पादन भारत में होता है. इतना ही नहीं भारतीय फार्मा कंपनियां संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों के लिए दवाओं और टीकों की बड़ी आपूर्तिकर्ता हैं. इसके अलावा भारत स्वदेशी रूप से टीकों की एक पूरी नई श्रृंखला बनाने या संशोधित करने में भी बीते कुछ सालों के दौरान काफी सफल रहा है.

भारत की विज्ञान क्षमता का लोहा दुनिया मान रही है लेकिन अपने ही देश में राजनीतिक बयानबाजी हमारी वैज्ञानिक क्षमता का मजाक बना रही है. ऐसे में हमें सीख लेनी चाहिए ऐसे देशों से जो एक-दूसरे के सबसे बड़े दुश्मन है लेकिन वैश्विक महामारी में साथ मिल कर मानवता के लिए काम कर रहे है तुर्की और ग्रीस देशों के बीच फैला तनाव किसी से छुपा नहीं है लेकिन विश्व को कोरोना से बचाने के लिए मतभेद भुला कर सभी वैज्ञानिक एक हो गए है.

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