शिक्षकों और गेस्ट टीचरों की स्थायी नियुक्ति मई 2019 तक करे सरकार-हाईकोर्ट
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सन्तोषसिंह नेगी /   उत्तराखण्ड हाई कोर्ट ने प्रदेश  भर के सरकारी स्कूलो में चल रहे शिक्षकों की कमी को लेकर कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खण्डपीठ ने सरकार को आदेश दिए है कि शिक्षको की स्थायी नियुक्ति मई 2019 तक करे । खण्डपीठ ने छात्रो के भविष्य को देखते हुए सरकार को यह भी निर्देश दिए है कि वह  आठ सप्ताह के भीतर गेस्ट टीचरो की वेकल्पिक व्यव्स्था करे।

गेस्ट टीचरों की दुबारा भर्ती नए सिरे से जिला स्तर पर की होगी इसमें नए अभियर्थियों को भी मौका दिया जायेगा पूर्व से कार्यरत गेस्ट टीचरों को प्राथमिकता दी जायेगी। खण्डपीठ ने यह भी निर्देश दिए है कि जैसे जैसे अध्यापकों की भर्ती होगी उसी आधार पर गेस्ट टीचर  बहार होते रहेंगे। खण्डपीठ ने संघ लोक सेवा आयोग को यह भी निर्देश दिए है कि प्रवक्ताओं के 917 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को छः माह के भीतर पूर्ण करें। एलटी के 1214 पदों पर पूर्व से घोषित रिजल्ट और भर्ती प्रक्रिया को तीन माह के भीतर पूर्ण करने के आदेश दिए है।

खण्ड पीठ ने  एलटी के 906 पदों पर प्रमोशन चार माह के भीतर करने के आदेश दिए है । खण्डपीठ ने राज्य आंदोलनकारियों से मुक्त हुए 296 एलटी के  अध्यापको के पदों पर उत्तराखण्ड टेक्निकल एजुकेशन को निर्देश दिए है कि इनकी नियुक्ति सात सप्ताह के भीतर करे। खण्डपीठ ने सम्पूर्ण भर्ती प्रक्रिया मई 2019 तक पूर्ण करने के आदेश सरकार को दिए है ।मामले के अनुसार मासी अल्मोड़ा निवासी गोपाल दत्त ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है  कि प्रदेश की सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यव्स्था अध्यापकों की कमी के कारण चरमरा गयी है।

विद्यालयों में अध्यापकों की भारी कमी है छात्रो का भविष्य अन्धकारमय हो गया है जिस किसी विधालय में टीचर मौजूद है वहॉ बच्चों को विषय के अध्यापक नही हैं उनको दूसरे स्कूल में जाना पड़ रहा है या अपना पसंदीदा विषय छोड़ना पड़ रहा। याचिकाकर्ता ने यह भी प्रार्थना की थी कि जब तक स्थायी नियुक्तियाँ नही हो जाती तब तक वैकल्पिक व्यव्स्था की जाय क्योंकि सत्र को चले हुए चार माह का समय बीत चूका हैं।

वहीं गेस्ट टीचरो ने भी अपने कार्यकाल को बढ़ाने के लिए विशेष अपील दायर की थी। उनका कहना था कि उनका कार्यकाल कोर्ट के आदेशानुसार 31 मार्च को समाप्त हो गया है । खण्डपीठ ने उक्त मामलों की एक साथ सुनवाई करते हुए उक्त आदेश पारित किये है।

 

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