दिल्ली : चौ0 अनिल कुमार ने अरविन्द सरकार पर साधा निशाना

नई दिल्ली- दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि अरविंद सरकार, युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर और आजीविका पैदा करने के बजाय, जिनको कोविड-19 महामारी लॉकडाउन संकट के दौरान अपनी नौकरी गवानी पडी, अब दिल्ली सरकार नई आबकारी नीति के द्वारा उन बेरोजगारों का जीवन पूरी तरह से चकनाचूर करने का प्रयास कर रही है। दिल्ली सरकार द्वारा गठित एक समिति द्वारा आबकारी नीति के नए सुझाव यदि पूर्ण रुप से लागू किए जाते है, तो न केवल शराब पीने की कानूनी उम्र 25 से घटकर 21 तक हो जाएगी, और विभागीय स्टोरों पर साफ्ट शराब भी आसानी से उपलब्ध होगी और ड्राई डे के दिनों को घटाकर सिर्फ एक साल में तीन दिन करने की तैयारी है और राजधानी के 272 नगर निम वार्डों में प्रत्येक में तीन शराब की दुकाने की संख्या बढ़ाने के लिए, बार और रेस्तरां के समय में वृद्धि, और राजधानी में हर वार्ड में शराब की दुकानों को खोलने की तैयारी कर रही है।

(विडंबना यह है कि पिछले साल सितंबर में, जब कोविड-19 महामारी की अधिक बढ़ौतरी हो रही थी, तो शराब की दुकानों को फिर से खोलने के लिए उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। जिसमें आबकारी आयुक्त, शराब की कीमत व्यवस्था को सरल बनाने के उपाय, और कुप्रथा की जाँच, और शराब व्यापार में ड्यूटी की चोरी सहित, आबकारी राज्य के राजस्व के लिए उपाय सुझाने के लिए थे)।

चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि अरविंद सरकार की प्राथमिकता इस तथ्य से स्पष्ट होती है कि पिछले छह वर्षों में, उन्हांने 461 राशन की दुकानें बंद करके 420 से अधिक शराब की नई दुकाने खोली। उन्होंने कहा कि यह अरविंद सरकार द्वारा आम आदमी पार्टी के “वोट बैंक“ के लिए गरीबों को “मुफ्त बिजली और पानी“ की आपूर्ति के लिए लोगों से दोगुनी और तिगुनी राशि निकालने का एक चतुर तरीका है। उन्होंने कहा कि पिछले सात वर्षों में, दिल्ली सरकार ने शराब की बिक्री से करोड़ों की कमाई करके राजस्व में वृद्धि की है। उन्होंने कहा कि अरविंद के सत्ता में आते ही शराब की बिक्री से संबंधित नियमों में ढील दी गई और डिपार्टमेंटल स्टोर्स के कारपेट एरिया में वृद्धि की गई। उन्होंने कहा कि 2015-16 के बाद से, अरविंद सरकार आबकारी नीति को शिथिल करने से पहले लोगों से “सुझाव“ लेने के नाटक करने में लिप्त रहे है, जबकि सच्चाई यह है कि शायद ही कभी, नई आबकारी नीति में लोगों के सुझावों को शामिल किया गया हो।

चौ0 अनिल कुमार ने आरोप लगाया कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री अरविंद ने रेस्तरां संघों के प्रतिनिधियों के साथ एक गोपनीय बैठक की और आबकारी नीति को शिथिल बनाने के लिए रणनीति बनाई और आम लोगों, सामाजिक, धार्मिक और रेजीडेन्ट वेल्फेयर एसोसिएशनों के सुझावों पर ध्यान दिए बिना सरकार ने अधिक राजस्व उत्पन्न करने के लिए नई नीति आबकारी नीति को लागू कर दिया।

चौ0 अनिल कुमार ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री अरविंद ने तिलक नगर इलाके में शराब की दुकानों को बंद करने के लिए मोहल्ला सभा की मौजूदगी में एक बड़ा “ड्रामा“ किया था, जबकि यह आश्चर्य है कि मौहल्ला सभा में जिन दुकानों को बंद करने का फैसला किया वह दुकानें अभी भी चल रही हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के चुनाव घोषणापत्र में यह भी घोषणा की गई थी कि दिल्ली को “नशा मुक्ति“ (नशा मुक्त) बनाने के लिए, किसी भी क्षेत्र में नई शराब की दुकान खोलने से पहले लोगों से, विशेष रूप से महिलाओं से सलाह ली जाएगी, लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद का यह वादा भी दिल्लीवासियों को गुमराह करने वाला साबित हुआ और अब स्थानीय लोगों की आपत्ति को नजरअंदाज करके रिहायशी इलाकों में भी शराब की दुकानें खोली जा रही हैं।

चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि पिछले छह वर्षों में दिल्ली में शराब की आसान उपलब्धता अपराधों में बढ़ौत्तरी के मुख्य कारणों में से एक है और अगर शराब पीने की उम्र कम कर दी जाती है, तो बेरोजगारी के साथ-साथ अपराधों की संख्या में बढ़ौतरी होगा जिसके लिए अरविंद सरकार पूरी तरह जिम्मेदार होगी।

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