अपहरण में फिरौती लेने के बाद भी संजीत के हत्या मामले की जांच सीबीआई करेगी

मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ। कानपुर के संजीत यादव हत्याकांड में परिवार वालों की मांग पर यूपी सरकार ने सीबीआई से जांच की सिफारिश की है। इस मामले में प्रदेश सरकार ने पहले ही जिले के एएसपी,डीएसपी और थाने के इंस्पेक्टर समेत 6 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। पुलिस मुख्यालय के एडीजी बीपी जोगदंड को मामले की जांच सौंपी थी। बता दें कि 22 जून की रात लैब टेक्नीशियन संजीत नौबस्ता स्थित हॉस्पिटल से बर्रा पटेल चौक के पास स्थित पैथालॉजी में सैंपल देने के लिए निकला था। सैंपल देकर उसे घर जाना था लेकिन रास्ते से लापता हो गया।
गुमशुदगी दर्ज होने के बाद पुलिस ने जब संजीत की कॉल डिटेल निकलवाई तो पता चला कि संजीत की बात राहुल नामक एक युवक, एक युवती सहित कई अन्य लोगों से हुई थी। पिता चमनलाल ने राहुल के खिलाफ बेटे के अपहरण का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। 13 जुलाई को पिता ने पुलिस के कहने पर फिरौती के 30 लाख रुपए से भरा बैग भी अपहर्ताओं के कहने पर गुजैनी पुल से नीचे फेंक दिया था। इसके बावजूद अपहृत बेटा नहीं मिला। बाद में उसका शव मिला। पूरे मामले में पुलिस की हर इकाई फेल नजर आई। चाहे वह एसटीएफ हो स्वॉट, सर्विलांस या फिर मुखबिर तंत्र ही क्यों न रहा हो।

अपहरणकर्ताओं ने 29 जून से 13 जुलाई तक परिजनों को कुल 26 बार फोन किया इस दौरान न तो उनकी कॉल ट्रेस की जा सकी और न ही उनकी लोकेशन मिली। हालांकि पुलिस ने अपहरण कर्ताओं के मोबाइल रिचार्ज करने वाले दुकानदार को पकड़कर जरूर अपनी पीठ थपथपा ली लेकिन इससे ज्यादा पुलिस कुछ भी नहीं कर सकी। इस घटना के बाद कांग्रेस की महासचिव व यूपी की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा, पूर्व मुख्यमंत्री व सपा मुखिया अखिलेश यादव तथा पूर्व मुख्यमंत्री व बसपा सुप्रीमो मायावती समेत पूरा विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया था। इस संदर्भ में उपमुख्यमंत्री व कानपुर के प्ररभारी मंत्री केशव मौर्य ने दोका सामना को बताया कि पीड़ित परिवार की मांग पर राज्य सरकार ने इस प्रकरण में सीबीआई से जांच कराने का निर्णय किया है। सबकी मंशा के अनुरूप निष्पक्ष जांच के बाद वास्तविक अपराधी जल्द ही जेल में जायेंगे।

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