जमातियों को छुपाने वाला प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद निलंबित,पासपोर्ट जप्त

मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ। इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद को शुक्रवार को निलंबित कर दिया गया। रजिस्ट्रार प्रोफेसर एनके शुक्ल ने बताया कि कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर आरआर तिवारी ने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए उन्हें गिरफ्तारी की तारीख यानी 21 अप्रैल से निलंबित किया है। प्रोफेसर को विदेशी जमातियों को शरण देने के आरोप में जमातियों संग गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस से रिपोर्ट मिलने के बाद कुलपति ने कार्रवाई की। इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद पर विश्वविद्यालय प्रशासन के तेवर सख्त हैं।विवि प्रशासन ने पुलिस को पत्र लिखकर प्रोफेसर पर कार्रवाई की जानकारी मांगी है। इस संबंध में रजिस्ट्रार प्रोफेसर एनके शुक्ल ने शिवकुटी और शाहगंज पुलिस को पत्र लिखा है। गिरफ्तारी से पहले शिवकुटी पुलिस ने विश्वविद्यालय को बताया था कि प्रोफेसर की कभी भी गिरफ्तारी हो सकती है। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शैलेंद्र मिश्र ने बताया कि पुलिस से जानकारी मांगी गई है। उसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मो. शाहिद के ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआइएमआइएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी से करीबी रिश्ते हैैं। इसके साथ ही प्रशासन ने प्रोफेसर का पोसपोर्ट जब्त कर लिया है।पुलिस सूत्रों की मानें तो प्रयागराज में अवैध ढंग से विदेश ने आने वाले जमातियों को शहर की मस्जिद में रोकने की व्यवस्था कराने व खुद तब्लीगी जमात में शामिल होने की बात छिपाने वाले इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मो. शाहिद कानूनी शिकंजे में फंस गए हैैं।खुफिया तंत्र को चार-चार मोबाइल फोन रखने वाले प्रोफेसर के तीन बैंक  खातों की जानकारी हुई है। अब खुफिया विभाग इनके सभी बैंक खातों की पड़ताल कर सकता है। बैंक से इस बाबत कई सूचना मांगी गई है। अब खुफिया विभाग को बैंक के उत्तर का इंतजार है। इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय ने भी प्रोफेसर पर की गई हर प्रकार की कार्रवाई की जानकारी पुलिस से मांगी है, ताकि रिपोर्ट शासन स्तर पर भेजी जा सके। माना जा रहा है कि प्रोफेसर को बर्खास्त भी किया जा सकता है।

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