गांधी जी के विचारों में आज भी जीवन जीने की कला है
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आदिबद्री,सिमली, कर्णप्रयाग,गौचर  सहित आसपास के स्कूलों  में गांधी यात्रा दल के सदस्यों ने छात्र-छात्राओं से  कहा गांधी जी के विचारों में आज भी जीवन जीने की कला है
  सन्तोषसिंह नेगी / चमोली में सी बी भट्ट पर्यावरण एवं विकास केंद्र एवं जागो हिमालयन लोक कल्याण समिति द्वारा बद्रीनाथ के निकट सीमांत गांव माणा से शुरू की गई गांधी यात्रा सोमवार को चौथे दिन गैरसैण से शुरू कर घोलतिर के कोटकी गॉव पहुची, इस दौरान  स्कूलों में यात्रियों ने गांधी दर्शन एवं गांधी के विचारों को लेकर छात्रों से बातचीत की।
  सोमवार को यात्रा आदिबद्री,सिमली, कर्णप्रयाग,गौचर  सहित आसपास के स्कूलों में पूर्ण हुई। यात्रा दल के सदस्यों ने छात्र-छात्राओं से गांधीजी के विचारों को और उन्हें आज के परिपेक्ष में किस तरह प्रासंगिक है बताया । यात्रा दल के सदस्य मंगला कोठियाल ने बताया कि गांधी आज भी अपने विचारों के साथ जीवित है , उन्होंने स्कूली बच्चों से स्वच्छता, शिक्षा ,पर्यावरण को लेकर गांधी जी के विचारों से छात्रों को अवगत कराया। श्री सी पी भट्ट पर्यावरण एवं विकास केंद्र के  प्रबंध ट्रस्टी ओम प्रकाश भट्ट ने ट्रस्ट की गतिविधियां ,चिपको आंदोलन एवं गांधी युग के समय तात्कालिक पर्यावरणीय परिस्थितियां पर आज के संदर्भ में चर्चा की। जागो हिमालयन लोक के रमेश चंद्र थपलियाल ने कहा कि गांधी आज भी जीवन्त हैं ,उनका दर्शन आज भी प्रासंगिक है, इसमें आज भी जीवन की सारी समस्याओं का समाधान  है। उन्होंने छात्रों से अपने आस पास स्वच्छता एवं पर्यावरण को साफ रखने की अपील की। खंड शिक्षा अधिकारी   यू सी कैलखुरा ने छात्रों से कहा कि गाँधी जी के जीवन दर्शन ही है जो हमे 150 वर्षों बाद भी उनकी याद दिलाती है। राबाइंका की प्रधनाचार्य संगीता बिलज्वाण ने कहा कि यथार्थ मे जीवन जीने की कला है। इस दौरान बसंत शाह कुसुमाकर,प्रधानाध्यापिका किरण कठैत, राइका सिमली के प्रधनाचार्य एस एस कंडवाल, शिक्षक डिमरी,अनिता बहुगुणा, विनय सेमवाल, लष्मी नेगी आदि ने विचार रखे।

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