मर्द को भी दर्द होता है, पुरूष आयोग बनाने की उठी मांग
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राज कुमार शर्मा।  सेव इंडियन फैमिली फाउंडेशन की ओर से शनिवार को पुरुषों के खिलाफ होने वाली मानसिक प्रताडना के खिलाफ आवाज उठाते हुए जंतर-मंतर पर सत्याग्रह का आयोजन किया गया। जिसमें सैकडों की संख्या में लोग इकट्ठा हुए और अपनी आवाज  उठाई। पुरुषों के खिलाफ लगने वाले झूठे इल्जाम और उनकी आत्महत्याएं जैसे अनेकों ऐसे मुद्दे हैं जिसके खिलाफ ये संस्था काम कर रही है। आयोजन के दौरान ऐसे अनेकों लोग आए जो किसी ना किसी वजह से महिलाओं के द्वारा फँसाए गए या फिर परेशान किए गए हैं। इस आंदोलन में महिलाओं की भी भागीदारी रही, जो महिलाओं की तरह पुरुष आयोग बनाने की माँग कर रही हैं। इस संस्था की ही मेंमर बरखा त्रेहा का कहना है की भारत की महिलाएँ दूसरे देशों के मुकाबले काफी सक्षम हैं और उनके खिलाफ कोई कुछ कहता है तो वो जबाव देने में सक्षम हैं लेकिन सिर्फ महिलाओं के लिए करीब 49 कानून बने हुए हैं जिनका बहुत ही ज्यादा दुरुपयोग किया जाता है। महिलाओं को दिए गए इतने अधिकारों के चलते वह किसी पर झूठे बयान दे देती हैं और पुरुषों को आत्महत्या करने जैसे कदम उठाने पड़ते हैं।  अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वो कहती हैं की भारत दहेज के नाम पर लाखों लोगों को झूठा फँसाया जाता है और धारा 498 को खत्म किया जाना चाहिए और दहेज देने वालों को भी सजा मिलनी चाहिए।

इसी संगठन से जुड़े और महिला द्वारा पीड़ित  मनोज बताते हैं की उनके खिलाफ उनकी पत्नी ने झूठा इल्जाम लगाकर उन पर झूठा केस लगाया। महिलाओं को जो सुविधाएँ अपने मायके में नहींं मिल पातीं वो उसे अपने ससुराल में चाहती हैं  और ना मिलने पर धमकियाँ मिलती हैं। महिलाओं की मीड़िया से लेकर सरकार तक सुनती हैं लेकिन पुरुषों की कोई नहीं सुनता।

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