; स्टीनबीस ने भारत में ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी का मार्ग प्रशस्त किया
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स्टीनबीस ने भारत में ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी का मार्ग प्रशस्त किया

डी.एस.ई. तकनीक पर आधारित इलेक्ट्रोलाइजर्स के लिए असेंबली लाइन स्थापित करने के लिए वारी एनर्जीज लिमिटेड और डीएसई कंसोर्टियम जर्मनी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

नई दिल्ली, 30 सितंबर, 2022 : हाइड्रोजन, पुरातन ईंधन विकल्प के रूप में ऊर्जा के स्वच्छ स्रोत के रूप में विशाल क्षमता प्रदान करता है और अर्थव्यवस्था को कार्बनमुक्त करने में मदद कर सकता है। राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन के अनुसार, स्टीनबीस ने भारत में इलेक्ट्रोलाइजर्स और पॉलीसिलिकॉन उत्पादन इकाई के लिए बेहतर लाइन स्थापित करने हेतु साथ काम करने के लिए वारी एनेर्जी लिमिटेड औऱ डी.एस.ई. कंसोटिर्यम जर्मनी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

इस तालमेल के तहत भारत में कोयला अग्नि यंत्र को हरित ऊर्जा यंत्रों में बदलने के लिए सौर तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा अफ्रीका में सौर ऊर्जा यंत्र स्थापित करने के लिए सहयोग देंगे ।

इस अवसर पर बोलते हुए, श्री विनीत गोयल, सीईओ, स्टीनबीस सेंटर फॉर टैक्नोलॉजी ट्रांसफर इन इंडिया ने कहा कि स्टीनबीस भारत में हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। यह भारत में स्वच्छ ऊर्जा और सरकार के दृषिटकोण के अनुरूप उत्प्रेरक है। स्टीनबीस, वारी एनेर्जीस और डीएसई कंसोर्टियम के बीच समझौता ज्ञापन के अलावा, महात्मा रिन्युएबल एनेर्जी एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर टैक्नोलॉजी लिमिटेड, एमपीबीसीडीसी भी ग्रीन एनेर्जी स्थापित करने के लिए भागीदार के रूप में स्टीनबीस सेंटर फॉर टैक्नोलॉजी ट्रांसफर इंडिया के साथ समझौता ज्ञापन
(महाराष्ट्रा राज्य) में प्रवेश करने जा रही है।

Mr. Vineet Goyal, CEO – Steinbeis Centre for Technology Transfer in India (Steinbeis India)
Dr. Bertram Lohmueller, Director, Steinbeis GmbH Germany, and DSE Green Consortium, Germany.

इसके अलावा, श्री गोयल ने कहा कि स्टीनबीस वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), सरकार के साथ भी चर्चा कर रहे हैं। तांकि भारत में हरित हाइड्रोजन के लिए अनुसंधान एवं विकास, व्यावसायीकरण, कौशल निर्माण और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने में सहायता मिल सके।

ग्लासगो, यू.के में आयोजित सम्मेलन सी ओ पी के 26वें सत्र के तहत, भारत ने वर्ष 2005 के स्तर पर वर्ष 2030 तक अपने ग्रीनहाऊस उत्सर्जन को 45 फीसदी तक कम करने के लिए प्रतिबद्ध किया। इसके लिए स्वच्छ ऊर्जा के वैकल्पिक स्त्रोतों को खोजना जरूरी हो गया है। ऊर्जा का सबसे स्वच्छ रूप हाइड्रोजन होने के कारण बढ़ती ऊर्जा की जरूरतों को नवीनतम फोकस को पूरा करना विश्व भर के लिए अनिवार्य है।

ग्रीन हाइड्रोजन सौर या पवन जैसे नवीनीकरण ऊर्जा का उपयोग करके जल इलेक्ट्रोलिसिस को बढ़ावा दिया जाता है। सरकार ने हाल ही में केंद्रीय बजय 2021-22 में राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन का प्रस्ताव दिया था, जिससे देश के लिए हाइड्रोजन रोडमैप की शुरूआत हुई। इस मिशन की घोषणा इस साल अगस्त में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से की गई थी।

डॉ. बर्ट्राम लोहमुएलर, निदेशक, स्टीनबीस जीएमबीएच जर्मनी, और डीएसई ग्रीन कंसोर्टियम, जर्मनी ने कहा “रीन्यूएबल एनर्जी के भंडारण माध्यम के रूप में, शून्य उत्सर्जन वाले फ़्यूअल सेल वाहनों के लिए ईंधन के रूप में और उद्योग के लिए आधार ईंधन के रूप में यह टेक्नॉलजी काम करेगी। यह ऊर्जा और परिवहन परिवर्तन लाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस समझौते के माध्यम से, स्टीनबीस, वारी और डीएसई भारत में हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर्स के प्रौद्योगिकी विकास को आगे बढ़ाने के लिए अपनी ताकत का संयोजन करेंगे और सहयोग करेंगे।”

News Reporter
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