सिद्धार्थनगर : यहां की गौ शालाओं का हाल बद से बदतर

धर्मवीर गुप्ता

प्रदेश के मुख्यमंत्री भले की गौ शालाओं को लेकर गंभीर हो लेकिन उनके गम्भीरता का कितना असर गौ शालाओं में है इसकी हकीकत देखनी हो तो सिद्धार्थनगर जिले के गौ शालाओं में आइए यहां आप जो देखेंगे उसे देख कर यही कहेंगे कि इस जिले में गौ शालाओं की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है वो अधिकारी और कर्मचारी सिर्फ मुख्यमंत्री जी के बातों को सुनते है और फिर भूल जाते है शायद तभी तो यहां की गौ शालाओं का हाल बद से बदतर है इस कड़ाके की ठंड में भी।

हम आपको दिखा रहे है जिला मुख्यालय के महरिया की गौ शाला का हाल यहाँ कड़ाके की ठंड में भी गौवंशीय पशुओं के लिए न तो कही अलाव है और न ही जैकेट ही है। सबसे बड़ी बात तो यहाँ ये देखने को मिली कि जिन गौवंशीय पशुओं को यहां रखा गया है उनके मरने से पहले ही कब्रे खोदकर रखी गयी है और जिंदा गौवंशीय के मरने का इंतजार किया जा रहा है।यहां मौजूद पशु चरवाहे का कहना है हर तीसरे चौथे दिन 1गौवंशीय पशु की मौत हो ही जाती है तो इसीलिए पहले से कब्र खोदकर रखा जाता है।कब्र में जिन गौवंशीय पशुओं को मिट्टी डालकर मरने के बाद ढक दिया गया है वो भी कब्र से बाहर दिखाई दे रही है।

अब जब जिला मुख्यालय के करीब की गौशालाओ का यह हाल है तो आप खुद ही अंदाजा लगा सकते है उन गौ शालाओं के बारे में जो जिला मुख्यालय से दूर ग्रामीण इलाकों में बनाये गये है।इन गौ शालाओं में एक बड़ी समस्या और भी देखने को मिल रही है कि जिन लोगो को इन गौवंशीय पशुओं के देखभाल के लिए रखा गया है उनको 9 महीने से मानदेय भी नही दिया गया है।ऐसे में आखिर गौशालाओं की बदहाली के लिये कौन जिम्मेदार है ये बड़ा सवाल है।वही जिम्मेदार अधिकारी गौशालाओ में व्यवस्था चाक चौबंद होने का दावा करते दिख रहे है।

Leave a Reply