श्रीदेव सुमन की पुण्यतिथि पर गोदली इन्टर कालेज में वृक्षारोपण

सन्तोषसिंह नेगी/ चमोली: के पोखरी ब्लाक में राजकीय इन्टर कालेज गोदली में  धनसिंह घारिया की सयुंक्त पहल से छात्र -छात्राओं ने श्रीदेव सुमन की पुण्यतिथि पर वृक्ष रोपण किया। जिसमे 500 से अधिक प्रजाति के पौधौ का रोपण किया गया श्रीदेव के अन्तिम शब्द को यादकर छात्र छात्राओं व शिक्षकों ने वृक्षारोपण किया “तुम मुझे ताेड़ सकते हाे , माेड़ नहीं सकते”

 

ये पंक्तियां उस वीर की उस समय की हैं जब उसे टिहरी कारावास में अंग्रेजो के द्वारा घाेर यातनांए दी जा रही थी। उस समय ये वीर टिहरी राज्य के नागरिक अधिकाराें के लिए सामंती राजशासन के खिलाफ लड़ रहे थे और वह इन जंजीराे से प्रजा काे स्वतन्त्र कराना चाहते थे। इसी का विराेध करते हुए श्रीदेव सुमन 25 जुलाई 1944 काे 84 दिन की भूख हड़ताल के बाद वीरंगति काे प्राप्त हुए। समय- समय पर समाज काे नई दिशा दी।

 

गुरूवार  को राजकीय इन्टर कालेज के छात्र -छात्राओं वह शिक्षकों ने वृक्षारोपण में बुराश बांज रिढ डेकन देवदार सहित विभिन्न प्रजातियों के वृक्षों का रोपण किया गया। इस मौके पर प्रधानाचार्य विक्रम प्रजापति ने कहा श्रीदेव सुमन ने इस धरती को बचाने के लिए जो त्याग किया वह सभी के लिए एक सीख है इसलिए छात्र छात्राओं में देश समाज व प्रकृति के प्रति प्रेम की भावना होनी चाहिए।

 

जिससे समाज का सर्वांगीण विकास हो सके पर्यावरण सन्तुलन बनाने के लिए जो पौधों का रोपण किये गये है। हम सभी की जिम्मेदारी बनती है कि इन पौधौ को संवारने की जिससे इसका लाभ सम्पूर्ण समाज को मिल सके। 

 

 कार्यक्रम के संयोजक  पेड़ वाले गुरु के नाम से विख्यात धनसिंह घरिया ने कहा हम सब का कर्तव्य है प्रकृति के साथ सन्तुलन बनाना है तो पेड़ो के रोपण के साथ इनकी देखभाल करना एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य भी है उन्होंने कहा मुझे  पेड़ लगाने की प्रेरणा गौरा देवी, चण्डी प्रसाद भट्ट से मिली है।

 

 समस्त शिक्षकों ने छात्र छात्राओं से कहा पर्यावरण संरक्षण जागरूकता में छात्रों की अहम भूमिका होती है। वृक्ष रोपण के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए जनसमूह को जागरूक करना प्रतेक छात्र-छात्राओं का कर्तव्य है। इस अवसर पर प्रदीप विष्ट, केशव नौटियाल, मनबरसिंह नेगी, प्रदीप विष्ट,धर्मेन्द्र पंवार, बलवेन्द्र, रचित चौहान      नवीनसिंह, रूपचन्द्र शैलानी, शंकुतला चौहान, रमेशचंद्र , अमित किमोटी, कोटनाला, चैतसिंह आदि मौजूद थे।

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