; बापू स्नातकोत्तर महाविद्यालय पीपीगंज,में पर्यावरण पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी
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बापू स्नातकोत्तर महाविद्यालय पीपीगंज,में पर्यावरण पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

भारतीय सामाजिक विज्ञान शोध परिषद,नई दिल्ली के तत्वाधान में भूगोल विभाग,बापू स्नातकोत्तर महाविद्यालय पीपीगंज,गोरखपुर द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में के समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर वनस्पति विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर आर ०पी०शुक्ला ने अपने समापन अभिभाषण में यह बताया कि पर्यावरण और मानव का अंतर्संबंध इस पारिस्थितिकी तंत्र में इस प्रकार है कि उनका विकास  एक दूसरे के पूरक के रूप में किया जा सकता है क्योंकि यदि मानव का विकास होगा तो इस शर्त पर कि पर्यावरण समृद्ध जिससे पृथ्वी के निर्माण से आज तक प्रकृति और मानव में जो सम विकास की अवधारणा मौजूद है वह जीवित रहे।

प्रकृति कुछ भी अपशिष्ट नहीं देती वह अपशिष्ट ओं को अपने में समाहित कर देती है लेकिन मानव अपने विकास के धुंध में उन अपशिष्ट को बढ़ाते जा है जो संकट का रूप धारण कर लेती है।कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में बोल रहे हैं दीन दयाल उपाध्याय पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शिव शंकर यह बताया कि पर्यावरण के अनयन में मानव की भूमिका सर्वाधिक है क्योंकि वह विकास इस प्रकार करता है कि पर्यावरण का विनाश होता जा रहा है।वह तीब्र विकास बढ़ाने के कारण संभव हो पाता है उसके निर्माण के लिए मानव को अभी सचेत होना पड़ेगा नहीं तो आधुनिक मानव इतना शक्तिशाली नहीं है कि प्रकृति के आगे वह लड़ सकेगा माल्थस के अवधारणा को बताते हुए उसने कहा कि एक दिन प्रकृति स्वतः ही अपने विनाश का बदला लेगी और सारी चीजें व्यवस्थित हो जाएंगी लेकिन  लेकिन उसमें मानव को काफी कष्ट होगा ।

प्रोफेसर जे०एन०पांडेय ने अपने उद्बोधन में यह कहा कि भारतीय संस्कृत के बगैर विकास संभव नहीं है इसलिए आवश्यक है कि भारतीय संस्कृत के अनुसार ही विकास किया जाए।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हैं दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर पी०आर०चौहान ने अपने उद्बोधन में या बताया कि यदि विकसित राष्ट्र जितने कार्बन का उत्सर्जन करते हैं या पर्यावरण को क्षति पहुंचाते हैं उस अनुरूप विकासशील देश उनकी बराबरी कर लें उसके बाद ही अपने उत्सर्जन को बंद करेंगे साथ उन्होंने कहा पर्यावरण और मानव के अंतर्संबंध को सम विकास की अवधारणा पर लाने के लिए यह आवश्यक है कि जितना हम पर्यावरण का उपभोग करें उतना उसको पुनर्जीवित करने का भी प्रयास करें इस अवसर पर विभिन्न महाविद्यालयों से आए हुए प्रतिभागी अतिथि उपस्थित थे जिसमें डॉ अरविंद कुमार सिंह,डा०नरेंद्र कुमार शर्मा,डा०अखिलेश तिवारी,डॉ कमलेश मौर्य,डॉ उमेश कुमार प्रसाद, डॉ विजय कुमार चौधरी उपस्थित रहे।कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक डा० प्रमोद कुमार ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ सूरज कुमार मिश्रा ने किया।

अतिथियों का स्वागत उद्बोधन संस्था के प्राचार्य डॉक्टर श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर स्थानीय गणमान्य व्यक्ति छात्र-छात्राएं शिक्षक कर्मचारी गण एवं प्रतिभागी गण उपस्थित रहे।

News Reporter
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