NGT और RERA के नियमों को ताक पर रखकर बन रही “केशव ग्रीन सिटी” का पर्दाफाश
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सीतापुर। सीतापुर में नियमों को ताक पर रखकर बन रही केशव ग्रीन सिटी बीते 5 वर्षों से बन रही है और इसके मालिक मुकेश अग्रवाल द्वारा सीतापुर की इकलौती नदी सरायन नदी के अस्तित्व को खत्म किया जा रहा है साथ ही यह कॉलोनी विनियमित क्षेत्र में आती है इसमें कमर्शियल नक्शे पास करके आवासीय घोषित करके करोड़ों रुपए में बेचा गया है। आपको बताना चाहते हैं कि सीतापुर शाहजहाँपुर हाईवे पर बन रही केशव ग्रीन सिटी में 132000, 220 केवी 33000 केवी की हाई वोल्टेज लाइन के नीचे बच्चों के पार्क पर भी मकान बना दिए गए जिस पर बिजली विभाग ने इन्हें नोटिस भी जारी किया है और पार्क हटाने के निर्देश भी दे दिए हैं इस केशव ग्रीन सिटी का ना तो कोई रजिस्ट्रेशन रेरा में है और ना ही पोलूशन एनजीटी दमकल आदि विभागों से एनओसी प्राप्त है और लगातार नदी नालों को पाटकर कॉलोनी बनाई जा रही है जिस पर जिलाधिकारी ने आदेश जारी किया है कि पूरी कॉलोनी की जांच की जाए अब जब कॉलोनी की जांच हो रही है। वही लोगों का कहना है कि केशव ग्रीन सिटी के मालिक भू-माफिया मुकेश अग्रवाल अपनी राजनेताओं के पहुँच के चलते इस अनियमितताओं के बावजूद किसी प्रकार की विभागीय जाँच अथवा कार्यवाई से बच जाता है।

यही नहीं केशव ग्रीन सिटी की  इस खबर को कवर करने गए पत्रकारों के ऊपर सपा सरकार के कार्यकाल में में 386 का मुकदमा फर्जी दर्ज कराया गया और उसके बाद जब हिंदुस्तान अखबार के ब्यूरो चीफ को भी सोशल मीडिया पर बदनाम किया गया। बताया जा रहा है कि केशव ग्रीन सिटी सीतापुर में सैकड़ों बीघा जमीन पर अवैध रुप से बनाई गई है जिसमें सीतापुर के वरिष्ठ पत्रकारों और टीवी चैनल के पत्रकारों का संरक्षण प्राप्त है वहां अन्य पत्रकार जो भी इस ग्रीन सिटी की खबर की कवरेज करता है उसके ऊपर फ़जी आरोप लगाकर पुलिस के द्वारा परेशान कराया जाता है।

फिलहाल पत्रकार सुधांशु पुरी के द्वारा इस बड़ी अनियमितता का खुलासा होने के बाद सीतापुर जिलाधिकारी ने जाँच के आदेश दे दिए हैं और जल्द ही रेरा और राजस्व विभाग की टीमें इस काॅलोनी की जाँच के लिए आ रही हैं। वहीं पत्रकार सुधांशु पुरी पर बौखलाए केशव ग्रीन सिटी के मालिक मुकेश अग्रवाल ने 1 लाख रुपए मांगने का झूठा आरोप लगाया और बाद में खुद उनके घर जाकर हाथ जोड़कर माफी भी मांग रहा है। वहीं जब हमने इस मामले पर जब हमने सुधांशु पुरी से बात की तो उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी ने जब पैसे मांगने का प्रमाण मांगा तो यह प्रमाण देने में असमर्थ हुए और खबर चलने के बाद जब कार्रवाई के आदेश हुए हैं तो फर्जी एप्लीकेशन बनाकर मुझे पुलिस कार्यवाई का डर दिखाया गया। सुधाशु पुरी ने बताया है कि वो खुद इस मामले की शिकायत एनजीटी यानि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में करेंगे।

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