“जनस्वर“ दिवस के रूप में मनाई गई जनेश्वर मिश्र की जयंती
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समाजवादी चिंतक जनेश्वर मिश्र की जयंती समाजवादी बौद्धिक सभा द्वारा “जनस्वर“ दिवस के रूप में मनाया गया। इस उपलक्ष्य अरूणांचल प्रदेश और मिजोरम छोड़कर सभी राज्यों में “जनतंत्र व जनस्वर“ पर परिचर्चाओं का आयोजन हुआ। लखनऊ में 7/8, विक्रमादित्य मार्ग पर आयोजित परिचर्चा में बोलते हुए वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि जनस्वर की उपेक्षा जनतंत्र कमजोर होता है। समाजवादी चिन्तक जनेश्वर अपने दौर के प्रबल व प्रतिबद्ध जनस्वर थे। उन्होंने हमें सिखाया कि गरीबों व कमजोरों के आंसू पोंछना ही वास्तिविक समाजवाद है। जनेश्वर जी शिविरों और सभाओं में बोलते तो सभी गंभीरतापूर्वक उन्हें सुनते थे। वे छोटी-छोटी घटनाओं व उदाहरणों से समाजवाद के गूढ़ दर्शन को समझा देते थे। मधुलिमये के बाद वे लोहिया द्वारा प्रतिपादित समाजवाद के सबसे बड़े व्याख्याता थे। वे अपने आप में समाजवाद के चलते फिरते विश्वविद्यालय थे। छोटे लोहिया कई बार केन्द्रीय मंत्री व सांसद रहे। पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह व कद्दावर केन्द्रीय मंत्री रहे के.डी. मालवीय जैसे दिग्गजों को चुनाव में हराया लेकिन सत्ता एवं चुनावी राजनीति की विकृतियों से दूर रहे। उनके जाने के बाद समाजवादी शिविरों व प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लगना बंद हो गया। समाजवादी पार्टी वैचारिक रूप से कमजोर हुई है। उनके उनके अधूरे कार्यों को पूरा करने की जिम्मेदारी हम लोगों की है।

समाजवादी चिन्तक व बौद्धिक सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक मिश्र ने कहा कि जनेश्वर जी की दो चिन्तायें आज भी समीचीन हैं, जनस्वर का कमजोर होना और समाजवादी आन्दोलन में गैर समाजवादियों का बढ़ता वर्चस्व जो सोच-समझ व रहन-सहन से सामंती व पूंजीवादी हैं, आज हमें छोटे लोहिया की पवित्र जयंती के दिन संकल्प लेना होगा कि जनता की आवाज और समाजवादी आन्दोलन की चमक को कमजोर नहीं पड़ने देंगे और यथासम्भव समाजवाद के बाहरी व आंतरिक शत्रुओं से सतत् संघर्ष जारी रखेंगे। यही लोहिया और छोटे लोहिया को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। जनेश्वर हिन्दी और जनभाषाओं के पक्षधर थे। उन्होंने भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता और हिन्दी को आधिकारिक दर्जा दिलाने की दिशा में उदासीनता के लिए केन्द्र सरकार की तीखी आलोचना करते हुए हमारे हस्ताक्षर अभियान की सराहना की थी। उनका मत था कि देश के सवालों पर लड़ना देश के हर नागरिक का कर्तव्य है, यह काम केवल सरकारो का नहीं है।

परिचर्चा में मजदूर नेता व जनेश्वर जी के करीबी आर.बी. शुक्ला, इंजी. अरविन्द यादव, दिनेश त्रिपाठी, प्रमोद कुमार सिंह “प्रमुख जी“समेत कई समाजवादियों व बुद्धिजीवियों ने विचार व्यक्त किये। हिमांचल में सुरेश वालिया, आंध्र प्रदेश में जमाल दरवेश, काश्मीर में मुजफ्फर खान, महाराष्ट्र में एडवोकेट दिनेश त्रिपाठी व आसिम खान, गोवा में मैजेनिस व मोहम्मद आजम, दिल्ली में नागेन्द्र दूबे, बिहार में जयप्रकाश यादव, तमिलनाडू में एम.मार्टण्डनम एवं केरल में बी.शंकरन के संयोजन में “जनस्वर दिवस“ मनाया गया। इस अवसर पर “जनस्वर जनेश्वर“ पुस्तक का वितरण किया गया ताकि नई पीढ़ी जनेश्वर जी के बहाने समाजवादी विचारधारा से अवगत हो सके।

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