बैजू फाइनेंस के साथ मिली नई पहचान

आज का वक्त ऐसा है कि हर महिला अपनी पहचान बनाना चाहती है। वो लोग जो शहर में रहते, जिनके पास हर सुविधा होती है, जिन्हें अच्छी शिक्षा मिलती है वो बड़ी आसानी से अपनी पहचान बना लेती हैं और वक्त आने पर खुद को साबित भी कर देती हैं। ऐसे कई उदाहरण हैं जहां पर महिलाओं को बोलबाला है , उनकी कठिन मेहनत से उनकी अपनी पहचान है।

लेकिन कुछ ऐसी भी महिलाएं होती है जो दिन-रात मेहनत करती हैं लेकिन पहचान नहीं बना पाती। ये महिलाएं मेहनत घरों में करती हैं, खेतों में करती है, और जीविकायापन के लिए छोटे छोटे काम करती हैं। ये वो महिलाएं है जो चाहती हैं पहचान बनाना लेकिन भौतिक सुख से दूर और आर्थिक तंगी की वजह से ये महिलाएं अपनी पहचान नहीं बना पाती।

बैजू फाइनेंस इन्हीं महिलाओं को आर्थिक सहयोग देता है। बैजू फाइनेंस छोटी-छोटी रकम देकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं । ये छोटी-छोटी रकम माइक्रो फाइनेंस कहे जाते हैं।

यहां पर ये जानना बेहद जरूरी है कि माइक्रो फाइनेंस होता क्या है और ये काम कैसे करता है ? ये जानने के लिए हमने बात कि बैजू फाइनेंस के CEO अतुल कुमार से-

Baiju फाइनेंस के सीईओ अतुल कुमार

अतुल क्या होता है माइक्रो फाइनेंस?

माइक्रो फाइनेंस आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब परिवार को ऋण,बीमा,बचत पेंशन जैसी सुविधाएं देती है। जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें।

कैसे काम करता है माइक्रो फाइनेंस ?

माइक्रो फाइनेंस किसी व्यवसाय को शुरू करने के लिये या चल रहे व्यवसाय को गति देने के लिये ऋण देती है।

कौन सी महिलाएं इससे लाभाविंत होती हैं ?

माइक्रो फाइनेंस का फायदा उन महिलाओं को मिलता है जो ग्रामीण या शहरी क्षेत्र से होती है। आरबीआई के गाइडलाइन्स से मुताबिक वैसी महिलाओं का समूह ही लोन को लेने के लिए योग्य होता है जिनकी सालान आय अगर शहर क्षेत्र से हैं तो १ लाख ८० हजार से कम होनी चाहिए और अगर महिला ग्रामीण क्षेत्र से हैँ तो १ लाख २० हजार से कम होनी चाहिए। यहां पर ये भी ध्यान में रखना होगा कि किसी भी महिला पर एक लाख से ज्यादा का लोन नहीं होना चाहिए। समूह की सदस्य को मिलने वाली लोन की राशि ३०,००० तक की होती है।

महिलाओं का चयन कैसे होता है ?

महिलाओँ के चयन के लिए Joint Liability Group का निर्माण किया जाता है। Joint Liability Group का Concept हमारे देश में 2014 में आया था। Joint Liability Group में 4-10 सदस्य बनाये जाते हैं। ये ऐसी महिलाएं होती है जो ऋण लेते समय एक-दूसरे की जिम्मेदारी लेती हैं। इन महिलाओं की आर्थिक स्थिति एक जैसी होती है। एक ही गांव की होती हैं। हालांकि ब्लड रिलेशेन नहीं होना चाहिए इसका भी खास ख्याल रखा जाता है। एक कम्यूनिटी की भी नहीं होनी चाहिए। लोन अवेल वैसी महिलाएं ही कर सकती है जो पहले से थोड़ा बहुत Earn कर रही हो और शादीशुदा हो। माइक्रो फाइनेंस लोन की खासियत ये है कि ये बिना Collateral के दी जाती है।

माइक्रोफाइनेंस की स्कीम से
आत्मनिर्भरता का संकल्प

इंटरेस्ट रेट क्या होता है ?

इंटरेस्ट रेट के लिए RBI की Guideline है , मसलन 24.75 से ज्यादा इंटरेस्ट रेट नहीं होना चाहिए। लोन के Ammount का 1% + 18% GST देना होता है। इसके साथ एक Insurance Premium भी लेने होता है।

लोन देना और वसूली कैसे होता है ?

लोन Disburse करने के लिए एक सेंटर बनाया जाता है। जहां पर ग्रुप के सभी मेंबर आते है। तीन चरण के बाद लोन Disburse होता हैः

A) Group Formation Process

B) Compulsary Group Training

C) Group Recognition Test

वहीं वसूली के लिए 15 दिनों का वक्त दिया जाता है। हर 15 दिन पर उसी सेंटर से वसूली होती है जिस सेंटर से लोन Disburse हुआ था। इसमें ग्रुप के सभी मेंमर का होना अनिवार्य होता है।

रिपोर्ट-सुप्रिया

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