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अटल इनोवेशन मिशन और विज्ञान प्रसार द्वारा अटल टिंकरिंग लैब तथा इंगेज विद साइंस के बीच सहयोग की घोषणा

नीति आयोग की मुख्य पहल अटल इनोवेशन मिशन (अटल नवप्रवर्तन मिशन – एआईएम) ने सोमवार को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के एक स्वायत्तशासी संगठन विज्ञान प्रसार के साथ सहयोग की घोषणा की। इसके तहत एआईएम के अटल टिंकरिंग लैब्स (एटीएल) और विज्ञान प्रसार के अभिनव अंतरक्रियाशील मंच इंगेज विद साइंस (ईडब्लूएस) के बीच सहयोगात्मक तालमेल स्थापित करेगा।

सहयोग के क्रम में ईडब्लूएस अपने यहां 9200 से अधिक एटीएल क्षमता से लैस स्कूलों को शामिल करेगा तथा उनके छात्रों, शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को अपनी समस्त अंतरक्रियाशीलता में संलग्न करेगा। इन गतिविधियों के तहत प्वॉइंट अर्जित करने होंगे, जिनके आधार पर प्रमाणपत्र और प्रोत्साहन प्रदान किया जायेगा, ताकि छात्र और शिक्षक विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग व गणित (एसटीईएम) के प्रति आकर्षित हो सकें।

 ‘आधुनिक नवाचारियों के रूप में भारत में दस लाख बच्चों को तैयार करने’ के दृष्टिकोण के तहत अटल इनोवेशन मिशन ने देशभर के स्कूलों में 9200 से अधिक अटल टिंकरिंग प्रयोगशालायें स्थापित की थीं। एटीएल का मुख्य उद्देश्य युवा मस्तिष्क में जिज्ञासा, रचनात्मकता और कल्पनाशीलता का पोषण करना है। साथ ही उनमें गवेशणात्मक मानसिकता, विश्लेषणात्मक सोच, हर चीज को सीखने की उत्सुकता, कंप्यूटर, आदि जैसे कौशल के विषय भी शामिल हैं।

एटीएल ऐसा कार्यस्थल है, जहां युवा मस्तिष्क अपने विचारों को आकार देंगे और खुद-काम-करके-सीखो प्रणाली से कौशल सीखेंगे। उन्हें एसटीईएम की अवधारणा को समझने के लिये भी लैस किया जायेगा।

इस सहयोग का स्वागत करते हुये अटल इनोवेशन मिशन के मिशन निदेशक डॉ. चिन्तन वैष्णव ने कहा, “एआईएम और विज्ञान प्रसार के बीच सहयोग दोनों संगठनों के लिये महान अवसर है, क्योंकि दोनों प्रौद्योगिकीय विकास के साथ तालमेल रखने के लिये हमारी शैक्षिक कार्यप्रणाली को उन्नत बनाने मे अहम भूमिका निभाते हैं। एटीएल के साथ इंगेज विद साइंस कार्यक्रम से एसटीईएम नवप्रवर्तन की संस्कृति फले-फूलेगी तथा वह युवा मन को ऐसा मंच उपलब्ध करायेगी, जहां वे प्रयोगात्मक शिक्षण हासिल करेंगे। इस शिक्षण में आविष्कार, नवाचार और सहयोगात्मक समस्या समाधान पर ध्यान दिया जायेगा, ताकि सीखने का ज्यादा से ज्यादा प्रभाव पड़े।”

इंगेज विद साइंस, इंडिया साइंस ओटीटी चैनल परियोजना का हिस्सा है और उसका उद्देश्य इंडिया साइंस (www.indiascience.in) पर एसटीएम वीडियो विषयवस्तु का प्रचार तथा उसे लोकप्रिय बनाना है। ईडब्लूएस ने 10 हजार से ज्यादा स्कूलों को अपने से जोड़ लिया है तथा वह स्कूलों के प्रधानाध्यपकों, शिक्षकों तथा छात्रों को ध्यान में रखकर नियमित गतिविधियां चला रहा है। इस समय ईडब्लूएस गतिविधियां हिन्दी और अंग्रेजी में उपलब्ध हैं। अन्य भारतीय भाषाओं तक इनका विस्तार करने की योजना है।

इस अवसर पर विज्ञान प्रसार के निदेशक डॉ. नकुल पाराशर ने कहा, “आज एसटीएम विषयवस्तु के उपभोक्ता अंतरक्रियाशीलता की मांग करते हैं। वे क्रियाशीलता का हिस्सा बनना चाहते हैं। इंगेज विद साइंस की अंतरक्रियाशीलता को इंडिया साइंस ओटीटी चैनल से जोड़कर विज्ञान प्रसार भारत का पहला अंतरक्रियाशील ओटीटी चैनल बनाने जा रहा है। और, अटल टिंकरिंग लैब के साथ यह सहयोग स्कूलों को एक-साथ लायेगा, ताकि एसटीईएम विषयवस्तु की उपयोगिता तथा अंतरक्रियाशीलता का बहुस्तरीय प्रभाव तैयार हो सके।”

कार्यक्रम में इंगेज विद साइंस के ब्रांड अम्बेसडर श्री शरमन जोशी भी उपस्थित थे।

News Reporter
पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना करियर बनाने वाली निकिता सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से ताल्लुक रखती हैं पिछले कुछ सालों से परिवार के साथ रांची में रह रहीं हैं और अब देश की राजधानी दिल्ली में अपनी सेवा दे रहीं हैं। नेशनल ब्रॉडकास्टिंग अकादमी से पत्रकारिता में स्नातक करने के बाद निकिता ने काफी समय तक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के न्यूज़ पोर्टल्स में काम किया। उन्होंने अपने कैरियर में रिपोर्टिंग से लेकर एंकरिंग के साथ-साथ वॉइस ओवर में भी तजुर्बा हासिल किया। वर्त्तमान में नमामि भारत वेब चैनल में कार्यरत हैं। बदलती देश कि राजनीती, प्रशासन और अर्थव्यवस्था में निकिता की विशेष रुचि रही है इसीलिए पत्रकारिता की शुरुआत से ही आम जन मानस को प्रभावित करने वाली खबरों पर पैनी नज़र रखती आ रही हैं। बेबाकी से लिखने के साथ-साथ खाने पीने का अच्छा शौक है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ में योगदान जारी है।
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