राजनीतिक नेतृत्व का था सर्जिकल स्ट्राइक का फैसला- लेफ्टिनेंट जनरल

नितिन उपाध्याय/रवि..सितंबर 2016 में हुई सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी वीडियो सामने आने के बाद बयानबाजी का दौर फिर से शुरू हो गया है।अभी दो दिन पहले आयी सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी वीडियो के बाद विपक्ष ने मोदी सरकार पर चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया है।लेकिन इस बयानबाजी के बीच सर्जिकल स्ट्राइक की निगरानी करने वाले अफसर पूर्वी नॉर्दर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल रिटायर्ड डीएस हुड्डा ने कहा है कि ये फैसला पूरी तरह से राजनीतिक नेतृत्व का था और सेना इस फैसले को लेकर काफी सहमत नजर आ रही थी।मेजर का कहना है कि सेना भी पाकिस्तान के खिलाफ कुछ करना चाहती थी।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस की तरफ से सर्जिकल स्ट्राइक की वीडियो पर सवाल खड़े किये थे, कांग्रेस की तरफ से वीडियो की टाइमिंग पर सवाल खड़े किए गए थे।लेकिन विपक्ष की तरफ से हो रही लगातार बयानबाजी का जवाब देने के लिए अब मोदी नेतृत्व ने पलटवार किया है।केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस लगातार सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठा रही है. इससे पाकिस्तानी आतंकवादियों को खुशी मिल रही होगी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सर्जिकल स्ट्राइक को खून की दलाली कहा था. उनकी माता सोनिया गांधी ने इससे पहले मौत के सौदागर जैसे शब्दों का प्रयोग कर चुकी हैं।इससे पहले गुलाम नबी भी भारतीय सेना के बारे में कह चुके है कि भारतीय सेना आतंकवादियों को कम मारती है वरन् नागरिकों को ज्यादा मारती है।

बता दें कि भारतीय सेना ने साल 2016 में उड़ी में मारे गए 18 भारतीयों की शहादत का बदला लेने के लिए पाक की सीमा में करीब 3 किमी. तक जाकर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था।जिसके बाद वायरल हुए सर्जिकल वीडियो पर कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों ने सेना के इस कार्य पर सवाल खड़े किए थे लेकिन अब दूसरी वीडियो सामने आने पर फिर से बयानबाजी का दौर शुरू हो चुका है।

 

 

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