कोविड से मौत के दिल्ली नगर निगम के आंकड़े अरविन्द सरकार की पोल खोलते है-हरी शंकर गुप्ता

नई दिल्ली कोविड-19 महामारी के बढ़ते प्रकोप पर नियंत्रण पाने में पूर्णतः विफल दिल्ली की अरविन्द सरकार की नाकामियों को उजागर करने की श्रंखला में दिल्ली कांग्रेस द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए पूर्व विधायक हरी शंकर गुप्ता ने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार आंकड़े छुपाकर लीपापोती में लगी है लेकिन कोविड-19 से हो रही लगातार मौतों के आंकड़े दिल्ली सरकार की पोल खो रहे है और दिल्ली सरकार का सच सामने आ रहा है और कोविड पर नियंत्रण न करने का खामियाजा आज दिल्ली की जनता भुगत रही है। गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार के सीरो सर्वे में संक्रमण के कम्यूनिटी ट्रांसमीशन होने की खबरे सामने आई, लेकिन अरविन्द सरकार ने अधिकारिक तौर पर इसे सिरे से नकार दिया गया।


संवाददाताओं को सम्बोधित करते हुए हरी शंकर गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में प्रतिदिन 380 शवां के अंतिम संस्कार की क्षमता है और हैल्थ बुलैटिन के अनुसार औसतन 100 कोविड मरीजों की मृत्यु के आंकडे बताए जा रहे है। सच्चाई में शमशान घाट मृतकों से भरे पड़े है और रात भर चिताऐं जल रही है जिससे हाई कोर्ट भी चिंता के कारण संज्ञान लेने पर दिल्ली सरकार के अफसरों ने इस डरावनी स्थिति को देखते हुए शमशानों को दौरा किया, और सरकारी आंकडे़ हकीकत कहीं दूर है। उन्होंने कहा कि नगर निगम द्वारा 23 नवम्बर तक 10,318 शवों को कोविड प्रोटोकोल के तहत अंतिम संस्कार किया गया परंतु दिल्ली सरकार की रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ 8512 लोगों की मौत हुई है। आंकड़ों में विरोधाभास दिल्ली सरकार की मंशा को साफ जाहिर करता है, जबकि दिल्ली कांग्रेस शुरु से ही सरकार पर कोविड मरीजों की मौतों के आंकड़ो को छिपाने का आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि मई माह तक अस्पताल के हिसाब से मृतकों के आंकड़े दिखाऐ जाते थे जिसे हैल्थ बुलैटिन से हटा दिया गया ताकि आंकड़ों में आसानी से हेर-फेर हो सके। उन्होंने कहा कि आईसीएमआर द्वारा जारी गाईड लाइन्स को वेबसाईट पर नही डालने ओर टेस्टिंग के तरीके को गलत इस्तेमाल करने पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाई।


हरी शंकर गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में कोविड की वर्तमान स्थिति के मुताबिक 2 लाख टेस्ट की जरुरत है जबकि 83 प्रतिशत टेस्ट कम किए जा रहे है, और 18 जून के बाद से आरटी-पीसीआर टेस्ट की तुलना में रेपिड एंटीजेन टेस्ट अधिक करके संक्रमितों की वास्तविक संख्या को भी छिपाया जा रहा है और होम आइसोलेट मरीजां की संख्या में मनचाहे ढंग से छेडछाड़ करके रिकवरी रेट को अधिक दिखा कोविड पर नियंत्रण की झूठी घोषणा कर रहे है। उन्होंने कहा कि टेस्ट की संख्या को 14 जुलाई के हैल्थ बुलैटिन में प्रकाशित एक दिन पहले की संख्या को 7.9 से घटाकर 6.9 लाख कर दिया। दिल्ली में आरटी-पीसीआर टेस्ट की लंम्बित संख्या को भी छिपाया जाता रहा।


उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार 2 जून को एक ऐप जारी करके दावा किया कि इसके जरिए खाली बेड,आईसीयू व वैंटिलेटर की वास्तविक संख्या बताऐगी, परंतु ऐप अस्पतालों में खाली बेड होने के बावजूद भी मरीजों को बेड उपलब्ध नही किए जा रहे हे। उन्होंने कहा कि पिछले 9 महीनों में अरविन्द सरकार के स्वास्थ्य बुलैटिन के 10 से अधिक फारमेट जारी करने का मुख्य मकसद कोविड आंकड़ो को छुपाना और उनमें छेड़छाड़ करके प्रारुप तैयार करना था।

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