अफ़ग़ान महिलाओं को डराने वाला शरिया क़ानून असल में क्या है?

रविवार को अफगानिस्तान में तालिबान युग लौट आया. सबसे बड़ा सियासी उलटफेर तब हुआ जब सत्ता परिवर्तन को हरी झंडी दिखा दी गई. एक तरफ अशरफ गनी देश छोड़कर ताजिकिस्तान चले गए, वहीं दूसरी तरफ तालिबानी नेता अहमद अली जलाली को अंतरिम सरकार का चीफ बनाने पर सहमति बन गई. अब तालिबान के राज में अफगानिस्तान के कई इलाकों पर तो कब्जा हो ही रहा है, महिलाएं भी अपनी सुरक्षा को लेकर डरी हुई हैं. तालिबान की जैसी विचारधारा रही है. उसे देखते हुए सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब अफगानिस्तान में महिलाओं को काम और पढ़ाई करने दी जाएगी या नहीं? क्या अफगानिस्तान में महिलाएं-लड़कियां स्कूल जा पाएंगी या नहीं?

आखिर क्या है शरिया कानून?

शरिया इस्लाम (Islam) की कानूनी व्यवस्था है. इसे इस्लाम की पवित्र किताब कुरान, सुन्नाह और हदीस से लिया गया है. शरिया का शाब्दिक अर्थ, ‘पानी का एक स्पष्ट और व्यवस्थित रास्ता’ होता है. शरिया कानून के जरिए सभी मुस्लिमों को जीने का एक रास्ता दिखाया जाता है. इसमें उन्हें इस्लाम में बताई गई चीजों का पालन करना होता है, मसलन नमाज पढ़ना, रोजा रखना और गरीबों को दान करना शामिल है. इसका उद्देश्य मुसलमानों को यह समझने में मदद करना है कि उन्हें अपने जीवन के हर पहलू को ऊपर वाले की इच्छा के अनुसार कैसे जीना चाहिए.

शरिया का व्यवहार में क्या मतलब है?

शरिया एक मुसलमान को दैनिक जीवन के हर पहलू से अवगत कराता है. उदाहरण के लिए, एक मुस्लिम को उसके सहयोगी काम के बाद पब में आने के लिए बुलाते हैं. मगर अब वो ये सोच रहा है कि उसे जाना चाहिए या नहीं. ऐसे में वो मुस्लिम व्यक्ति सलाह के लिए शरिया के विद्वान के पास जा सकता है, ताकि ये सुनिश्चित हो सके कि वे अपने धर्म के कानूनी ढांचे के भीतर कार्य कर पाए. दैनिक जीवन के अन्य क्षेत्रों में जहां मुसलमान मार्गदर्शन के लिए शरिया कानून की ओर रुख कर सकते हैं, उनमें पारिवारिक कानून, वित्त और व्यवसाय शामिल हैं.

इस कानून की कुछ कठोर सजा क्या है?

शरिया कानून अपराधों को दो कैटेगरी में बांटता है. इसमें पहला ‘हद’ अपराध है, जो गंभीर अपराध है और इसमें सजा दी जाती है. दूसरा ‘तजीर’ अपराध है, जहां सजा देने के फैसले को जज के विवेक पर छोड़ दिया जाता है. ‘हद’ अपराधों में चोरी शामिल हैं. ऐसा करने पर अपराधी के हाथ काट दिए जाते हैं. वहीं, यौन संबंधी अपराधों के लिए कठोर दंड दिया जाता है, जिसमें पत्थर मारकर मौत की सजा देना शामिल है. कुछ इस्लामी संगठनों ने तर्क दिया है कि ‘हद’ अपराधों के लिए दंड मांगने पर इसके नियमों में सुरक्षा के कई उपाय तय हैं. यही वजह है कि सजा से पहले ठोस सबूत की जरूरत होती है.

शरिया कानून के तहत कैसे सुनाए जाते हैं फैसले?

किसी भी कानूनी प्रणाली की तरह शरिया कानून भी जटिल है और इसका अभ्यास पूरी तरह से विशेषज्ञों की गुणवत्ता और ट्रेनिंग पर निर्भर करता है. इस्लामी जज मार्गदर्शन और निर्णय जारी करते हैं. मार्गदर्शन जिसे औपचारिक कानूनी निर्णय माना जाता है, उसे फतवा कहा जाता है. शरिया कानून के पांच अलग-अलग स्कूल हैं. चार सुन्नी सिद्धांत हैं- हनबली, मलिकी, शफी और हनफी और एक शिया सिद्धांत है जिसे शिया जाफरी कहा जाता है. पांचों सिद्धांत, इस बात में एक-दूसरे से अलग हैं कि वे उन ग्रंथों की व्याख्या कैसे करते हैं जिनसे शरिया कानून निकला है.

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