पक्षियों के प्रति जागरुकता के लिए पिंजरों में कैद पंक्षियों की तरह PETA के लोग करेंगे प्रदर्शन
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लखनऊ –स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले ‘पीपल फॉर द एिथकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल (पीटा) इंडिया’ के समर्थक हजरतगंज में गांधी जी की प्रतिमा के सामने नीले आकाश वाले बैकग्राउंड के साथ, पिंजरों में बंद पक्षियों की मुद्रा में प्रदर्शन करेंगे ताकि आते जाते लोग उसे इस अवस्था में देखकर एहसास कर सकें की पंछियों को कैद कर उनसे उड़ने की आज़ादी छीन लेना, क्रूरता है। लोगों तक सही संदेश पहुँचाने के लिए पीटा इंडिया के समर्थकों के हाथ में “पंछी पिंजरो में कैद करने के लिए नही हैं, उन्हें आज़ाद उड़ने दो लिखे नारों वाले बोर्ड भी होगें।

समय : मंगलवार, 14 अगस्त दोपहर 12 बजे से गांधी प्रतिमा, हजरतगंज, लखनऊ, में पीटा का प्रदर्शन शुरु होगा। पीटा इंडिया की कैंपेन कोआॅर्डिनेटर ‘आयुषी शर्मा’ कहती हैं–“खूबसूरत पछी अपने पंखों पर हवा महसूस करने के लिए होते है, पिंजरों में कैद  रहने के लिए नही।

पूरा भारत आज़ादी का जश्न मना रहा है इसिलए पीटा इंडिया लखनऊ के निवासियों से अनुरोध करता है कि लोग पंछियों को कैद करने के बजाए एक जोड़ी दूरबीन खरीदें और उन्हें खुले आसमान में आज़ाद उड़ते हुए देखें। प्रकृति में पछी सामाजिक गतिविधियों में लिप्त रहके हैं जैसे रेत में स्नान करना , लुका-छुपी खेलना, नाचना, अपने साथियों के साथ मिलकर घोसंला बनाना व छोटे पक्षियों की देखभाल करना। किन्तु जब इन्हें पिंजरों में कैद कर लिया जाता है तो मासूम पक्षी उदास हो जाते हैं व निराशा में वे अक्सर अपनी चोचं से खुद को घायल कर लेते हैं।

कुछ लोग जबरन इन बंदी पक्षियों के पखं कुतर देते हैं तािक वह उड़ न जाएँ। पंछियों के लिए उड़ना उतना ही स्वाभाविक व जरुरी है जितना इंसान के लिए चलना। इन पक्षियों को कैद कर छोटे डब्बों में भरकर एक ̾स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के दौरान पंख व पैरों के टूटने, निर्जलीकरण, भूख , तनाव तथा दम घुटने से अनेकों पक्षियों की मौत हो जाती है। पीटा इंडिया जिसके सिद्धांतों में से एक “जानवर किसी भी प्रकार से हमारे मनोरंजन के लिए नहीं हैं” इस बात का संज्ञान लेता है कि सरकार ने भारत में देशी पक्षियों की सभी 1200 प्रजातियों के कैद व व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया है साथ ही साथ प्रीवेंशन ऑफ क्रुआलटी टू एनिमल्स एक्ट 1960″ के तहत किसी जानवर को पिंजरे में कैद करना या ऐसी जगह पर रखना जहां चलने फिरने की पर्याप्त गुंजाइश न हो वा गैर कानूनी है और एक पंछी के लिए चलने फिरने का मतलब खुले आसमान में उड़ना है। लेकिन इन क़ानूनों के बावजदू मैना, चिड़याँ, तोते, बाज़, उल्लू तथा मोर को पिंजरों में कैद कर खुलेआम बाज़ारों में बेचा जाता है।

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