दबंगों के डर से पलायन को मजबूर परिवार

किशन कुमार।घर परिवार और पाटीदारों में अक्सर वाद विवाद होते रहते हैं । जमीनी बटवारा को लेकर तमाम तरह के विवाद देखने को मिलते हैं । लेकिन अगर इन विवादों को पुलिस समय रहते निपटारा कर दे तो निश्चित रूप से दोनों पक्ष आसानी से मान जाते हैं । कहीं ना कहीं खाकी का दबाव निश्चित रूप से काम करता है । लेकिन वहीं पर जब पीड़ित को ही दबाने का काम किया जाता है तब पीड़ित न्याय की आस में दर-दर भटकता है और कहीं से जब न्याय की उम्मीद नहीं दिखती है तो वह गांव छोड़कर, घर बेचकर पलायन करने के लिए मजबूर हो जाता है ।

ऐसा ही एक मामला अमेठी जनपद के मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत नौरंगाबाद गांव में देखने को मिला है । जहां पर निवास करने वाले मेवालाल गांव में अपनी पत्नी बूढ़े माता-पिता एवं बच्चों के साथ रहते थे । लेकिन मेवालाल घर का खर्च चलाने के लिए काम धंधे के सिलसिले में दिल्ली रहने लगा। इसी बीच उनके पाटीदार दर्शन इत्यादि ने गांव के अन्य लोगों के साथ मिलकर जमीनी विवाद खड़ा कर दिया। जब मेवालाल अपनी जमीन पर मकान बनाना चाहते थे और उसकी दीवार खड़ी कर दी थी तब पाटीदारों के द्वारा गांव के अन्य लोगों के साथ मिलकर दबंगई से उसकी दीवाल पर छप्पर रख दिया । जब वह लोग मना कर रहे थे तब पट्टीदारों ने उसकी दीवार को तोड़ दिया और घर में मौजूद मेवालाल की पत्नी और उनके बूढ़े पिता को पीटा ।

इस मामले में जब मेवालाल की पत्नी गीता के द्वारा पुलिस में शिकायत की गई तब पुलिस ने आकर कहा कि जमीन तेरी है या उसकी । पुलिस वालों ने गाली गलौज करते हुए भगा दिया और उसकी एक न सुनी गई हर जगह पर अपनी फरियाद लगाई । लेकिन जब किसी ने ना सुनी तब थक हार कर मेवालाल पड़ोसी जनपद सुल्तानपुर स्थित अपने रिश्तेदारों के यहां में जाकर रहने लगा । ऐसे में अभी भी उसको धमकी दी जाती है कि तुम अगर नहीं आओगे तो तुम्हारे बच्चों को उठा लिया जाएगा । इसी डर से मेवा लाल के बुजुर्ग माता-पिता अपने घर के बाहर मकान बिकाऊ है की नोटिस चस्पा कर मकान बेचकर गांव छोड़कर चले जाना चाहते हैं । जिससे इस समस्या से निजात मिल सके।

जबकि इस मामले में स्थानीय कोतवाली पुलिस ने पीड़ित मेवालाल को ही अवैध कब्जे तथा हिस्सा हड़पने की बात कही जा रही है पुलिस का कहना है कि मेवालाल और दर्शन दोनों सगे पाटीदार हैं । दोनों के मध्य आपसी पटवारी को लेकर विवाद है दर्शन का पुत्र बुधराम दिल्ली में रहकर मजदूरी करता था । उसकी अनुपस्थिति में दर्शन के चाचा मेवालाल के द्वारा उसकी जमीन पर दीवाल बनाकर कब्जा कर लिया गया । उसके द्वारा घर आकर अपना हिस्सा मांगने पर मेवालाल द्वारा अपनी पत्नी की तरफ से पेश बंदी के तहत इस तरह का कार्य किया जा रहा है । जिससे उसे उसका हिस्सा ना देना पड़े इसके इस मामले में अब तक मुसाफिरखाना पुलिस के द्वारा शांति भंग की धारा 151 और 107/16 में पाबंद किया गया है।

जबकि अगर मेवालाल इतना सरल और दबंग होता तो वह गांव छोड़कर पलायन न कर जाता है डर के मारे वह अपने रिश्तेदारों के यहां ना रहता। कहीं ना कहीं पुलिस की तरफ से बंटवारे को लेकर इस तरह की बात करना अपने आप में ही एक सवाल खड़ा करता है।

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