जानिए कौंच पर्वत कार्तिकेय मंदिर  क्यों है प्रसिद्ध ?
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संतोषसिंह नेगी/देवभूमि उत्तराखण्ड के जनपद रुद्रप्रयाग में कार्तिक स्वामी पवित्र पर्यटन स्थल है। भगवान कार्तिक स्वामी रुद्रप्रयाग और चमोली जनपद के 365 गांवों के कुल देवता हैं। यह मंदिर समुद्रतल से करीब 3050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।कार्तिक स्वामी में महायज्ञ –कौंच पर्वत पर स्थित कार्तिक स्वामी में महायज्ञ की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ शुरू हो गयी है। कार्तिक स्वामी में कई वर्षों से चली आ रही परंपरा आज भी कायम है प्रत्येक वर्ष 5 जून से महायज्ञ की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ शुरु होती है

एक नजर में कार्तिक स्वामी की पौराणिक कथानुसार- एक बार भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों से कहा जो ब्रह्माण्ड का पहले परिक्रमा लगाकर यहां आएगा वह माता-पिता की पूजा का प्रथम अवसर प्राप्त होगा। गणेश शिव भगवान के दूसरे पुत्र थे।गणेश ने माता पिता की परिक्रमा करके कहा की माता पिता ही मेरे लिए ब्रह्माण्ड है      जब कार्तिकेय ब्रह्माण्ड की परिक्रमा करके आये तो क्रोधित हो गए तब उन्होंने अपनी शरीर की हड्डियों को पिता शिव और मांस माता पार्वती को दे दिया।ये हड्डियाॅ आज भी कार्तिकेय मंदिर में मौजूद है जिन्हें हजारों भक्तों के द्वारा पूजा-अर्चना की  जाती है भारतवर्ष में कार्तिकेय का केवल यही मंदिर है

कैसे पहुंचे कार्तिक स्वामी –देवभूमि उत्तराखण्ड में हरिद्वार से 164 किमी दूर मोटर मार्ग रुद्रप्रयाग से पोखरी मोटर मार्ग पर 38 कि0मी0 दूर स्थित कनकचौंरी से आगे 3 किलोमीटर पैदल चलकर है। सहसा प्राकृतिक सौन्दर्य का दृश्यावलोकन करते करते भाव-विभोर हो जाता है। कनकचौंरी से क्रौंच पवर्त के दर्शन करने से ही आभास हो जाता है कि प्रकृति ने क्रौंच पवर्त का निर्माण दैवीय शक्ति के दिग्दर्शन हेतु किया है। इस शान्त वातावरण में भटके मन को असीम अध्यात्मिक शान्ति मिलती है

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