योगी सरकार को बदनाम कर रही यूपी पुलिस, फरियादी पर ही ठोंका एफ़आईआर
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करनैलगंज/गोण्डा। अक्सर यूपी पुलिस की कई कारगुजारियों पर आए दिन सवाल उठते रहे हैं। एक तरफ योगी सरकार आने के बाद कानून व्यवस्था जहाँ चुस्त दुरुस्त हुई हैं, अपराधियों की नकेल कसी जा रही है वहीं कुछ पुलिस वाले अभी भी पिछली सरकार के ढर्रे पर काम करने पर उतारु हैं पैसे के आगे ये कानून को ताक पर रख देते हैं ऐसे में फरियादी जाए तो जाए कहाँ। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले का है जहाँ परियादी के ऊपर ही पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर दी है।

क्या है पूरा मामला…?

उत्तर प्रदेश के जनपद गोण्डा के करनैलगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक द्वारा आदेश देकर एक एफआईआर दर्ज करवाई गई,जबकि जिस पक्ष की ओर से एफआईआर दर्ज करवाई गई है वो खुद उसी मामले में अभियुक्त हैं और जिनके खिलाफ नॉन बेलेवल वारंट भी जारी है यही नही पुलिस द्वारा चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।

कुछ वर्षों पूर्व जनपद गोण्डा की करनैलगंज तहसील के वकील श्यामधर शुक्ला द्वारा एक मृत व्यक्ति के स्थान पर किसी और व्यक्ति को खड़ाकर के एक जमीन का बैनामा अपनी पत्नी पवन कुमारी के पक्ष में फर्जी तरीके से करवाया गया, जिसके विरूद्ध अरविन्द कुमार द्विवेदी और राजकुमार सिंह के द्वारा एक एफआईआर थाना कोतवाली करनैलगंज में दर्ज करवाई गई थी,जिसमें पुलिस द्वारा विवेचना के आधार पर श्रीमती पवन कुमारी के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 419,420,467,468,471 में चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की गई और जिसके सम्बन्ध में न्यायालय द्वारा नॉन बेलेबल वारण्ट जारी किया गया है।

पुलिस की कार्य़शैली पर उठे सवाल

इधर बीते दो दिनों में थाना करनैलगंज प्रभारी निरीक्षक वेद प्रकाश श्रीवास्तव से साँठ गाँठ कर अधिवक्ता श्यामधर ने अपनी पत्नी पवन कुमारी की ओर से एक एफआईआर उन्हीं लोगों और उनके परिवार के लोगों पर दर्ज करवा दी जिनके द्वारा उपरोक्त जालसाज अधिवक्ता एवं उसकी पत्नी के विरूद्ध शिकायत कर एफआईआर दर्ज करवाई गई थी। अब जालसाज अधिवक्ता एवं प्रभारी निरीक्षक द्वारा शिकायती पक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके सुलह करवाने का प्रयास किया जा रहा हैऔर इस प्रकार पुलिस खुलेआम घूम रहेअपराधियों को गिरफ्तार करने के बजाय उनकी मदद कर उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों को समाप्त करवाने के लिए प्रयास कर रही है।

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