नासिक से आये 847 यात्री, पहुंचते ही बोले “थैंक्यू योगी” मेडिकल चेकअप में सब ठीक

मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ। कोरोना वायरस के संक्रमण में लम्बे लॉकडाउन के कारण अपने घरों से सैकड़ो किलोमीटर दूर फंसे 847 अप्रवासी कामगार विशेष ट्रेन से महाराष्ट्र के नासिक रोड रेलवे स्टेशन से लखनऊ पहुंचते ही बोलेे “थैंक्यू योगी”।नासिक रोड रेलवे स्टेशन से लखनऊ पहुंचने वाले इन सभी अप्रवासी श्रमिकों का मेडिकल चेपअप किया गया। स्कैनिंग के बाद इन सभी को रेलवे स्टेशन प्रांगण में ही नाश्ता का पैकेट प्रदान किया गया। इस दौरान रेलवे व जिला प्रशासन के साथ ही परिवहन विभाग व स्वास्थ्य विभाग की टीमें काफी मुस्तैद थीं। इन सारी प्रक्रिया के बाद इन सभी को विशेष बसों से उनके जिलों के लिए रवाना किया गया। जहां पर यह सभी लोग 14 दिन पर क्वारंटाइन होम में रहने के बाद अपने-अपने घर जाएंगे।

श्रमिक स्पेशल ट्रेन 02121 के यहां चारबाग रेलवे स्टेशन निर्धारित समय से सात मिनट पहले पहुंची ट्रेन के रुकते ही 42 दिन बाद रेल कर्मी भी काफी उत्साहित थे। रेल कर्मियों ने प्लेटफॉर्म नम्बर एक को बिल्कुल चमका दिया था। रेलवे स्टाफ भी इस दौरान शारीरिक दूरी का पालन करते हुए श्रमिकों को बीच-बीच में सतर्क कर रहे थे। रेलवे तथा जिला प्रशासन ने लखनऊ में दो दर्जन से अधिक मेडिकल स्टाफ को इनकी चेकिंग के लिए लगाया था। मेडिकल स्टाफ ने चारबाग स्टेशन के प्रवेश द्वार पर एक-एक श्रमिक की जांच की। इस दौरान कोई भी यात्री बुखार से पीडि़त नहीं पाया गया। लखनऊ पहुंचे श्रमिकों ने बताया उन्हें सफर के दौरान इटारसी में पूरी सब्जी और भुसावल में खिचड़ी दी गई थी। रेलवे कर्मी स्टॉपेज वाले स्टेशनों पर यात्रियों को शारीरिक दूरी बनाए रखने की सलाह दे रहे थे।

उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने इन सभी को इनके जिलों तक पहुंचाने के लिए 27 बसों का बेड़ा लगाया। बस में शारीरिक दूरी का पालन की प्रक्रिया के तहत इन सभी अप्रवासी कामगारों को बैठाया गया। एक बस में अधिकतम 25 से 28 यात्रियों को बैठाया गया। बस में भी इनको पानी के साथ भोजन का पैकेट दिया गया है। मास्क के साथ ही यात्रियों को रवाना किया गया। इन सभी ने यूपी सरकार का धन्यवाद अदा किया। इनमें से अधिकांश ने कहा कि अगर सीएम योगी आदित्यनाथ हमारी खबर न लेते तो हम लोग को कोई पूछने वाला नहीं था। इनमें से कोई मुंबई में ड्राइवर का काम करता है तो कोई मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था। लॉकडाउन के कारण इन दिनों सब बंद होने के कारण यह लोग घरों में दुबके थे।59 जिलों के श्रमिकों को अलग-अलग 11 लाइन में खड़ा करके उनका परीक्षण किया गया। करीब एक घंटा की जांच में सभी 847 यात्री स्वस्थ मिले। किसी को भी बुखार तक नहीं था।


इसके बाद इनको एक-एक करने गृह जनपद जाने वाली बसों में बैठाया गया।ट्रेन संख्या 02121 में श्रमिकों का ध्यान रखते हुए रेलवे प्रशासन ने 17 कोच की ट्रेन चलाई गई थी। इसमें पांच जनरल तथा 12 स्लीपर कोच थे। रेलवे प्रशासन ने प्रत्येक कोच में मानक के हिसाब से यात्रियों को बैठाया था। सफर के दौरान ट्रेन में चल रहे रेलवे स्टाफ बीच-बीच में सभी को शारीरिक दूरी बनाने के निर्देश भी देते रहे। श्रमिकों ने बताया नासिक में ट्रेन में चढ़ते वक्त रेलवे प्रशासन ने सभी की मेडिकल जांच कराई। सोनभद्र, श्रावस्ती, बांदा, गोंडा तथा सिद्धार्थनगर के श्रमिकों ने बताया की नासिक के जिस हॉस्टल में उन्हें रोका गया था वहां खाने पीने की कोई दिक्कत नहीं थी। उनको 370 रुपया खर्च करने ट्रेन का टिकट लेना पड़ा।

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