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updated 5:35 PM UTC, Apr 26, 2017
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"शंख प्रक्षालन" से कर सकते हैं 11 मीटर लम्बी आहार नाल को पूर्ण शुद्ध

गाजियाबाद,रविवार,13-11-2016 को अखिल भारतीय योग संस्थान के  योग विशेषज्ञ नेत राम जी ने शंखप्रक्षालन योग शिविर का शुभारम्भ ओ३म् की प्रणव ध्वनि व गायत्री मंत्र से किया जिसकी अध्यक्षता श्री के के अरोरा की ने की।श्री नेतराम जी ने साधकों को शंख प्रक्षालन की पाँचों क्रियाएँ ताड़ासन,त्रियकासन,कमरचक्रासन,त्रियक भुजंगासन व् उकड़ुआसन कराये गए जिसका सुन्दर डेमोस्ट्रेशन श्रीमती वीना वोहरा ने किया।शंख प्रक्षालन से पूर्व व बीच -2 में साधकों को सेंधा नमक युक्त आर ओ का गरम पानी पिलाया गया।

 

मंच का कुशल सञ्चालन संस्थान के महामंत्री देवेन्द्र हितकारी ने किया।

 

मुख्य शिक्षक मनमोहन वोहरा ने कहा  की मानव शरीर में अधिकांश रोग,शरीर के मध्य प्रदेश अर्थात पेट के शुद्ध न होने के कारण होते हैं।मानव की 11 मीटर लम्बी आहार नाल को भीतर से पूर्ण शुद्ध करने का सर्वोत्तम उपाय है "शंख प्रक्षालन"है।

 

नेहरू नगर स्थित सरस्वती शिशु मन्दिर के प्रांगण में कराया गया शंखप्रक्षालन

 

श्री वोहरा ने बताया की मानव पेट की 11 मीटर लम्बी आहार नाल की आकृति "शंख" की भांति घुमावदार होती है।उपयुक्त मात्रा में नमक युक्त गर्म जल की मुख के रास्ते से पिलाकर पांच विशेष आसान कराये जाते हैं जिससे यह जल जमे हुये मल को हाइड्रोलिक प्रेशर से धकेलता है।धीरे-2 शौच के रास्ते से पूरा पेट साफ़ हो जाता है।पेट शुद्धि की यही क्रिया शंख प्रक्षालन कहलाती है।शंखप्रक्षालन के बाद उपाध्यक्ष अशोक शास्त्री जी की देख रेख में कुंजल और जल नेती का अभ्यास कराया गया।

 

संस्थान के अध्यक्ष प्रोफेसर कृष्ण कुमार अरोरा ने बतया की  यह क्रिया वर्ष में केवल दो बार दीपावली  व होली के उपरान्त कराई जाती है।इस क्रिया के करने से मानव का पेट भीतर से स्वच्छ,रोग रहित,नर्म हो जाता है।

 

महासचिव देवेन्द्र हितकारी जी ने बताया की कब्ज़,एसिडिटी,डायबिटीज़ व उदर रोगियों के लिये यह क्रिया विशेष रूप से लाभ दिलाती है।पूर्ण क्रिया के बाद देशी घी से युक्त मुंग की दाल की खिचड़ी का सेवन कराया गया।

 

श्रीमती वीना वोहरा व् प्रवीण आर्य ने उठ जाग मुसाफिर भोर भई, प्रभु तेरा ओ३म् नाम सब का सहारा है,व ओ३म् का सिमरन किया करो प्रभु के सहारे जिया करो,जो दुनिया का मालिक है नाम उसी का लिया करो,आदि गीतों से समां बांध दिया।

शान्ति पाठ के साथ सभा सम्पन्न हुयी।

Last modified onSunday, 13 November 2016 12:10

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