Log in

 

updated 6:22 PM UTC, Mar 26, 2017
Headlines:

टेक्नोलॉजी को खेतों तक पहुंचाना बड़ी चुनौती - राधा मोहन सिंह

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि अगर भारत का भाग्य बदलना है तो गांव से बदलने वाला है, किसान से बदलने वाला है। हमारी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम किसानों को आधुनिक, टेक्नोलॉजी युक्त कैसे बनायें और जो आधुनिक अविष्कार हो रहे है उन्हें खेत तक कैसे पहुँचायें। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कहा कि हमारे देश में पहली कृषि क्रांति पश्चिमी छोर से अधिकतम पानी के भरोसे हुई अब दूसरी कृषि क्रांति की जरुरत है जो भारत के पूर्वी इलाकों से होगी। राधा मोहन सिंह ने ये बात आज राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर में भारतीय मृदा विज्ञान संस्था के 81वें वार्षिक सम्मेलन में कही। तीन दिनों के इस सम्मेलन में देश भर के मृदा वैज्ञानिक हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन का मुख्य विषय है ‘‘दलहनी फसलों के उत्पादन में निरन्तरता, कम में अधिक’’ 

केन्द्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि परिष्कृति कृषि पद्धति का कृषि में विशेष महत्व है। खेती की लागत में समुचित प्रयोग हेतु तथा कृषि उत्पादन शीलता बढ़ाने व उनकी क्षमता वृद्धि करने हेतु जमीन के समुचित समतलीकरण, जल के समुचित उपयोग उर्वरकों की उचित मात्रा, समय पर बुआई, कीट व्याधियों के समुचित प्रबंधन द्वारा आधुनिक अचूक विधि का प्रयोग किया जाना चाहिये। टिकाऊ कृषि के लिये यह एक सर्वोत्तम वैज्ञानिक विधि है। कृषि मंत्री बताया कि मृदा उत्पादन जल उत्पादकता, संसाधन प्रयोग क्षमता, पर्यावरण सुरक्षा तथा जलवायु परिवर्तन का प्रबन्धन आज के प्रमुख मुद्दे हैं। वर्षा आधारित खेती को प्रधानता, तेजी से बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन, आधुनिक यंत्रों द्वारा सघन खेती, अधिक व असंतुलित आदान प्रयोग, भूमि का अधिक दोहन एवं प्राकृतिक संसाधनों की तेज गिरावट से परिस्थिकीय असंतुलन से कृषि उत्पादन में गिरावट हो रही है। उन्होंने कहा कि लागत प्रभावी नवाचारी पर्यावरण हितैषी एवं स्थिति विनिर्दिष्ट टिकाऊ पद्धितियों की खोज आवष्यक है, जिससे कि कृषि वृद्धि दर अधिक टिकाऊ हो सके। 

Leave a comment

Make sure you enter the (*) required information where indicated. HTML code is not allowed.

loading...

New Delhi

Banner 468 x 60 px