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updated 4:51 PM UTC, Feb 19, 2018
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पहाड़ के स्कूल बंद होने की कगार पर

संतोष नेगी\चमोली|कहते है कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति,परिवार,समाज तथा राष्ट्र निर्माण में प्रगति का दीप जलाती है ।अगर किसी भी देश का सम्पूर्ण विकास करना है तो उस देश के बच्चों को सही शिक्षा दिलानी जरूरी होती है।

 

लेकिन लंबे समय से उपेक्षित पहाडों के विकास के लिए उत्तराखण्ड सरकार ने पलायन को रोकने के लिए पहाडों में सरकारी स्कूलों को खोला।



उत्तराखण्ड सरकार ने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए और आचरणमूल्यों को निखारने के लिए पहाडों में स्कूलों को खोला।लेकिन ज्यादातर पहाड़ी जिलों की स्थिति विस्मय होने के कारण इन स्कूलों में छात्रों की संख्या कम है।

 

ऐसे हालात में यह स्कूल बंद होने की कगार पर पहुँच गये है।सरकार के समक्ष शिक्षा सुधार संकट खड़ा हो गया है।

 

गौरतलब है कि पहाड़ लम्बे समय से पलायन की मार बिजली शिक्षा तथा पानी की कमी के कारण झेल रहा है।शासन ने भी पलायन को रोकने के लिए पलायन आयोग का गठन किया था।

 

Last modified onTuesday, 16 January 2018 11:17

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