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updated 6:53 PM UTC, Jan 16, 2018
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पहाड़ के स्कूल बंद होने की कगार पर

संतोष नेगी\चमोली|कहते है कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति,परिवार,समाज तथा राष्ट्र निर्माण में प्रगति का दीप जलाती है ।अगर किसी भी देश का सम्पूर्ण विकास करना है तो उस देश के बच्चों को सही शिक्षा दिलानी जरूरी होती है।

 

लेकिन लंबे समय से उपेक्षित पहाडों के विकास के लिए उत्तराखण्ड सरकार ने पलायन को रोकने के लिए पहाडों में सरकारी स्कूलों को खोला।



उत्तराखण्ड सरकार ने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए और आचरणमूल्यों को निखारने के लिए पहाडों में स्कूलों को खोला।लेकिन ज्यादातर पहाड़ी जिलों की स्थिति विस्मय होने के कारण इन स्कूलों में छात्रों की संख्या कम है।

 

ऐसे हालात में यह स्कूल बंद होने की कगार पर पहुँच गये है।सरकार के समक्ष शिक्षा सुधार संकट खड़ा हो गया है।

 

गौरतलब है कि पहाड़ लम्बे समय से पलायन की मार बिजली शिक्षा तथा पानी की कमी के कारण झेल रहा है।शासन ने भी पलायन को रोकने के लिए पलायन आयोग का गठन किया था।

 

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सूर्य देव की तपिश से भी कम नहीं हो रहा है,बेहरम सर्दी का सितम

रवि उपाध्याय.अमित सिहं..हरिद्वार.|धर्मनगरी हरिद्वार में सर्दी का सितम कम होने का नाम नहीं ले रहा है।इस बेरहम सर्दी ने अमीरों के आशियाने से लेकर गरीबों के आशियाने तक कोहराम मचा रखा है।

 

हालांकि आज शनिवार को धूप जरूर कूछ वक्त के लिए निकली लेकिन सूर्य देव की धूप भी शीतलहर के कहर को कम करने में नाकाम साबित हुयी। शाम होते होते शीतलहर ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया।इस शीतलहर का आम जनजीवन पर सीधा असर पड़ रहा है।

 

सर्दी की इस बेरूखी से बचने के लिए लोग अपने घरों में ही कैद रहते है.इस सर्दी का सितम आम जनजीवन को ही नहीं ठिठका रहा है बल्कि बाजारों को भी लाखों की चपत लगा रहा है। क्योंकि सर्दी से बचने के लिए आम जनजीवन घर पर ही रहना पसंद करता है।

 

गौरतलब है कि शहर से दूर उन गरीब लोगों का भी आशियाना है। जिनके पास न सर छिपाने के लिए घर है और ना ही गर्म कपडे खरीदने के लिए पैसे।ऐसे में उनका जीवन राम भरोसे ही रहता है।सर्दी के इस सितम से बचने के लिए वह सरकारी राहत की रेवडियां की ओर निहारते है।

 

हाल ही में धर्मनगरी हरिद्वार के प्राइवेट तथा सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में ह्रदय रोगियों की संख्या में भी भारी वृध्दि देखने को मिली है।सीधे तौर पर ठंड का असर आम जनजीवन पर ही नहीं बल्कि ह्रदय रोगियों के लिए भी मुसीबत का पैगाम बना हुआ है।

 

पुल निर्माण कार्य पूरा न होने पर बिफरे ग्रामीण ,अभियंता और ठेकेदार का घेराव

संताेष नेगी चमोली -जनपद चमोली के पोखरी ब्लाॅक के ग्राम सिदेली कुलेन्डू नौली में पुल  निमार्ण में विलम्ब होने पर ग्रामीणों ने युवा दिवस पर आक्रोश व्यक्त किया है।अधर में लटके पुल निर्माण कार्य को देख अधिशासी अभियन्ता राजेशचन्द्र भी नाखुश दिखाई दिये।

 

उन्होंने ठेकेदार को जलद पुल के निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए मजदूरों की आमद बढ़ाने को कहा है।जलद पुल के निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए पूरा ठेकेदार जमनाल ने कहा कि तीन दिन में मजदूरों की संख्या बढ़ाई जाएगी।

 

ठेकेदार जमनाल का कहना है कि जनवरी माह के अन्तिम सप्ताह तक पुल निर्माण का काम पूरा हो जाएगा।सिदेली कुलेन्डू के ग्रामीणों ने अधिशासी अभियंता और ठेकेदार से लिखित रूप से आश्वासन लिया।

 

गौरतलब है कि यह पुल सिदेली ग्राम को दूसरे ग्रामों से भी जोड़ता है रोजमर्रा की घरेलू उपभोग की वस्तुओं को लाने में गुडम पुल संजीवनी का कार्य करता है और सिदेली ग्राम के लोगों को 3 किमी. पैदल रास्ते को नापने से बचाता है।

 

इस मौके पर ग्राम प्रधान नैल दीपा देवी,गुडम प्रधान गुड्डी देवी तथा पूर्व प्रधान जीत सिंह और समस्त ग्राम का युवा वर्ग मौजूद था।




 

 

 

350 छात्र छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़

संतोष सिंह नेगी.चमोली..|जनपद चमोली के पोखरी ब्लाॅक स्थित गोदली इन्टर काॅलेज में निर्माणाधीन खेल मैदान बजट के आभाव में अधर में ही लटक गया है.धन के अभाव में निर्माणाधीन खेल मैदान की दीवार को बीच से ही मोड़ना पड़ा है।जबकि केन्द्र तथा राज्य सरकारें शिक्षा के साथ साथ खेल प्रतिभा को विश्व मंच पर लाने के लिए प्रोत्साहन दें रही है।

 

गोदली इंटर काॅलेज  में 10 ग्राम पंचायतों के 350 छात्र छात्रायें पढ़ने जाते है. 350 छात्र छात्राओं के खेल भविष्य को तय करने वाले खेल मैदान की स्थित ये हैं कि सांसद प्रतिनिधि बीरेन्द्र पाल भंड़ारी के द्वारा सासंद निधि से एक लाख रूपये का बजट स्वीकृत किया गया।

 

जबकि खेल मैदान की चार दीवारी में ही एक लाख से ज्यादा खर्च हो गये.ऐसी स्थिति में खेल मैदान का निर्माण कार्य बीच में ही रोक कर चार दीवारी को भी बीच में ही मोड़ दिया गया है।ऐसी स्थिति में 350 छात्र छात्राओं को खेल की दुनियाँ में अपनी चमक बिखेरने के लिए बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

 

 

 

उत्तराखण्ड में पलायन की समस्या जस की तस

संतोष सिंह नेगी/चमोली। उत्तराखंड को अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आए 18 वर्ष यानि बालिक होने जा रहा है. लेकिन इन बीते सालों में उत्तराखंड कितनी प्रगति के पथ पर आगे बढ़ा और जिस अवधारणा को लेकर अलग राज्य की माँग उठी थी. उस पर कितना खरा उतरा आज भी बड़ी बहस का मुद्दा बना हुआ है।

 

क्योंकि जब उत्तराखंड का उत्तर प्रदेश राज्य में विलय था। तब भी शासन ने पलायन की समस्या को रोकने के लिए आयोग बनाया था.और आज भी अलग उत्तराखंड में पलायन को रोकने के लिए आयोग ही बनाया गया।

 

शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क,बिजली और रोज़गार जैसी मूलभूत जरूरतों की अनुपलब्धता ने पहाड़ी क्षेत्रों सें पलायन की समस्या को हवा दी है.आज भी पहाड़ के दूरदराज क्षेत्रों में चिकित्सक तैनात नहीं है। स्कूलों की भरमार मगर शिक्षकों की तैनाती नहीं हो पाती है, रोज़गार के साधनों का जिक्र करना एक लाइलाज समस्या बनी हुई है। विकास की यात्रा में पहाड़ इतना पिछड गया है कि विकास के अभाव में लोगों को पलायन के लिए बाध्य होना पड़ा है।

 

अब पलायन की समस्या को रोकने के लिए संभवतया सरकार के द्वारा पलायन आयोग का गठन करने का फैसला लिया गया है। पलायन की तस्वीर चिन्ताजनक है।राज्य सरकार इस चुनौती से निपटने की दिशा में कितनी कामयाब रहती है।यह तो भविष्य के गर्भ में छिपी हुई बात है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को डाॅ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ’भारत गौरव पुरस्कार’ से नवाजा गया

ऋषिकेश, 2 जनवरी। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को डाॅ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ’भारत गौरव पुरस्कार’ से नवाजा गया।

युवा संसद (युथ पार्लियामेंट), भारत की ओर से स्वामी जी महाराज को भारतीय स्वाभिमान एवं संस्कृति रक्षार्थ के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान एवं सराहनीय उपलब्धि हेतु प्रदान किया गया।

यह पुरस्कार जोधपुर में आयोजित ’मैं भारत हूँ’ भव्य समारोह में प्रदान किया जाना था परन्तु नव वर्ष के अवसर पर माँ गंगा के दिव्य तट पर  ’राष्ट्र निर्माण पुरस्कार’ पूज्य स्वामी जी को प्रदान किया गया। मानों उनकी अतुलनीय उपलब्धियों के लिये पुरस्कार स्वयं पूज्य स्वामी जी के पास आया हो।

जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव एवं डीवाइन शक्ति फाउण्डेशन की अध्यक्ष साध्वी भगवती सरस्वती जी को भारत रत्न डाॅ एपीजे अब्दुल कलाम ’राष्ट्र निर्माण पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। युवा संसद, भारत द्वारा आध्यात्मिक एवं सेवा के क्षेत्र मंे उत्कृष्ट योगदान हेतु यह पुरस्कार प्रदान किया गया।

माँ गंगा के पावन तट पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और साध्वी जी को सदी के महान कलाकार श्री अनिल कपूर जी, श्री डेविड धवन जी, युवा संसद, भारत की चैयरपर्सन पार्वती जाँगिड सुधार जी, कृषि राज्य मंत्री भारत सरकार श्री गजेन्द्र शेखावत जी, राज्य सभा के चीफ एडवाॅइजर श्री रामा स्वामी जी, राज्यसभा सांसद सुश्री शशिकला जी एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा प्रदान किया गया।

पार्वती जाँगिड सुधार जी ने कहा कि ’पूज्य स्वामी जी युवाओं के प्रेरणास्रोत है। उनके संरक्षण में जो पर्यावरण, जल संरक्षण, वृक्षारोपण एवं नदियों की स्वच्छता के लिये जो कार्य किये जा रहे है वह अनुकरणीय है। उन्होने कहा कि परमार्थ गंगा तट पर होने वालीे गंगा आरती के माध्यम से विश्व के लोगो को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश प्रसारित किया जाता है वह जागरण का अनुपम माध्यम है। प्रतिदिन संायकाल इस तट पर आध्यात्म और जागरण का अनूठा संगम देखने को मिलता है ऐसा संगम हर तट पर हो तो समाज में विलक्षण परिवर्तन हो सकता है।’

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा ’जल, जंगल और जमीन के बिना मानव का जीवन सम्भव नहीं है। वर्तमान समय में मानवीय गतिविधियों के कारण ही प्राकृतिक संपदा खतरे में है; प्रदूषित हो रही है और इससे मानव जीवन भी प्रभावित हो रहा है। हम सभी मिलकर प्रकृति संरक्षण हेतु अपना योगदान दे तो इसके सुखद परिणाम निश्चित रूप से  प्राप्त होंगे। नये वर्ष को नये संकल्पों के साथ जियंें; अपने द्वारा कोई भी ऐसी गतिविधियां न करे जो समाज, राष्ट्र, विश्व और हमारे ग्रह के लिये घातक हो। हमारे छोटे-छोटे क्रियाकलापों द्वारा ही प्रदूषण फैलता है और इसे कम करने के लिये भी हमें छोटे-छोटे सुधार करने होंगे। आज तक दुनिया में जितनी भी क्र्र्र्र्रान्तियां हुई वह किसी व्यक्ति नहीं समुदाय के प्रयासों से सम्भव हो सकी। आईये वर्ष 2018 को अपने सपनों का भारत बनाने के लिये एक जूट होकर प्रयास करें और दुनिया का सबसे स्वच्छ, शान्त और समृृद्ध राष्ट्र बनाने के लिये थोडा सा़ अपना भी परिश्रम लगाये।’

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के साथ श्री अनिल कपूर जी, श्री डेविड धवन जी, युवा संसद, भारत की चैयरपर्सन पार्वती जाँगिड सुधार जी, कृषि राज्य मंत्री भारत सरकार श्री गजेन्द्र शेखावत जी, राज्य सभा के चीफ एडवाॅइजर श्री रामा स्वामी जी, राज्यसभा सांसद सुश्री शशिकला जी एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी में सहभाग किया। स्वामी जी ने जल संरक्षण की ओर सभी का ध्यान कराते हुये कहा कि ’जल है तो जीवन है, जल नहीं तो कल नहीं’। जल विशेषज्ञों के अनुसार भारत में वर्ष 2030 तक जल की मात्रा आधी हो जायेगी और विश्व स्तर पर यह वर्ष 2040 तक जल स्तर आधा होने का अनुमान है। जल इसी तरह घटते रहा तो भविष्य खतरे में हो सकता है अतः हमें आज से ही  जल संरक्षण क्रान्ति का सूत्रपात करना होगा।

 

स्वामी जी ने सभी को सकारात्मक प्रयासों के लिये समयदान एवं श्रमदान का संकल्प कराया।

गलती भी हम करेंगे तुम्हें पेंशन भी नहीं देंगे

संतोषसिंह नेगी चमोली |जनपद चमोली के विकास खण्ड पोखरी के कुलेंडू गांव में वृध्द चन्द्रसिंह नेगी की आयु 90 साल की होने के बाद भी वृद्धावस्था पेंशन नहीं लग पाई है. उनके पास आधार कार्ड नहीं होने के कारण वृध्दावस्था पेंशन नहीं लगी.जबकि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अन्तर्गत मिलने वाले जीने  के अधिकार की अवहेलना भी है।

 

कुलेन्डू गांव विकासखंड पोखरी मुख्यालय से 20किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. और यहां पहुँचने के लिए तीन किलोमीटर लम्बा दुर्गम पैदल मार्ग को पार करना होता है। वृध्द चन्द्रसिंह नेगी ने बताया कि आधार कार्ड नहीं होने के कारण उनको पेंशन नहीं मिल रही है आैर वह आधार कार्ड बनवाने जनसेवा केन्द्र गया था.लेकिन मशीन उनके अंगूठे  का निशान नहीं ले रहा है। मजबूरन इस अवस्था में दुर्गम मार्ग को पार करके मायूस घर लौटना पड़ता है। वृध्द चन्द्र सिहं नेगी ने अब वृध्दावस्था पेंशन की आस छोड़ दी है.उनका कहना है कि अब पंचायत व्यवस्था से विश्वास उठ गया है.जब उन्होंने ग्राम प्रधान से समस्या के समाधान की गुहार लगाई तो ग्राम प्रधान ने उनके दो नाम चन्द्रसिंह और चन्दन का हवाला देकर वृद्ध चन्द्रसिहं की समस्याओं से पल्ला झाड़ लिया।जब अपनी समस्या को लेकर गोपेश्वर समाज कल्याण में शिकायत दर्ज करवाई तो वहां भी कागजों का ढ़ेर जमा हो गया. आज तक समस्या के निस्तारण के लिए कोई भी आश्वासन नहीं मिला है।  

 

राजनीति की भेंट चढ़ा उतराखण्ड का विकास

संतोष सिंह नेगी/देहरादून।-देवभूमि के नाम से विश्व में विख्यात उत्तराखंड का जन्म 2001में पहाड़ के विकास के लिए एक बड़े राज्य जनांदोलन के बाद हुआ. पहाड़ का विकास यहां की सबसे बड़ी जरूरत थी। 17सालों के लंबे सफर के बाद भी उत्तराखंड का विकास जन भावनाओं पर खरा नहीं उतरा यह.सवाल आज भी लोगों के मन को कचोटता हैं ।पहाड़ का विकास माॅडल उस तरह नहीं  हुआ जिसकी उम्मीद पर आन्दोलनकारियों ने उत्तराखंड राज्य बनते देखा था ।

 

उत्तराखंड का आम आदमी भी मानता है कि पहाड़ का विकास रोज़गार की राह देख रहा है। पहाड़ वर्तमान में पलायन की मार झेल रहा है.सरकार का आंकलन है कि 16 साल में 32 लाख लोगों ने पहाड़ से पलायन किया।उत्राखण्ड के दोनों बड़े राजनीतिक दल पहाड़ के पानी और जवानी काे नहीं राेक पाए हैं। उत्तराखंड राज्य की कल्पना राजधानी गैरसैंण से जुड़ी हुई हैं. 17सालों के सफर में गैरसैंण राजनीति के कैंसर का शिकार बना हुआ है.17 सालों के सफर में उत्तराखण्ड की राजनीति में हुई आंतरिक उठापटक भी पहाड के विकास की राह में रोड़ा बनी।

 

बीती सरकार के कार्यकाल में इसकी बानगी देखने काे भी मिली है जिसके चलते उत्तराखण्ड राज्य की राजधानी देहरादून जाे पहाड़ के विकास के लिए कटिबध्द नजर नहीं आयी हैं।पहाड़ के.आम जनमानस  सड़क. स्वास्थ्य, पेयजल.बिजली.शिक्षा आदि पर अपना हक मांग रहे हैं।17सालों में जहां मैदानी राज्य विकास की नयी इबारत लिख रहे हैं,वहीं पहाड़ आज भी गैरसैंण स्थाई राजधानी से उम्मीद कर चिल्ला रहा है.आम जनमानस यातायात शिक्षा बिजली पानी आदि की जरूरत पूरी नहीं हाेने के कारण पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन करने पर मजबूर हाे रहे है।



भ्रष्टाचार नामक कैंसर से जूझ रही पहाड़ की राजनीति पहाड़ी क्षेत्राें के विकास की उपेक्षा ही करती रही.वर्तमान में बनी नयी भाजपा सरकार पहाड़ी क्षेत्रों के विकास की बयार लायेगी.यही साेच पहाड़ की जनता आज भी उम्मीदाें  का दामन थामे बैठी है। लेकिन पहाड़ी सराेकाराें ने जिन उम्मीदाें के साथ एक बड़ा जनआंदाेलन कर एक अलग उत्तराखण्ड राज्य का जन्म कराया वह विकास की उम्मीदाें पर परवान नही. चढ़ा है बल्कि पहाड़ का विकास राजनीति की भेंट जरूर चढ़ गया है।        

गंगा काे प्रदूषित हाेने से बचाएगी सीवर लाइन

अमित सिंह चन्द\हरिव्दारःधर्म नगरी हरिव्दार में सीवर के प्रदूषित पानी काे गंगा में गिरने से राेकने के लिए सरकार व्दारा तेजी से शहर में सीवर लाइन ड़ालने का काम हाे रहा है।बढ़ते गंगा के प्रदूषित पानी काे निर्मल स्वच्छ बचाने में सीवर लाइन अहम भूमिका निभायेगी।

 

गंगा के निर्मल जल काे स्वच्छ रखने के लिए केन्द्र सरकार ही नहीं वरन् राज्य सरकाराें ने भी बीड़ा उठाया है.उत्तराखण्ड सरकार के इस फैसले से उत्तराखण्ड की जनता काफी खुश नजर आ रही है।शहरवासियाें का कहना है कि शासन की इस पहल से केवल गंगा माता काे प्रदूषित हाेने से बचाया जायेगा बल्कि यह शहर काे भी साफ स्वच्छ रखेगा।

 

शहरवासियाें ने शासन की इस स्वच्छता की आेर कदम की जमकर प्रशंसा की.केन्द्र सरकार के साथ साथ राज्य सरकार भी स्वच्छता के प्रति कटिबध्द है।

भूख मिटाने में बाधक बना पुल

संताेष नेगी\चमोली -चमाेली के पोखरी ब्लाॅक के गुड़म सिदेली कुलेन्डू नौली नैल यातायात से जुड़ेने के लिए  एक पुल बाधक बन गया है।वर्ष 2008 से इस पुल का निर्माण कार्य चल रहा है.यह पुल 9 साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया है।



पुल निर्माण कार्य धीमी गति से होने के कारण ग्रामीणों को घरेलू उपभाेग की वस्तुआें काे तीन किलोमीटर पैदल रास्ते से लाना पड़ता है.जिससे ग्रामीणाें काे भारी मुश्किलाें का सामना करना पड़ रहा है।

 

वहीं लो.नि.वि.के अधिकारियो के ढल मुल रवैये से हो रही लापरवाही से ही ठेकेदार काम नहीं कर रहा है.जिससे पुल निर्माण कार्य अधर में ही लटका हुआ है. जबकि विधायक महेन्द्र प्रसाद भट्ट ने क्षेत्र भ्रमण के दौरान पुल का निर्माण कार्य  दिसंबर के अन्त तक पूरा होने का आश्वासन दिया था।लेकिन 9 साल की अवधि बीत जाने के बाद भी पुल निर्माण पूरा नहीं हाे सका है।

 

निर्माण कार्य धीमी गति से होने के कारण ग्रामीणों काे राेजमर्रा की वस्तुआें के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. आक्राेशित ग्रामीणाें का कहना है कि जनवरी के अन्त तक अगर पुल का काम पूरा नहीं होता है तो उग्र आंदोलन करने पर मंथन किया जायेगा।जिसमें सतीश, सजय, नरेंद्र, गजेंद्र आदि मौजूद थे

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