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updated 1:03 PM UTC, Aug 18, 2017
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इस स्कीम के तहत हवाई सेवा से जुडेंगे उत्तराखंड के सभी जनपद

देहरादून। उत्तराखंड के सभी जनपदों को रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (आरसीएस) के तहत हवाई सेवा से जोड़ा जाएगा। इसके लिए हेलिपैड, एयरस्ट्रिप बनाने का कार्य किया जा रहा है। गंगोत्री, यमुनोत्री के लिए चिन्यालीसौड़, बद्रीनाथ, केदारनाथ धाम के लिए गोचर हेलिपैड से हवाई सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। पंतनगर और पिथौरागढ़ से देहरादून, दिल्ली के साथ ही अन्य शहरों को जोड़ा जाएगा। 9-10 सितंबर को आयोजित होने वाले हिमालयन मीट में हिमालयी राज्यों के साथ रीजनल कनेक्टिविटी पर भी परिचर्चा रखी जाएगी। शुक्रवार को सचिवालय में एयरपोर्ट अथॉर्टी ऑफ इंडिया और उत्तराखंड सरकार के मध्य एमओयू हस्ताक्षर के अवसर पर मुख्य सचिव एस.रामास्वामी ने ये बातें कही।

 

भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण (एएआई) उत्तराखंड में नागरिक उड्डयन अवस्थापना में राज्य सरकार का सहयोग करेगा। इस बारे में किए गए एमओयू के अंतर्गत नागरिक उड्डयन सेवाओं के स्टजन, उच्चीकरण, अनुरक्षण और प्रबंधन में एएआई राज्य के साथ कार्य करेगा। मुख्य सचिव एस.रामास्वामी और एएआई के महाप्रबंधक अनिल गुप्ता ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर एसीईओं उकाडा(उत्तराखंड सिविल एवियेशन डेवलपमेंट अथॉर्टी) डॉ.आर.राजेश कुमार, कैप्टन अशोक शैट्टी, हेड ऑफ ऑपरेशन उकाडा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

 

बताया गया कि एमओयू का मकसद उत्तराखंड में नागरिक उड्डयन के विकास के लिए जरुरी कारकों का पता लगाना है। राज्य के विभिन्न हवाई अड्डों के व्यावसायिक क्षमता का मूल्यांकन करना और संचालन के लिए तकनीकी पहलुओं का पता लगाना है। परियोजना के विकास के लिए संबंधित तकनीकी इंजीनियरिंग पैरामीटर का मूल्यांकन करना और भावी कार्य योजना बनाना है। पिथौरागढ़ और चिन्यालीसौड़ में अपग्रेड हो रहे एयरपोर्ट के क्लियरेंस में उकाडा का सहयोग भी एएआई करेगा।

1200 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा "चारधाम महामार्ग" ,प्रधानमंत्री करेंगे शिलान्यास

चारधाम परियोजना के तहत उत्तराखंड में कुल 1200 करोड़ रुपये की लागत से 900 किमी. के राष्ट्रीय राजमार्ग का विकास किया जाना है।प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 27 दिसंबर, 2016 को देहरादून के परेड ग्राउंड में महत्वाकांक्षी 'चारधाम महामार्ग विकास परियोजना' की आधारशिला रखेंगे। इस परियोजना का उद्देश्य चार धाम तीर्थयात्रा केन्द्रों के लिए कनेक्टिविटी में सुधार लाना है ताकि इन केंद्रों तक यात्रा और सुरक्षित, तेज व और सुविधाजनक हो सके।राजमार्ग की चौड़ाई कम से कम 10 मीटर होगी। राजमार्ग पर यातायात में सुगमता के लिए सुरंग, बायपास, पुल, सब-वे आदि होंगे।

 

चारधाम रूट के साथ-साथ विभिन्न सुविधाओं और सार्वजनिक सुविधाओं का भी निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा यहां पार्किंग के लिए रिक्त स्थान और आपातकालीन निकास के लिए हेलीपैड भी बनाए जाएंगे


कुल 3000 करोड़ु रुपये की लागत वाली 17 परियोजनाओं को पहले ही मंजूरी दे दी गई है और उनके निविदाएं जारी की जा चुकी है। एक टीम को भूस्खलन वाले संवेदनशील क्षेत्र की पहचान करने के लिए लगाया जाएगा। ये टीम इन क्षेत्रों को सुरक्षित बनाने के लिए यहां के डिजाइन को लेकर सुझाव देगी।

उत्तराखंड सरकार ने कैलाश खेर पर उडाए 10 करोड !

देहरादून, भले ही उत्तराखंड को लोग गरीब राज्य मानते हों मगर वहाँ की काँग्रेस की सरकार दोनो हाथों से गलत तरीके से पैसे उडाने में लगी है एक आरटीआई से ये खुलासा हुआ है कि हरीश रावत सरकार नें वालीवुड के गायक कैलाश खेर की कंपनी कैलाशा इंटरटेनमेंट को ३ करोड ६६ लाख का पेमेंट किया गया है जो कि कैलाश खेर के द्वारा आमतौर पर लिए जाने वाले फीस का कई गुना ज्यादा है।                         

 गौरतलब हो कि कैलाश खेर को यह भुगतान आपदा प्रबंधन विभाग के तरफ से दिया गया है। अब तक कैलाश की को 3 करोड 66 लाख 74 हजार 304 रुपए की पेमेंट दे भी दी गई है। दबी जुबान से लोग यह भी बता रहे हैं कि कैलाशा इंटरटेनमेंट को सरकार ने इतना बडा काम बिना किसी टेंडर पर दे दिया गया। सही समय पर केदारनाथ आपदा के पीडितों की मदद न कर पाने वाली उत्तराखंड सरकार इतने पैसे में कई आपदा पीड़ित परिवारों की मदद कर सकती थी मगर सरकार ने इन पैसों को कैलाश खेर पर लुटा दिया।

उत्तराखण्ड सरकार ने अपने खर्चे के लिए हाल ही में खुले बाज़ार से 1200 करोड़ ( बारह सौ करोड़ रुपये) का कर्ज़ा लिया है वहीं कैलाश खेर के केदारनाथ के कार्यक्रम में मौजूद रहे लोगों का कहना है कि केदारनाथ में कैलाश खेर ने सिर्फ दो गानों पर लिप्सिंग की लाईव परफारमेंस की जहमत नही उठाई। अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि कहीं इस तरह का प्रोग्राम कराना सरकारी पैसों को ठिकाने लगाने के लिए तो नही कराया गया था।

स्वामी कैलाशानंद की खुली पोल-सरकार के काम दिलाने के एवज में ली BMW

देहरादून : आध्यात्म और राजनीति के घालमेल में अच्छे अच्छे गुरुओं की पोल खुल चुकी है इसी कडी में एक और नाम जुड गया है कैलाशानंद का। अध्यात्मिक गुरु और काली पीठ के महाराज स्वामी कैलाशानंद महाराज के ऊपर देहरादून के एक परिवार ने धोखाधडी का आरोप लगाया है। परिवार का आरोप है कि यूपी सरकार से काम दिलवाने के नाम पर स्वामी कैलाशानंद महाराज ने BMW कार ली लेकिन यूपी सरकार से कोई काम नही दिलवा पाए।

बाबा ने खुद को उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री आजम खाँ और शिवपाल यादव का करीबी बता कर यूपी सरकार से किसी बडे काम का टेंडर दिलवाने की एवज में BMW गाड़ी ली थी। लेकिन न काम हुआ न महाराज अब गाड़ी के पैसे दे रहे हैं और न गाडी वापस कर रहे हैं। उमेश बगिया से 2012 में बाबा ने कार ली थी मगर 2016 तक चार सालों से पीडित परिवार आश्रम और पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट काट कर थक गया है। गाडी लोन पर ली गई थी लिहाजा बैंक वाले पैसे देने का दबाव भी बना रहे थे। पुलिस इस मामले पर पल्ला झाड़ रही है।

दरअसल देहरादून के रेसकोर्स वेले में उमेश बगिया का परिवार रहता है। उमेश का कामकाज ठीक नहीं चल रहा था तभी उमेश के दोस्त ने उनकी मुलाकारत महाराज से करावाई और कहा कि यह यूपी सरकार के वरिष्ठ मंत्री शिवपाल यादव के करीबी है और वह उत्तर प्रदेश सरकार से काम दिलवा सकते है इसके एवज में महाराज जी को कुछ देना होगा।

उमेश की मां ने बताया कि काम दिलवाने की बात महाराजजी से हो गई और सात दिनों के अन्दर महाराज के आश्रम में चमचमाती BMW उनके बेटे ने खडी कर दी। पैसे की तंगी के बावजूद भी उमेश ने बाबा को गाड़ी किस्तों पर दिलवाई वो भी इस लिए की अगर महाराज काम दिलवा देते है तो वो आराम से इस गाड़ी के पैसे चुका देगा। लगभग 5 लाख रुपये देकर गाड़ी निकलवा तो ली लेकिन कुछ दिन तक उमेश को कोई काम नहीं मिला।

मां - बाप उमेश की पत्नी और बच्चो के साथ बड़ी मुश्किल से गुजरा कर रहे थे। अचनाक बैक से उनके पास नोटिस आने लगा। बेट उमेश डिप्रेशन में जाने लगा। उनके पास खाने तक के पैसे नहीं थे लिहाजा उनहोंने कैलाशानंद से गाड़ी के पैसे या गाडी दोनों में से कोई एक जीच देने को कहा मगर बाबा जी ने कुछ वापस नहीं किया।

दाने दाने के तरस रहा है यह परिवार

 

गढ़वाल आईजी संजय गुंजियाल से 16 फरवरी 2016 को इस मामले की शिकायत की गई थी लेकिन कोई फायद नहीं हुआ। एक तरफ गाडी की किस्त देने के लिए परिवार ने अपना घर गिरवी रख कर बैंक को पैसे दिए वहीं दूसरी तरफ बाबा कैलाशानंद चुप हैं। गाडी के पेपर उमेश के नाम पर है फिर भी पुलिस कार्यवाई करने में डर रही है।

जो हनुमान न खोज पाए वो संजीवनी बूटी खोजेगी रावत सरकार

देहरादून, उत्तराखंड की सरकार रामायण में उल्लेखित ''संजीवनी बूटी'' को खोजने के लिए एक विस्तृत योजना बना रही है । सरकार उस बूटी को खोजना चाहती है जिसको सूंघकर लक्ष्मण की जान बची थी, जब लक्ष्मण युद्ध के समय बुरी तरह से घायल हो गए थे। उत्तराखंड सरकार के मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी के मुताबिक सरकार ने उस बेशकीमती और प्राण बचाने वाली बूटी की खोज के लिए लगभग 25 करोंड रुपए का बजट निर्धारित किया गया है।

नेगी ने बताया कि रामायणकाल की वो जडी बूटी हमारी सरकार ढूँढ निकालेगी जो द्रोणागिरी में चीन के बार्डर के आस पास हो सकती है। नेगी का यह भी कहना है कि केन्द्र सरकार ने हमारे इस प्रोजेक्ट पर किसी तरह कि सहायता से इंकार कर दिया है।

 

अब देखना यह है कि जिस संजीवनी जडी-बूटी को महाबलिशाली हनुमान नही ढूँढ पाए और जडीबूटी की जगह पूरा पहाड ही उठाकर ले आए उस जडीबूटी को उत्तराखंड सरकार कैसे खोज निकालेगी।

केंद्र सरकार को उत्तराखंड हाइकोर्ट का झटका, उत्तराखंड राज्य से राष्ट्रपति शासन हटा 

 

 

 

देहरादून, केंद्र सरकार को झटका देते  हुए उत्तराखंड हाइकोर्ट राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाने का आदेश दिया ।राज्य से राष्ट्रपति शासन हटने के बाद अब 29 अप्रैल को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट किया जाएगा। सीएम हरीश रावत ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। उत्तराखंड से राष्ट्रपति शासन हटने के बाद कांग्रेस को 29 अप्रैल को बहुमत साबित करने का मौका मिलेगा। हरीश रावत ने हाईकोर्ट के इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि वह कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। नैनीताल हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद हरीश रावत ने कांग्रेस विधायकों की बैठक बुलाई है। बताया जा रहा है कि बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी।

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने कांग्रेस के बागी विधायको की सदस्यता रद्द कर दिया । कोर्ट ने कहा, बागियों ने जो संवैधानिक पाप किया है उसकी सजा उन्हें भुगतनी होगी। कांग्रेस विधायकों को  दलबदल का ‘‘संवैधानिक गुनाह' करने की कीमत चुकानी पडेगी । 

 भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय कहा उत्तराखंड हाइकोर्ट इस फैसले से चकित नहीं हैं। हमें पता था कोर्ट यही निर्णय होगा । केंद्र सरकार का कहना है कि वह नैनीताल हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।  

 

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राष्ट्रपति कोई राजा नहीं हैं-नैनीताल हाईकोर्ट

 

 नैनीताल हाईकोर्ट  ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के केंद्र सरकार के फैसले पर सख्त टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति कोई राजा नहीं हैं, जिसके फैसले की समीझा ना किया जा सके ।कोर्ट ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति के समक्ष रखे गए तथ्यों के आधार पर किए गए उनके निर्णय की न्यायिक समीक्षा हो सकती है.

हाईकोर्ट ने कहा कि हमारे संविधान की यही खूबी है कि राष्ट्रपति के निर्णय को भी चुनौती दी जा सकती है. पूर्ण शक्ति किसी को भी भ्रष्ट कर सकती है. राष्ट्रपति भी कभी-कभी गलत हो सकते हैं. सभी न्यायालयों के आदेशों का न्यायिक रिव्यू का अधिकार भारत के न्यायालयों में व्याप्त है।

 हाइकोर्ट के इस टिप्पणी के बाद केन्द्र ने उत्तराखंड हाइकोर्ट की टिप्पणी को गलत बताया है और कहा है कि सरकार इस टिप्पणी को निरस्त कराने या वापस लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट जा सकती है. गृहमंत्रालय इसे राष्ट्रपति पर निजी टिप्पणी मान रहा है। 

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तीन 'ओ' की वजह से मंजूर नहीं करवा पाये प्रस्ताव

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आज यह कहकर सनसनी फैला दी कि केंद्रीय जलसंसाधन मंत्री रहते हुए वह कई प्रस्ताव तीन 'ओ' की वजह से मंजूर नहीं करवा पाये। रावत ने तीन 'ओ' से निपटने में विफल रहने की यह बात यहां गंगा के लिये वानिकी प्रयासों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट(DPR) तैयार करने के लिये चल रही हितधारकों की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक में अपने संबोधन के दौरान कही।

हालांकि, बाद में रावत ने इन तीन 'ओ' का खुलासा करने से इंकार कर दिया और कहा कि जब वह चलने लायक नहीं रहेंगे, तभी इनसे पर्दा उठायेंगे।


उन्होंने कहा, 'फिलहाल इसका रहस्य बने रहने देना चाहिये। जब मैं चलने लायक नहीं रहूंगा तभी इनका रहस्योद्घाटन करुंगा।' रावत ने कहा कि जब वह केंद्रीय जलसंसाधन मंत्री थे तब उन्होंने कई प्रस्ताव बनाये थे लेकिन तीन 'ओ' की वजह से वे मंजूर नहीं हो सके।

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